गाजियाबाद में लिफ्ट सुरक्षा पर बड़ा सवाल: आधी से ज्यादा लिफ्टें बिना पंजीकरण

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गाजियाबाद में बहुमंजिला इमारतों की बढ़ती संख्या के बीच लिफ्ट सुरक्षा को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। लिफ्ट अधिनियम लागू होने के बावजूद जिले में संचालित अनुमानित 5000 से अधिक लिफ्टों में से केवल 2518 का ही पंजीकरण हो सका है। यह आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में लिफ्टें अब भी नियमों के दायरे से बाहर चल रही हैं, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।

नियम लागू, लेकिन पालन अधूरा

सरकार द्वारा लागू लिफ्ट एंड एस्केलेटर अधिनियम-2024 का उद्देश्य बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित परिवहन सुविधा देना था। इसके तहत लिफ्ट का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और 31 जनवरी के बाद देरी से पंजीकरण कराने पर ₹10,000 का जुर्माना भी तय किया गया। बावजूद इसके, बिल्डर, सोसायटी प्रबंधन और संस्थान इस नियम को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

सोसायटी और संस्थानों में बढ़ता खतरा

आधुनिक सुविधाओं के लिए लोग ऊंची इमारतों में घर तो खरीद रहे हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी उनकी जिंदगी को जोखिम में डाल रही है। आए दिन लिफ्ट में फंसने और खराब होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे निवासियों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

जुर्माने के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

प्रशासन द्वारा कई संस्थानों पर कार्रवाई करते हुए जुर्माना भी लगाया गया है। कुछ कंपनियों और सोसायटियों की लिफ्टों का देर से पंजीकरण कराने पर प्रति लिफ्ट ₹10,000 वसूला गया। इसके बावजूद व्यापक स्तर पर सुधार देखने को नहीं मिला है, जो प्रशासनिक सख्ती की कमी को दर्शाता है।

लापरवाही के पीछे ये बड़ी वजहें

विशेषज्ञों के अनुसार लिफ्ट से जुड़े हादसों के पीछे कई कारण हैं—समय पर मेंटेनेंस न होनाघटिया गुणवत्ता की लिफ्टक्षमता से अधिक उपयोगसुरक्षा प्रशिक्षण और जानकारी का अभावनिगरानी व्यवस्था (गार्ड/सीसीटीवी) की कमी

क्या कहते हैं नियम?

लिफ्ट अधिनियम के तहत—पंजीकरण अनिवार्य हैनियमित तकनीकी निरीक्षण जरूरीसाल में दो बार मॉक ड्रिल अनिवार्यइंटरकॉम, अलार्म और ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस जरूरीसुरक्षा प्रमाणन के बिना संचालन अवैध

आगे क्या

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई और जनजागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो भविष्य में बड़े हादसों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन, बिल्डर और नागरिक—तीनों की जिम्मेदारी तय करना अब बेहद जरूरी हो गया है।गाजियाबाद में लिफ्ट सुरक्षा केवल नियमों तक सीमित रह गई है, जमीनी स्तर पर उसका पालन अभी भी अधूरा है। यह स्थिति सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा मामला है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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