
संवाद 24 | गोरखपुर गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य आयोजन होगा। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस अवसर पर गुरु और शिष्य दोनों की भूमिका निभाएंगे। नाथ संप्रदाय की परंपरा के अनुसार वह पहले अपने गुरुजनों एवं गुरु गोरखनाथ का विधि-विधान से पूजन करेंगे और बाद में श्रद्धालुओं, संतों तथा शिष्यों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे।
प्रातःकाल से शुरू होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान
मंदिर प्रशासन के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर विशेष पूजन का क्रम सुबह से प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले महायोगी गुरु गोरखनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद परंपरा के अनुसार श्रीनाथ जी को रोट अर्पित किया जाएगा तथा मंदिर परिसर में स्थित विभिन्न देव विग्रहों, नाथ योगियों और ब्रह्मलीन महंतों की समाधियों पर श्रद्धांजलि अर्पित कर विशेष पूजन किया जाएगा। सामूहिक आरती के साथ प्रातःकालीन अनुष्ठान संपन्न होंगे।
श्रीराम कथा की पूर्णाहुति और संतों का आशीर्वचन
गुरु पूजन के उपरांत महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में विगत सात दिनों से चल रही श्रीराम कथा का पूर्णाहुति कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देंगे तथा भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। दोपहर में मंदिर परिसर में सहभोज का भी आयोजन रहेगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
नेपाल सहित कई राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु
गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व होने के कारण उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अलावा नेपाल और देश के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में साधु-संत एवं श्रद्धालु गोरखपुर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर मंदिर प्रशासन एवं जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा दर्शन, पूजन और सहभोज के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
नाथ परंपरा में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व
नाथ संप्रदाय में गुरु पूर्णिमा को गुरु-शिष्य परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार गुरु को ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का सर्वोच्च स्रोत माना जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रत्येक वर्ष इस अवसर पर अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ सहित पीठ के पूर्ववर्ती महंतों को श्रद्धांजलि अर्पित कर इस परंपरा का निर्वहन करते हैं।






