तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा संकेत! स्टालिन बोले- ‘विजय सरकार बनाए, DMK छह महीने तक नहीं करेगी दखल’

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संवाद 24 तमिलनाडु। विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। दशकों से राज्य की सत्ता पर काबिज द्रविड़ दलों के वर्चस्व को तोड़ते हुए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। चुनाव परिणाम आने के बाद अब सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच डीएमके प्रमुख और निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने तमिलनाडु की राजनीति को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है।

स्टालिन ने कहा- छह महीने तक सिर्फ देखेंगे
एमके स्टालिन ने साफ शब्दों में कहा कि अगर विजय सरकार बनाते हैं तो डीएमके अगले छह महीने तक किसी तरह की दखलअंदाजी नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी नई सरकार के कामकाज पर नजर रखेगी, लेकिन शुरुआत में किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश नहीं की जाएगी। स्टालिन के इस बयान को राजनीतिक जानकार बेहद अहम मान रहे हैं, क्योंकि चुनाव में हार के बाद भी डीएमके ने आक्रामक विपक्ष की रणनीति नहीं अपनाई है।

TVK बनी सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत से दूर
तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि पार्टी अभी पूर्ण बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें दूर बताई जा रही है। कांग्रेस ने समर्थन का संकेत दिया है, लेकिन इसके बावजूद सरकार गठन की प्रक्रिया अभी पूरी तरह साफ नहीं मानी जा रही। विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है, मगर राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते नजर आ रहे हैं।

डीएमके की हार ने सबको चौंकाया
इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका डीएमके को लगा है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन खुद अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर से चुनाव हार गए। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में बदलाव की चाहत, युवाओं का समर्थन और विजय की लोकप्रियता ने चुनावी माहौल पूरी तरह बदल दिया। TVK ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए जिस तरह प्रदर्शन किया, उसने पूरे देश का ध्यान तमिलनाडु की राजनीति की ओर खींच लिया है।

कांग्रेस के फैसले से INDIA गठबंधन में तनाव
विजय को कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद विपक्षी INDIA गठबंधन के अंदर भी तनाव खुलकर सामने आने लगा है। डीएमके नेताओं ने कांग्रेस के इस कदम को राजनीतिक विश्वासघात तक बता दिया। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद कांग्रेस ने सहयोगी दल की बजाय नई राजनीतिक ताकत के साथ खड़े होने का फैसला किया। इससे गठबंधन की भविष्य की राजनीति पर भी सवाल उठने लगे हैं।

AIADMK ने भी समर्थन से किया इनकार
जहां कांग्रेस ने विजय को समर्थन देने का संकेत दिया है, वहीं AIADMK ने साफ कर दिया है कि वह TVK सरकार को किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं देगी। पार्टी नेताओं ने कहा कि वे विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे लेकिन विजय के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे। इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में जोड़तोड़ और समीकरणों की चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

फिल्मी स्टार से राजनीतिक शक्ति बनने तक का सफर
विजय का राजनीतिक सफर अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। फिल्मों में बड़ी लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और बेहद कम समय में जनता के बीच मजबूत पकड़ बना ली। उनकी पार्टी ने युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के बीच खास प्रभाव छोड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि विजय ने खुद को पारंपरिक राजनीति के विकल्प के रूप में पेश किया, जिसका उन्हें चुनाव में बड़ा फायदा मिला।

अब सबकी नजर सरकार गठन पर
तमिलनाडु में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय स्थिर सरकार बना पाएंगे या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी। राज्यपाल की भूमिका, सहयोगी दलों का रुख और विपक्ष की रणनीति आने वाले दिनों में बेहद अहम साबित हो सकती है। फिलहाल एमके स्टालिन के बयान ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि डीएमके जल्दबाजी में टकराव की राजनीति नहीं करना चाहती। लेकिन छह महीने बाद तमिलनाडु की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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