सैकड़ों किलोमीटर दूर रिश्वत लेने पहुंचे दरोगा और 3 सिपाही: सीकर ACB ने 2.80 लाख के साथ दबोचा, SSP ने चारों को किया सस्पेंड

संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़ा भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला राजस्थान के सीकर में सामने आया है। अयोध्या के साइबर क्राइम थाने में तैनात एक उपनिरीक्षक और तीन कांस्टेबल कथित तौर पर एक साइबर क्राइम मामले में आरोपी का नाम हटाने के बदले रिश्वत की रकम लेने राजस्थान के सीकर पहुंचे। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की सीकर इकाई ने ट्रैप कार्रवाई करते हुए चारों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया।

ACB के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से 2.80 लाख रुपये की कथित रिश्वत बरामद हुई है। गिरफ्तार पुलिसकर्मियों की पहचान उपनिरीक्षक यशवंत सिंह, कांस्टेबल पवन कुमार त्रिपाठी, सोहनलाल और गौरव चारग के रूप में हुई है। मामले की जानकारी अयोध्या पुलिस को मिलने के बाद SSP डॉ. गौरव ग्रोवर ने चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया और विभागीय जांच के आदेश दिए।

साइबर क्राइम केस में नाम हटाने के बदले मांगे थे 4 लाख

ACB के मुताबिक, मामला अयोध्या साइबर क्राइम थाने में वर्ष 2024 में दर्ज एक साइबर अपराध केस से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके भाई का नाम इस मुकदमे में शामिल था और पुलिसकर्मियों की ओर से नाम हटाने के बदले कथित तौर पर 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, पहले ही करीब 4 लाख रुपये दिए जा चुके थे और बाकी रकम के लिए पुलिसकर्मियों ने उसे सीकर में बुलाया। हालांकि, रिश्वत की पूर्व रकम और पूरे घटनाक्रम से संबंधित सभी तथ्यों की पुष्टि अब ACB की विस्तृत जांच में होगी।

शिकायत के बाद ACB ने बिछाया जाल

रिश्वत की मांग से परेशान शिकायतकर्ता ने राजस्थान ACB से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद सीकर ACB ने कथित रिश्वत मांग का सत्यापन कराया। ACB के अनुसार, सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई। इसके बाद बातचीत के बाद कथित तौर पर 4 लाख रुपये की मांग घटाकर 2.80 लाख रुपये पर सौदा तय हुआ। इसके बाद ACB ने ट्रैप की योजना तैयार की। मामले में शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और ACB की कार्रवाई के आधार पर पुलिसकर्मियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

अयोध्या से सीकर पहुंची पुलिस टीम

ACB के अनुसार, अयोध्या साइबर क्राइम थाने में तैनात चारों पुलिसकर्मी कथित रिश्वत की रकम लेने के लिए सीकर पहुंचे थे।मंगलवार को कथित रूप से 2.80 लाख रुपये लेने के बाद वे वापस अयोध्या के लिए रवाना हो गए। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना ACB टीम को दी। इसके बाद ACB ने उनका पीछा शुरू किया।

टोल प्लाजा पर रोकी कार, भागने की कोशिश का भी आरोप

ACB ने आरोपियों को सीकर-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रसीदपुरा टोल प्लाजा के पास रोका। तलाशी के दौरान उनके पास से कथित रिश्वत की रकम 2.80 लाख रुपये बरामद की गई। ACB अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी रकम के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कुछ लोगों द्वारा यह भी दावा किया गया है कि आरोपियों ने ACB की गाड़ी को टक्कर मारकर मौके से निकलने की कोशिश की। हालांकि इस घटनाक्रम की विस्तृत परिस्थितियां और वाहन टक्कर से संबंधित तथ्य जांच का हिस्सा हैं।

ACB ने चारों को किया गिरफ्तार

राजस्थान ACB ने चारों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। ACB अधिकारियों के अनुसार, आगे की जांच में रिश्वत की मांग, रकम के लेन-देन, साइबर क्राइम केस में आरोपी की भूमिका और पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच की जाएगी।

अयोध्या SSP ने तत्काल लिया एक्शन

राजस्थान में अयोध्या पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की जानकारी मिलते ही अयोध्या पुलिस विभाग में भी कार्रवाई हुई। SSP डॉ. गौरव ग्रोवर ने चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।  यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला किसी स्थानीय पुलिस थाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित रिश्वत की रकम लेने के लिए पुलिसकर्मियों के दूसरे राज्य तक जाने का आरोप सामने आया है।

जांच में अब इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे

इस मामले में ACB के सामने कई अहम सवाल हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि साइबर क्राइम मामले में नाम हटाने के लिए रिश्वत की मांग किस स्तर पर की गई थी और इसमें चारों पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या थी। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आ सकता है कि कथित तौर पर पहले दी गई रकम का लेन-देन कैसे हुआ, 2.80 लाख रुपये लेने की योजना किसने बनाई और राजस्थान में रकम लेने के लिए पुलिसकर्मियों का पहुंचना किसके निर्देश पर हुआ। जांच एजेंसी मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट, बैंकिंग लेन-देन और कथित रिश्वत के संबंध में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल कर सकती है।

साइबर क्राइम की जांच पर भी उठेंगे सवाल

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोपी पुलिसकर्मी साइबर क्राइम थाने में तैनात थे। साइबर अपराधों की जांच में पुलिस अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों, तकनीकी रिकॉर्ड और पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करनी होती है। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है कि किसी व्यक्ति का नाम मुकदमे से हटाने के लिए धन की मांग की गई थी, तो यह पुलिस विवेचना की निष्पक्षता और साइबर अपराध जांच की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक साइबर क्राइम जानकारी के अनुसार साइबर अपराधों की शिकायत और जांच के लिए निर्धारित तंत्र मौजूद है तथा वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में नागरिकों को 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की सलाह दी जाती है।

राजस्थान ACB की कार्रवाई से खुला मामला

यह पूरी कार्रवाई राजस्थान ACB की शिकायत, सत्यापन और ट्रैप प्रक्रिया के बाद सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ACB मुख्यालय के निर्देश और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में सीकर इकाई ने कार्रवाई की। मामले की जांच जारी है। इसलिए फिलहाल आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। अदालत में मामले की सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

अयोध्या साइबर क्राइम थाने से जुड़े चार पुलिसकर्मियों की राजस्थान में कथित रिश्वत लेते गिरफ्तारी ने पुलिस महकमे में जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खास बात यह है कि कथित रिश्वत की रकम लेने के लिए पुलिसकर्मियों के सैकड़ों किलोमीटर दूर सीकर पहुंचने का आरोप है। फिलहाल ACB की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका थी और साइबर क्राइम केस से जुड़े व्यक्ति का नाम हटाने के लिए कथित रिश्वत मांगने की वास्तविक कहानी क्या है।

Samvad 24 Office
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