
संवाद 24 कानपुर। कानपुर में पांडु नदी के उफान पर आने से बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के 12 से अधिक इलाकों में करीब एक हजार मकान बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ से 50 हजार से अधिक लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई परिवारों के घरों में पानी भर जाने के बाद उन्हें अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात ऐसे हैं कि बड़ी संख्या में लोग घरों के भीतर रहने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ परिवारों ने मकानों की छतों पर शरण ली है, जबकि कई लोग सड़क किनारे पन्नी और तिरपाल लगाकर किसी तरह समय गुजार रहे हैं। पानी बढ़ने के कारण रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
लगातार बढ़ते पानी से बढ़ी परेशानी
पांडु नदी के जलस्तर में वृद्धि के साथ निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। वरुण विहार (कच्ची बस्ती), मायापुरम, रविदासपुरम और कंपोजिट विद्यालय क्षेत्र। गुजैनी कच्ची बस्ती, नहर पटरी क्षेत्र और जरौली के निचले इलाके। सुंदर नगर (10-12 गलियों में घरों के भीतर पानी)। मेहरबान सिंह का पुरवा व गोपालपुरवा: नदी किनारे बसी दोनों बस्तियां। बौद्ध विहार, बनपुरवा, बिहारीपुरवा और कपिली। पिपौरी गांव (सैकड़ों घर 6 से 8 फीट गहरे पानी में घिरे)। शिवली क्षेत्र के मझिहार, मोगरा, रामगढ़, सिंहपुर शिवली, बकसपुरवा सहित एक बड़े क्षेत्र में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
कई स्थानों पर मकानों के आसपास जलभराव होने से लोगों के आवागमन में भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सामान की आवश्यकता पड़ रही है। बाढ़ के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों में संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है।
NDRF और SDRF की टीमें राहत कार्य में जुटीं
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। NDRF और SDRF की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। टीमें जलभराव वाले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ जरूरत के अनुसार राहत कार्य कर रही हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है और नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव की लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए भी व्यवस्था की जा रही है।
घरों से ज्यादा जरूरी अब सुरक्षित रहना
बाढ़ ने प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित रहने की खड़ी कर दी है। जिन घरों में पानी भर गया है, वहां रहने वाले लोग सामान और घर की चिंता के साथ परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई लोगों के लिए सड़क किनारे तिरपाल के नीचे रात गुजारना मजबूरी बन गया है। वहीं, कुछ परिवार मकानों की छतों पर रहकर पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ प्रभावित आबादी तक राहत सामग्री पहुंचाने और जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है। पांडु नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में हालात पर लगातार नजर रखना जरूरी है।






