CBI के अपने ही अफसर पर शिकंजा, करोड़ों की संपत्ति मामले में DSP और पत्नी के खिलाफ केस दर्ज

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संवाद 24 नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत बड़ा कदम उठाते हुए अपने ही एक पूर्व डीएसपी और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि अधिकारी ने सेवा के दौरान अपनी वैध आय से कहीं ज्यादा संपत्ति अर्जित की और कई वित्तीय लेनदेन संदिग्ध पाए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

तीन साल में तेजी से बढ़ी संपत्ति
सीबीआई के अनुसार आरोपी अधिकारी बृजमोहन मीणा मुंबई स्थित बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच में तैनात थे। जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच उन्होंने और उनकी पत्नी ने लगभग 98 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की, जो उनकी ज्ञात आय से करीब 88 प्रतिशत ज्यादा बताई जा रही है। एजेंसी का कहना है कि इस दौरान कई बैंक खातों में भारी रकम जमा की गई और संपत्तियों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई। जांच अधिकारियों के मुताबिक प्रारंभिक दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच के बाद यह मामला दर्ज किया गया। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर जुटाई गई रकम किन स्रोतों से आई और उसका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।

पहले भी लग चुके हैं रिश्वतखोरी के आरोप
यह पहला मामला नहीं है जब अधिकारी का नाम विवादों में आया हो। इससे पहले भी उन पर रिश्वत लेने और जांच के नाम पर लोगों को डराकर पैसे वसूलने के आरोप लग चुके हैं। वर्ष 2024 में दर्ज एक अन्य भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने दावा किया था कि अधिकारी और उनके सहयोगियों ने करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की थी। उसी जांच के दौरान कई दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड बरामद हुए थे, जिसके आधार पर अब आय से अधिक संपत्ति का नया मामला दर्ज किया गया है। सूत्रों के अनुसार पूर्व जांच में कई शहरों में छापेमारी भी की गई थी, जहां से नकदी, संपत्ति के कागजात और लेनदेन से जुड़े दस्तावेज मिले थे। एजेंसी को शक है कि कथित रिश्वत की रकम को अलग-अलग खातों और माध्यमों से घुमाया गया ताकि उस पर संदेह न हो।

पत्नी की भूमिका भी जांच के दायरे में
सीबीआई ने इस मामले में अधिकारी की पत्नी को भी आरोपी बनाया है। एजेंसी का दावा है कि कई संदिग्ध बैंक खातों और संपत्तियों में उनकी सक्रिय भूमिका सामने आई है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या वित्तीय लेनदेन जानबूझकर उनके नाम से किए गए थे ताकि संपत्ति को छिपाया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि बैंक स्टेटमेंट, निवेश और संपत्ति खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ भी की जा सकती है।

CBI की कार्रवाई से एजेंसी के भीतर चर्चा तेज
अपने ही अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होने से सीबीआई के अंदर भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। एजेंसी ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह संगठन का हिस्सा ही क्यों न हो। अधिकारियों का कहना है कि संस्थान की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच एजेंसियों के भीतर भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्ती से कार्रवाई होना व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए जरूरी कदम है। इससे यह संदेश भी जाता है कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।

आगे क्या होगी कार्रवाई?
फिलहाल सीबीआई इस मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति खरीद और बैंक लेनदेन की गहन जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अवैध संपत्ति किन-किन माध्यमों से बनाई गई और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे। आने वाले दिनों में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार यदि आरोप साबित होते हैं तो भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल यह मामला देश की प्रमुख जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली और आंतरिक निगरानी व्यवस्था को लेकर भी नई बहस छेड़ रहा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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