3200 करोड़ के अवैध लेनदेन का जाल: महफूज गिरोह की परतें खुलीं, बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल
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कानपुर में सामने आए करीब 3200 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन मामले ने पुलिस और जांच एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। आरोपी महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है। पुलिस को जांच में 100 से अधिक ऐसे म्यूल खाते मिले हैं, जिनके माध्यम से करोड़ों रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कई खाते रिक्शा चालकों, सब्जी विक्रेताओं, ठेला संचालकों और दैनिक मजदूरों के नाम पर खोले गए थे, जबकि उनमें करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ।
बैंक अधिकारियों की चुप्पी ने बढ़ाई जांच एजेंसियों की चिंता
जांच एजेंसियों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि इतने बड़े पैमाने पर ट्रांजेक्शन होने के बावजूद संबंधित बैंकों द्वारा किसी प्रकार की सस्पीशियस ट्रांजेक्शन रिपोर्ट (STR) जारी नहीं की गई। बैंकिंग नियमों के अनुसार यदि किसी खाते में असामान्य अथवा संदिग्ध वित्तीय गतिविधि दिखाई देती है तो उसकी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से तैयार की जाती है। ऐसे में पुलिस अब तीन प्रमुख बैंकों को नोटिस जारी करने की तैयारी में है और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से जवाब मांगा जा सकता है।
करोड़ों का दैनिक लेनदेन, कई खातों में संदिग्ध गतिविधियां
पुलिस सूत्रों के अनुसार कुछ खातों में प्रतिदिन चार से पांच करोड़ रुपये तक का ट्रांजेक्शन दर्ज हुआ है। जांच में आईडीबीआई बैंक की रेलबाजार शाखा के खातों में लगभग 500 करोड़ रुपये और एचडीएफसी बैंक की लाल बंगला शाखा से जुड़े खातों में करीब 200 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी मिली है। इसके अलावा सिटी यूनियन बैंक और एक्सिस बैंक के खातों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी वित्तीय गतिविधियों की अनदेखी बिना अंदरूनी सहयोग के संभव नहीं लगती।
फर्जी फर्मों के जरिए बनाया गया लेनदेन का नेटवर्क
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी गिरोह ने फर्जी फर्मों और दस्तावेजों के सहारे बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों का उपयोग बड़ी रकम को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क हवाला, टैक्स चोरी या अन्य अवैध कारोबारी गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है। इसी कारण अब आयकर विभाग और जीएसटी विभाग की भी मदद ली जा रही है, ताकि पैसों के वास्तविक स्रोत और उपयोग का पता लगाया जा सके।
लखनऊ, उन्नाव और कोलकाता से जुड़े मिले ट्रांजेक्शन
पुलिस की तकनीकी और सर्विलांस टीमों को जांच में लखनऊ, उन्नाव और कोलकाता से बड़े पैमाने पर ट्रांजेक्शन होने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा जांच एजेंसियां नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों पर भी नजर बनाए हुए हैं। पुलिस सूत्रों का दावा है कि महफूज गिरोह से जुड़े लोग अक्सर गोरखपुर, बहराइच और नेपाल सीमा से सटे इलाकों की यात्रा करते थे, जिससे जांच का फोकस अब अंतरराज्यीय और सीमावर्ती नेटवर्क की ओर भी बढ़ गया है।
पुलिस की कई टीमें सक्रिय, नए खुलासों की संभावना
कमिश्नरेट पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमें गठित की हैं। बैंक खातों की डिटेल, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, यात्रा संबंधी जानकारी और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। यदि बैंक कर्मचारियों की भूमिका प्रमाणित होती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई संभव मानी जा रही है।






