बस्ती में पुलिस पर थप्पड़ मारने का आरोप, अधेड़ की बिगड़ी हालत
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बस्ती के छावनी थाना क्षेत्र के नियामतपुर गांव में पैतृक जमीन को लेकर चल रहे विवाद ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब शिकायत पर पहुंची डायल 112 पुलिस टीम पर एक अधेड़ व्यक्ति को थप्पड़ मारने का आरोप लगा। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई।
थप्पड़ लगते ही बेहोश हुआ अधेड़, अस्पताल में भर्ती
परिजनों के अनुसार, 55 वर्षीय घनश्याम मौर्य अपने पुराने मकान को गिराकर नया निर्माण करा रहे थे। इसी बीच दूसरे पक्ष की शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य रुकवाया। आरोप है कि पुलिस टीम के उपनिरीक्षक ने किसी बात पर घनश्याम मौर्य को थप्पड़ मार दिया, जिससे वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।घटना के बाद परिजन उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले गए, जहां उनका इलाज किया गया। बताया जा रहा है कि पीड़ित पहले से हृदय रोगी हैं, हालांकि फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
ग्रामीणों का हंगामा, पुलिस टीम मौके से हटी
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और पुलिस के खिलाफ नाराजगी जताई। स्थिति बिगड़ती देख पीआरवी टीम वहां से हट गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस का व्यवहार अनावश्यक रूप से आक्रामक था, जिससे हालात बिगड़े।
तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज, पुलिस ने आरोप नकारे
मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से थाने में तहरीर दी गई, जिसके आधार पर राधेश्याम मौर्य, श्याम मौर्य और कुसुम के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है।वहीं, छावनी थाना प्रभारी ने पुलिस पर लगे थप्पड़ मारने के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के बीच आपसी मारपीट हुई थी, और पुलिस केवल विवाद को नियंत्रित करने पहुंची थी।
जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई
यह मामला पुलिस की कार्यशैली और जमीन विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में हस्तक्षेप को लेकर कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल, जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अधेड़ की हालत बिगड़ने के पीछे असली वजह क्या थी—पुलिस की कार्रवाई या आपसी विवाद।बस्ती की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन विवाद किस तरह गंभीर रूप ले सकते हैं। साथ ही, पुलिस की भूमिका पर भी पारदर्शिता और संवेदनशीलता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।






