
संवाद 24 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को दावा किया कि भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है। सरकार के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था का आकार अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर, यानी लगभग ₹374.5 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, जो देश की तेज आर्थिक प्रगति को दर्शाता है।
सरकार का कहना है कि यदि मौजूदा विकास दर बनी रही तो वर्ष 2030 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 7.3 ट्रिलियन डॉलर, यानी करीब ₹649.70 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। ऐसे में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। वर्तमान में अमेरिका पहले, चीन दूसरे और जर्मनी तीसरे स्थान पर है।
केंद्र सरकार के मुताबिक भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में देश की वास्तविक GDP वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जो छह तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। इससे पहले पहली तिमाही में वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 7.4 प्रतिशत रही थी।
सरकार ने बताया कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती बनी हुई है। इस तेज वृद्धि में घरेलू मांग, खासकर निजी खपत की बड़ी भूमिका रही है। शहरी क्षेत्रों में मजबूत खपत और निवेश गतिविधियों ने अर्थव्यवस्था को गति दी है।
वैश्विक एजेंसियों ने भी भारत की विकास संभावनाओं को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। विश्व बैंक ने वर्ष 2026 के लिए भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। मूडीज के अनुसार भारत 2026 में 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ G-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2025 के लिए 6.6 प्रतिशत और 2026 के लिए 6.2 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। वहीं OECD ने 2025 में 6.7 प्रतिशत और 2026 में 6.2 प्रतिशत विकास दर का अनुमान दिया है। एसएंडपी का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 6.7 प्रतिशत रह सकती है। एशियाई विकास बैंक ने 2025 के लिए अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत किया है, जबकि फिच ने मजबूत उपभोक्ता मांग के आधार पर 2026 के लिए 7.4 प्रतिशत GDP वृद्धि का अनुमान जताया है।
केंद्र सरकार ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक उच्च मध्यम-आय वाला देश बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए आर्थिक विकास के साथ-साथ संरचनात्मक सुधार और सामाजिक प्रगति को आधार बनाया जा रहा है। सरकार के अनुसार महंगाई नियंत्रित दायरे में है, बेरोजगारी में गिरावट का रुझान दिखाई दे रहा है और निर्यात प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्तीय स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। वाणिज्यिक क्षेत्र को कर्ज प्रवाह मजबूत है और कुल मांग स्थिर बनी हुई है, जिससे आने वाले वर्षों में भी आर्थिक रफ्तार कायम रहने की उम्मीद जताई जा रही है।






