TCS धर्मांतरण केस में बड़ा खुलासा, फरारी के दौरान AIMIM पार्षद के घर छिपी थी निदा खान
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संवाद 24 महाराष्ट्र । चर्चित TCS धर्मांतरण और उत्पीड़न मामले में जांच लगातार गहराती जा रही है। इस केस की मुख्य आरोपी और TCS कर्मचारी निदा खान की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर उन लोगों पर भी टिक गई है जिन्होंने फरारी के दौरान उसकी मदद की। ताजा जानकारी के अनुसार निदा खान को कथित तौर पर AIMIM से जुड़े एक पार्षद ने शरण दी थी, जिसके बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है।
छत्रपति संभाजीनगर से हुई गिरफ्तारी
करीब 25 दिनों तक फरार रहने के बाद पुलिस ने निदा खान को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों को लंबे समय से उसकी तलाश थी। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी के दौरान यह जानकारी सामने आई कि फरारी के समय उसे स्थानीय स्तर पर मदद मिल रही थी। इसी कड़ी में AIMIM के एक पार्षद का नाम सामने आया है।
AIMIM पार्षद पर लगा मदद का आरोप
जांच में सामने आया कि AIMIM पार्षद मतीन पटेल पर निदा खान को छिपाने और कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने उन्हें मामले में आरोपी बनाया है और पूछताछ भी की जा रही है। हालांकि अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जो भी लोग आरोपियों की मदद करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा TCS मामला?
यह मामला नासिक स्थित TCS के एक BPO कार्यालय से जुड़ा है, जहां कई महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्म परिवर्तन कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतों के बाद पुलिस ने अलग-अलग FIR दर्ज कीं और कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी थी।
पुलिस जांच में सामने आए कई दावे
जांच एजेंसियों का कहना है कि कुछ कर्मचारियों पर धार्मिक गतिविधियों के लिए दबाव बनाने और कार्यस्थल पर विशेष धार्मिक प्रथाओं को बढ़ावा देने के आरोप भी लगे हैं। पुलिस के मुताबिक कुछ पीड़ितों ने बयान में कहा कि उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और शिकायतों को नजरअंदाज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम भी बनाई गई है।
राजनीति भी हुई तेज
निदा खान की गिरफ्तारी और AIMIM पार्षद का नाम सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा और शिवसेना नेताओं ने पूरे मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की है। विपक्षी दलों का कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।
TCS ने क्या कहा?
इस मामले पर TCS की ओर से पहले ही बयान जारी किया जा चुका है। कंपनी ने कहा कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।
जांच के अगले कदम पर सबकी नजर
फिलहाल पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फरारी के दौरान निदा खान को और किस-किस से मदद मिली। जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक सबूत, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।






