
अयोध्या के चर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की कार्रवाई अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। मामले के आरोपित पूर्व बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन खाते को सीज किए जाने पर विशेष न्यायालय ने पुलिस से स्पष्ट जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि खाता किस कानूनी प्रावधान के तहत सीज किया गया और क्या इसके लिए न्यायालय से पूर्व अनुमति ली गई थी।
आरोपित ने कोर्ट से लगाई राहत की गुहार
जेल में निरुद्ध सुभाष श्रीवास्तव ने विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत में याचिका दाखिल कर अपने पेंशन खाते से निकासी पर लगी रोक हटाने का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से विस्तृत आख्या मांगी, जिसमें विवेचक ने साक्ष्य संकलन के उद्देश्य से खाता सीज करने की बात कही। हालांकि, पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि यह कार्रवाई किस वैधानिक प्रावधान के तहत की गई।
बचाव पक्ष ने उठाए कानूनी सवाल
आरोपित के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि पेंशन खाते को सामान्य परिस्थितियों में सीज नहीं किया जा सकता। यदि ऐसी कोई आवश्यकता हो, तो खाताधारक को विधिक प्रक्रिया के तहत नोटिस दिया जाना चाहिए। अदालत ने इन आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
27 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
विशेष न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई निर्धारित की है। इस दिन पुलिस को अपने आदेशों, कानूनी आधार और खाता सीज करने की प्रक्रिया से संबंधित सभी बिंदुओं पर जवाब प्रस्तुत करना होगा। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि जांच के साथ-साथ पुलिस की प्रक्रिया की वैधानिकता भी न्यायिक परीक्षण के दायरे में रहेगी।
जांच पहले से ही उच्च स्तर पर निगरानी में
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच पहले से ही व्यापक स्तर पर चल रही है। हाल के दिनों में इस मामले की जांच और उसकी पारदर्शिता को लेकर उच्चतम न्यायालय ने भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं तथा निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है।






