गोरखपुर से उठेगा गोरक्षा का स्वर, 81 दिन में पूरे यूपी का सफर
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उत्तर प्रदेश में गोरक्षा और सनातन परंपरा को लेकर एक बड़े जन-अभियान की शुरुआत होने जा रही है। ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्व में 3 मई 2026 से ‘गविष्ठि (गो-रक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा’ का शुभारंभ गोरखपुर से होगा। यह 81 दिवसीय यात्रा पूरे प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरते हुए 24 जुलाई को लखनऊ में समाप्त होगी। इस यात्रा को धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता के व्यापक अभियान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
उद्देश्य: गोरक्षा से जनजागरण तक
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने की मांग को मजबूत करना है। इसके साथ ही समाज में गोरक्षा के प्रति सक्रिय भागीदारी बढ़ाने, सनातन मूल्यों को पुनर्स्थापित करने और ग्रामीण स्तर तक संगठन खड़ा करने पर जोर दिया जाएगा। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर सभाएं, संवाद कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे, जिससे यह आंदोलन जन-जन तक पहुंचे।
403 विधानसभाओं का व्यापक कवरेज
गोरखपुर से शुरू होकर यह यात्रा पूर्वांचल, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी। हर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों का लक्ष्य है कि यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक न रहकर हर क्षेत्र में ठोस प्रभाव छोड़े और स्थानीय समुदायों को गोरक्षा से जोड़ सके।
गो वीर’ मॉडल: हर गांव में सुरक्षा तंत्र
यात्रा के दौरान एक विशेष योजना के तहत प्रत्येक गांव और मोहल्ले में पांच-पांच ‘गो वीर’ नियुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। ये स्वयंसेवक गोवंश की सुरक्षा, जागरूकता और स्थानीय निगरानी का कार्य करेंगे। इसके साथ ही प्रत्येक विधानसभा में एक ‘गोधाम’ स्थापित करने की भी योजना है, जिससे संरक्षित और व्यवस्थित गोपालन को बढ़ावा मिल सके।
गोशालाओं और बूचड़खानों का आकलन
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रदेश में संचालित गोशालाओं और बूचड़खानों की स्थिति का मूल्यांकन भी है। यात्रा के दौरान इन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर सुधार की दिशा में सुझाव और दबाव दोनों बनाए जाएंगे, ताकि गोरक्षा केवल भावनात्मक मुद्दा न रहकर व्यावहारिक रूप से भी मजबूत हो।
भव्य समापन: लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन
यात्रा का समापन 24 जुलाई को लखनऊ स्थित कांशीराम सांस्कृतिक स्थल (स्मृति उपवन) में एक विशाल सभा के साथ होगा। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से लाखों गो-भक्तों के जुटने की संभावना है। यह समापन केवल यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक बड़े जनआंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है
निष्कर्ष: धार्मिक यात्रा से जनआंदोलन की ओर
‘गविष्ठि यात्रा’ को आयोजक एक ऐसे अभियान के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जो धार्मिक आस्था, सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक संरक्षण—तीनों को जोड़ता है। यदि यह यात्रा अपने उद्देश्यों के अनुरूप जनसमर्थन जुटाने में सफल होती है, तो यह उत्तर प्रदेश की सामाजिक-राजनीतिक दिशा में भी प्रभाव डाल सकती है।






