
संवाद 24, बिश्केक/नई दिल्ली। भारत और किर्गिज़स्तान के बीच सांस्कृतिक, शैक्षिक और सभ्यतागत संबंधों को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल के तहत किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में ‘अंतरराष्ट्रीय सभ्यतागत अध्ययन केंद्र – मनास और महाभारत’ (International Centre for Civilizational Studies: Manas and Mahabharata) का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इसी अवसर पर विश्व के सबसे लंबे मौखिक महाकाव्यों में गिने जाने वाले प्रसिद्ध किर्गिज़ महाकाव्य ‘मनास’ के प्रथम हिंदी अनुवाद का भी विमोचन किया गया। इस पहल को भारत और मध्य एशिया के बीच सांस्कृतिक कूटनीति तथा ज्ञान साझेदारी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

भारत-किर्गिज़स्तान संबंधों में जुड़ा नया अध्याय
4 से 7 जुलाई 2026 तक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने किर्गिज़स्तान का दौरा किया और उद्घाटन समारोह में भाग लिया। यह अध्ययन केंद्र किर्गिज़स्तान की मनास राष्ट्रीय अकादमी तथा नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस (CSIR) के सहयोग से स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों की प्राचीन सभ्यताओं, महाकाव्य परंपराओं, इतिहास, संस्कृति तथा मानवीय मूल्यों पर संयुक्त अध्ययन को बढ़ावा देना है। इस आयोजन में भारत स्थित किर्गिज़ दूतावास तथा किर्गिज़स्तान स्थित भारतीय दूतावास ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
सात प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ हुआ त्रिपक्षीय सहयोग
समारोह के दौरान केवल अध्ययन केंद्र का उद्घाटन ही नहीं हुआ, बल्कि शैक्षिक सहयोग को संस्थागत स्वरूप देने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। सीएसआईआर, मनास राष्ट्रीय अकादमी तथा किर्गिज़स्तान के सात प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों—जिनमें किर्गिज़ नेशनल यूनिवर्सिटी (KNU), बिश्केक स्टेट यूनिवर्सिटी (BSU), अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल एशिया (AUCA), अला-टू इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी सहित अन्य संस्थान शामिल हैं—के बीच त्रिपक्षीय सहयोग समझौते संपन्न हुए। इन समझौतों के माध्यम से संयुक्त शोध, शोधार्थियों का आदान-प्रदान, प्रकाशन, अकादमिक प्रशिक्षण तथा सांस्कृतिक अध्ययन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक स्वागत
बिश्केक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक किर्गिज़ शैली में स्वागत किया गया। समारोह में प्रवेश के साथ ही दोनों देशों के ध्वजों और सांस्कृतिक प्रतीकों से सुसज्जित वातावरण ने भारत-किर्गिज़ मैत्री की भावना को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, राजनेता, छात्र, सांस्कृतिक विशेषज्ञ, पूर्व राजदूत तथा प्रसिद्ध ‘मनास’ वाचक उपस्थित रहे।

सुनील आंबेकर रहे मुख्य अतिथि
समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारी समिति सदस्य एवं मीडिया एवं संचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में प्रख्यात भाषाविद् तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के रूसी भाषा एवं साहित्य केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. हेमचंद्र पांडे, इंडिया–सेंट्रल एशिया फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं मेरी इंटरनेशनल स्टडीज़ सेंटर के निदेशक प्रो. रामकांत द्विवेदी, तथा सीएसआईआर के मानद निदेशक डॉ. पुनीत गौड़ भी शामिल थे।
राष्ट्रपति प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से हुई द्विपक्षीय बैठक
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति प्रशासन में राजनीतिक एवं आर्थिक अध्ययन विभाग के उप प्रमुख तथा रणनीतिक योजना एवं सुधार विश्लेषण प्रभाग के प्रमुख श्री ओक्तयाबर कपालबायेव के साथ विस्तृत द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक में शिक्षा, संस्कृति, सभ्यतागत अध्ययन, अनुसंधान सहयोग तथा भारत-मध्य एशिया संबंधों को और मजबूत करने के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई।
किर्गिज़ सरकार और भारतीय दूतावास की महत्वपूर्ण भागीदारी
उद्घाटन समारोह में किर्गिज़ गणराज्य के विज्ञान, उच्च शिक्षा एवं नवाचार के उप मंत्री दुरुसबेक कोज़ुएव, संस्कृति, सूचना, खेल एवं युवा नीति की उप मंत्री साल्किन सार्नोगोएवा, तथा किर्गिज़स्तान में भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव भी उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को केवल शैक्षणिक कार्यक्रम तक सीमित न रखकर दोनों देशों के आधिकारिक सहयोग का स्वरूप प्रदान किया।
