UGC के नए प्रावधानों पर मायावती का बड़ा बयान, विरोध को बताया जातिवादी मानसिकता
Share your love

संवाद 24, लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों में समता समिति (इक्विटी कमेटी) के गठन से जुड़े नए प्रावधानों को लेकर देशभर में विरोध के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने यूजीसी के इस निर्णय को सही कदम बताया है और इसके विरोध को अनुचित करार दिया है।
मायावती ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के निराकरण के उद्देश्य से समता समिति का गठन आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका विरोध करने वाले लोग इसे अपने खिलाफ षड्यंत्र बताकर जातिवादी मानसिकता का परिचय दे रहे हैं, जो किसी भी रूप में उचित नहीं है।
बसपा सुप्रीमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियमों का मकसद शिक्षा संस्थानों में समता और समान अवसर सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे नियमों को केवल किसी एक वर्ग के खिलाफ बताना गलत है और इससे समाज में भ्रम फैलता है।
हालांकि मायावती ने यह भी कहा कि यदि इन प्रावधानों को लागू करने से पहले सभी पक्षों से व्यापक चर्चा की जाती और सभी को विश्वास में लिया जाता, तो सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थानों से भविष्य में इस पहलू पर ध्यान देने की अपील की।
इसके साथ ही मायावती ने दलितों और पिछड़े वर्गों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भड़काऊ बयानों के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी नेता इन मुद्दों की आड़ में घिनौनी राजनीति करते हैं, जिससे समाज में विभाजन पैदा होता है। ऐसे लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर देश के कई हिस्सों में सवर्ण समाज द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसे लेकर प्रदर्शन, मार्च और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिससे यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।






