गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे उभरेगा नया तीर्थ पर्यटन केंद्र, शंकराटीला बनने की राह पर ‘दूसरा ब्रजघाट’
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क्षेत्रीय विकास से जुड़ी उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, शंकराटीला गांव आने वाले समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र बन सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित यह ऐतिहासिक गांव अब तेजी से “दूसरे ब्रजघाट” के रूप में पहचान बना रहा है। सरकार यहां लगभग 13 हेक्टेयर क्षेत्रफल में यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक रेस्ट हाउस विकसित कर रही है, जिसके लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ाव से बढ़ेगी पहुंच
प्रस्तावित रेस्ट हाउस को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जहां यात्रियों के लिए उतार-चढ़ाव (एंट्री-एग्जिट) की विशेष सुविधा प्रस्तावित है। इससे दिल्ली, मेरठ, लखनऊ और पश्चिमी यूपी के लाखों श्रद्धालु आसानी से शंकराटीला पहुंच सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के बाद यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
धार्मिक महत्व के कारण बढ़ रही श्रद्धालुओं की आस्था
गंगा तट पर बसे शंकराटीला गांव का धार्मिक इतिहास काफी प्राचीन माना जाता है। यहां स्थित प्राचीन हनुमान एवं शिव मंदिरों में वर्षों से साधु-संत तपस्या करते रहे हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र महाभारत कालीन घटनाओं और कौरव-पांडवों की शिक्षा से भी जुड़ा रहा है। यही कारण है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद यहां धार्मिक गतिविधियों और स्नान पर्वों में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
ब्रजघाट की तर्ज पर विकसित होगा नया धार्मिक कॉरिडोर
वर्तमान में ब्रजघाट दिल्ली-लखनऊ हाईवे के कारण “मिनी हरिद्वार” के रूप में विकसित हो चुका है, जहां हर माह लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। अब प्रशासनिक और विकास योजनाओं को देखते हुए शंकराटीला को भी उसी मॉडल पर विकसित किए जाने की चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि यहां गंगा तट का सौंदर्यीकरण भी किया जा चुका है तथा निजी होटल परियोजनाएं भी आकार लेने लगी हैं।
सर्विस रोड बनने से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को मिलेगा बड़ा लाभ
मेरठ के बिजौली क्षेत्र से शंकराटीला तक बनाई जा रही सर्विस रोड का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा बताया जा रहा है। कुछ स्थानों पर पुल निर्माण शेष है, लेकिन सड़क पूरी तरह शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को 15 से 20 मिनट में गंगा तट तक पहुंचने की सुविधा मिल सकेगी। इससे क्षेत्रीय आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
जमीनों के दामों में आया भारी उछाल
गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना और रेस्ट हाउस निर्माण की घोषणा के बाद शंकराटीला क्षेत्र की भूमि कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। जहां लगभग डेढ़ दशक पहले यहां जमीन 20 से 25 हजार रुपये प्रति बीघा के आसपास मिलती थी, वहीं अब कई स्थानों पर कीमतें 20 से 25 लाख रुपये प्रति बीघा तक पहुंच चुकी हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन और निवेश का बड़ा केंद्र बन सकता है।
प्रशासन ने भी दिए विकास के संकेत
स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार शंकराटीला में रेस्ट हाउस निर्माण की प्रक्रिया प्रस्तावित योजना के तहत आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में शासन से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उनके अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस क्षेत्र को धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से विकसित करने की दीर्घकालिक योजना पर कार्य कर रही है।