‘महाभारत’ और ‘मनास’ मानव मूल्यों के प्रतीक: सुनील आंबेकर
अपने संबोधन में श्री सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत और किर्गिज़स्तान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध रहे हैं तथा दोनों देशों की सभ्यताओं में मानव मूल्यों, पारिवारिक व्यवस्था, नैतिकता और समाज निर्माण की समान परंपराएँ दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि ‘महाभारत’ भारतीय समाज के सांस्कृतिक और दार्शनिक विकास का आधार रही है, जबकि ‘मनास’ किर्गिज़ समाज की आत्मा का प्रतिनिधित्व करती है और हजारों वर्षों से वहां की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रही है। उन्होंने ‘मनास’ के हिंदी अनुवाद के लिए प्रो. रामकांत द्विवेदी और प्रो. हेमचंद्र पांडे के योगदान की विशेष सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के सांस्कृतिक संवाद का ऐतिहासिक क्षण बताया। साथ ही मनास राष्ट्रीय अकादमी की अध्यक्ष प्रो. नाज़ीरा आली किज़ी तथा आयोजन से जुड़े अन्य सहयोगियों के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
सभ्यतागत संवाद का वैश्विक मंच बनेगा नया केंद्र
सीएसआईआर के मानद निदेशक डॉ. पुनीत गौड़ ने कहा कि यह नया केंद्र भारत और किर्गिज़स्तान के बीच वैज्ञानिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक सहयोग का स्थायी मंच बनेगा। उन्होंने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यूरेशियाई देशों के बीच सभ्यतागत संवाद को बढ़ावा देने की परिकल्पना के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि केंद्र का प्रमुख फोकस महाकाव्य परंपराओं, सभ्यताओं के विकास, इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, अंतरसंस्कृति संवाद, मानवीय कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग तथा युवा शोधकर्ताओं के प्रशिक्षण पर रहेगा। यह केंद्र भविष्य में तुलनात्मक सभ्यता अध्ययन का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थान बन सकता है।
‘मनास’ का पहला हिंदी अनुवाद बना समारोह का आकर्षण
समारोह का सबसे विशेष आकर्षण प्रसिद्ध किर्गिज़ महाकाव्य ‘मनास’ के प्रथम हिंदी अनुवाद का विमोचन रहा। इस अनुवाद को प्रो. हेमचंद्र पांडे और प्रो. रामकांत द्विवेदी ने तैयार किया है।
प्रो. रामकांत द्विवेदी ने बताया कि यह अनुवाद किर्गिज़ गणराज्य के जन लेखक मार बैज़ीएव द्वारा रूसी भाषा में किए गए काव्यात्मक पुनर्कथन पर आधारित है। इसमें महाकाव्य की तीनों प्रमुख कड़ियाँ—‘मनास’, ‘सेमेटेई’ और ‘सेइतेक’—को समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का उद्देश्य भारतीय पाठकों को किर्गिज़ सभ्यता और साहित्य से परिचित कराना, दोनों देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना तथा महाकाव्य अध्ययन, सभ्यतागत विमर्श और मानवीय कूटनीति को नई दिशा देना है।
सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मनास और महाभारत’ अध्ययन केंद्र भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (Soft Power Diplomacy) को मध्य एशिया में और मजबूत करेगा। भारत लंबे समय से ऐतिहासिक, बौद्ध, सांस्कृतिक तथा सभ्यतागत संबंधों के माध्यम से मध्य एशियाई देशों के साथ अपने रिश्ते गहरे करने का प्रयास करता रहा है। नया केंद्र अकादमिक अनुसंधान, छात्र विनिमय, संयुक्त प्रकाशन, सांस्कृतिक संवाद और नीति-आधारित अध्ययन के लिए साझा मंच उपलब्ध कराएगा।
ऐतिहासिक स्थलों का भी किया भ्रमण
अपने दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वप्रसिद्ध लेखक चिंगिज़ ऐत्मातोव हाउस संग्रहालय तथा अता-बेयित राष्ट्रीय ऐतिहासिक एवं स्मारक परिसर का भी भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने किर्गिज़ इतिहास, साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्राप्त की तथा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और व्यापक बनाने पर विचार-विमर्श किया।
भारत-मध्य एशिया संबंधों के लिए महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि बिश्केक में स्थापित यह अंतरराष्ट्रीय सभ्यतागत अध्ययन केंद्र केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि भारत और किर्गिज़स्तान के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत, महाकाव्य परंपराओं और मानवीय मूल्यों को जोड़ने वाला दीर्घकालिक सेतु है। ‘महाभारत’ और ‘मनास’ जैसी दो महान महाकाव्य परंपराओं के माध्यम से दोनों देशों के बीच ज्ञान, संस्कृति और सभ्यतागत संवाद को नई गति मिलेगी, जिससे भारत-मध्य एशिया संबंधों को भविष्य में और अधिक मजबूती मिलने की संभावना है।






