
संवाद 24 लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी के भीरा वनरेंज क्षेत्र में एक विशालकाय मगरमच्छ के लगातार आबादी के आसपास दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बुधवार दोपहर ग्राम पंचायत मंझोरा के मजरा कचनारा में कचनारा-दौलतापुर मार्ग पर मगरमच्छ सड़क पर निकल आया। राहगीरों ने इसका वीडियो मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग से मगरमच्छ को तत्काल पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की मांग की है।
कई दिनों से गांव के आसपास मंडरा रहा है मगरमच्छ
ग्रामीणों के अनुसार, यह मगरमच्छ पिछले कई दिनों से कचनारा और दौलतापुर के बीच स्थित तालाबों, नहरों, नदी किनारों और आबादी से सटे क्षेत्रों में लगातार देखा जा रहा है। मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने के कारण मगरमच्छ अक्सर अपने प्राकृतिक जलाशयों से निकलकर नए जल स्रोतों और आसपास के गांवों की ओर पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि क्षेत्र के लोगों में लगातार भय बना हुआ है। इस तरह की घटनाएं मानसून के मौसम में उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में समय-समय पर सामने आती रही हैं।
कई पशुओं का शिकार करने का दावा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मगरमच्छ अब तक कई कुत्तों और बेसहारा पशुओं का शिकार कर चुका है। ग्रामीण रफीक अहमद ने बताया कि उनके कई पालतू कुत्ते भी इस मगरमच्छ का शिकार बन चुके हैं। इसके बाद से लोग अपने पशुओं को तालाबों और नहरों के किनारे चराने से बच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। स्कूल जाने वाले बच्चे और खेतों में काम करने वाले किसान भी अब सुनसान रास्तों और जलाशयों के आसपास जाने से बच रहे हैं।
सड़क पर आने से बढ़ी चिंता
ग्रामीण मनोज, दृगपाल और जवाहर ने बताया कि पहले मगरमच्छ केवल तालाबों और नहरों के आसपास दिखाई देता था, लेकिन अब वह दिन में भी सड़क पर निकल आता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इसका रेस्क्यू नहीं किया गया तो किसी राहगीर या ग्रामीण के साथ गंभीर हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से निगरानी बढ़ाने तथा मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की मांग की है।
वन विभाग ने कई बार किया प्रयास
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मगरमच्छ को पकड़ने के लिए कई बार रेस्क्यू अभियान चलाया गया है, लेकिन हर बार वह गहरे पानी और कीचड़ का फायदा उठाकर निकल जाता है। टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए है और उपयुक्त अवसर मिलने पर उसे सुरक्षित रेस्क्यू करने का प्रयास किया जाएगा। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मगरमच्छ को पकड़ने का अभियान बेहद सावधानी से चलाया जाता है ताकि न तो वन्यजीव को नुकसान पहुंचे और न ही स्थानीय लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो।
मानसून में बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में नदियों, नहरों और तालाबों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ अपने मूल आवास से निकलकर नए क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। तराई क्षेत्र और शारदा नदी के आसपास स्थित इलाकों में हर वर्ष इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। हाल के वर्षों में लखीमपुर खीरी के भीरा, पलिया, धौरहरा और सम्पूर्णानगर क्षेत्रों में भी आबादी के बीच मगरमच्छ पहुंचने की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें वन विभाग ने सफल रेस्क्यू अभियान चलाकर उन्हें सुरक्षित नदी में छोड़ा था।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि मगरमच्छ दिखाई देने पर उसके पास जाने या उसे भगाने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। साथ ही बच्चों को अकेले तालाब, नहर और नदी किनारे न जाने दें तथा पशुओं को भी जलाशयों के पास खुला न छोड़ें।
ग्रामीणों को रेस्क्यू का इंतजार
फिलहाल कचनारा और आसपास के गांवों में मगरमच्छ की मौजूदगी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। वायरल वीडियो के बाद वन विभाग की टीम एक बार फिर सक्रिय हो गई है और मगरमच्छ की तलाश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़कर उसके प्राकृतिक आवास में नहीं छोड़ा जाता, तब तक क्षेत्र में भय का माहौल बना रहेगा।






