
संवाद 24 नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की खुलकर सराहना की है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिए गए अपने ताजा संबोधन में पुतिन ने भारत को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और सॉफ्टवेयर क्षेत्र का “दिग्गज” बताते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उनके इस बयान को ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक शक्तियों के संतुलन में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।
BRICS को लेकर पुतिन का बड़ा दावा
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान पुतिन ने कहा कि BRICS देशों का संयुक्त आर्थिक आकार अब G7 समूह से आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण (Global South) की ताकत लगातार बढ़ रही है और विकासशील देशों की आवाज अब पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हो चुकी है। पुतिन के अनुसार आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में BRICS की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।
भारत को बताया BRICS का प्रमुख साझेदार
अपने संबोधन में रूसी राष्ट्रपति ने भारत को BRICS का एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने विशेष रूप से भारत के आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीकी नवाचार और डिजिटल विकास के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। पुतिन का मानना है कि भारत की तकनीकी क्षमता आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।
भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना
रूसी राष्ट्रपति ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि को भी उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि भारत लगातार नए निवेश आकर्षित कर रहा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी जिक्र किया और कहा कि भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है।
भारत-रूस संबंधों पर दोहराया भरोसा
पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस भारत को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि भारत के अन्य देशों के साथ संबंधों से रूस को कोई चिंता नहीं है। उनके अनुसार भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने वाला स्वतंत्र देश है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
पश्चिमी दबाव पर भी दिया संदेश
अपने वक्तव्य में पुतिन ने पश्चिमी देशों द्वारा विभिन्न देशों पर डाले जाने वाले दबाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े और आत्मविश्वासी देश पर बाहरी दबाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। रूस का मानना है कि नई दिल्ली अपने रणनीतिक हितों के आधार पर फैसले लेती है और यही वजह है कि भारत वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त कर रहा है।
व्यापारिक संबंधों में नई ऊंचाइयों की उम्मीद
रूस और भारत के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों पर चर्चा करते हुए पुतिन ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ऊर्जा, निवेश, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। दोनों देश नए अवसरों की तलाश में लगातार काम कर रहे हैं।
2026 BRICS शिखर सम्मेलन पर टिकी नजरें
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सितंबर में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होने की संभावना है। रूस पहले ही भारत की अध्यक्षता का समर्थन कर चुका है। माना जा रहा है कि आगामी सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक सुधार, डिजिटल सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार और वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे।
वैश्विक मंच पर बढ़ती भारत की प्रतिष्ठा
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं बल्कि बदलती वैश्विक वास्तविकता का संकेत भी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, अंतरिक्ष कार्यक्रम, वित्तीय नवाचार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां भारत को भविष्य की वैश्विक व्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक मान रही हैं। पुतिन के ताजा बयान ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में उसकी भूमिका और अधिक निर्णायक हो सकती है।






