ICU में डॉक्टर ही नहीं था मौजूद! मुजफ्फरपुर अग्निकांड में चौंकाने वाला खुलासा, अस्पताल की लापरवाही पर उठे बड़े सवाल

संवाद 24 बिहार । मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में हुए भीषण अग्निकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। ताजा जांच में यह बात सामने आई है कि हादसे के समय आईसीयू में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौजूद ही नहीं था। इतना ही नहीं, मरीजों की निगरानी और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था भी बेहद कमजोर पाई गई। इस खुलासे के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अग्निकांड ने खोली अस्पताल की व्यवस्था की पोल
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में तड़के आग लगने से कई मरीजों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हो गए। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट या ऑक्सीजन सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी को संभावित कारण माना गया था, लेकिन अब प्रशासनिक लापरवाही का मामला भी सामने आने लगा है।

ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के गायब रहने का आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस डॉक्टर की ड्यूटी आईसीयू में लगाई गई थी, वह हादसे के समय मौके पर मौजूद नहीं था। अस्पताल के रिकॉर्ड और कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान यह जानकारी सामने आई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि गंभीर मरीजों से भरे आईसीयू को बिना डॉक्टर की निगरानी के कैसे छोड़ दिया गया।

मरीजों की देखरेख के पर्याप्त इंतजाम नहीं
जांच अधिकारियों को अस्पताल में मरीजों की निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में भी कई खामियां मिली हैं। बताया जा रहा है कि आईसीयू में भर्ती मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा था। यही वजह रही कि आग लगने के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए और मरीजों को समय पर बाहर निकालना मुश्किल हो गया।

क्षमता से अधिक मरीज भर्ती करने का आरोप
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिस आईसीयू की क्षमता 13 बेड की थी, उसमें 15 मरीजों को भर्ती किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षमता से अधिक मरीज रखने से किसी भी आपात स्थिति में बचाव कार्य प्रभावित होता है और खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
हादसे के बाद मृतकों और घायलों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कई परिजनों का कहना है कि आग लगने के बाद अस्पताल का कुछ स्टाफ मरीजों को छोड़कर बाहर निकल गया। वहीं कई परिवारों को यह तक जानकारी नहीं दी गई कि उनके मरीजों को किस अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। इन आरोपों ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया है।

मौतों का आंकड़ा बढ़ने से बढ़ी चिंता
शुरुआत में चार से पांच मौतों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर छह तक पहुंचने की पुष्टि हुई। कई मरीज गंभीर रूप से झुलस गए थे और उनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

तीन अस्पताल कर्मी गिरफ्तार
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अस्पताल से जुड़े तीन कर्मियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। अस्पताल के मालिक की तलाश में भी छापेमारी की जा रही है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
मुजफ्फरपुर का यह अग्निकांड केवल एक अस्पताल तक सीमित मामला नहीं माना जा रहा। इस घटना ने निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों, फायर सेफ्टी सिस्टम, डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों की देखरेख को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाता तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।

जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि आग का वास्तविक कारण क्या था और अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी किस हद तक तय होती है। लेकिन शुरुआती खुलासों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि सुरक्षा और निगरानी में हुई चूक ने इस हादसे को और भयावह बना दिया। अब पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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