परीक्षा धांधली पर आर-पार की जंग: जब सरकार से वार्ता हुई विफल, तो क्या अब अनशन से हिलेगी शासन की नींव?

संवाद 24 झारखंड। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों को लेकर झारखंड की राजधानी रांची में भड़का जनआक्रोश अब एक विकराल रूप धारण कर चुका है। राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय पांच सदस्यीय मंत्री स्तरीय समिति और आंदोलनकारी छात्र संगठनों के बीच आयोजित दूसरे दौर की मैराथन वार्ता भी पूरी तरह बेनतीजा साबित हुई है। इस वार्ता के विफल होने के बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, जिसके चलते आंदोलन अब और अधिक उग्र होने के आसार बन गए हैं।

बेनतीजा रही दो घंटे की हाई-प्रोफाइल बैठक
हेमंत सोरेन सरकार की पांच सदस्यीय विशेष कमेटी ने हालात को संभालने के लिए शनिवार को मैराथन बैठकों का दौर शुरू किया। इस समिति में राज्य सरकार के प्रमुख मंत्री शामिल थे। समिति ने सबसे पहले झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की। उल्लेखनीय है कि देवेंद्र नाथ महतो पिछले सात दिनों से अनवरत अनशन पर बैठे हैं और उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। इसके पश्चात, मंत्रियों के समूह ने राष्ट्रीय भारतीय छात्र संगठन (NSUI), ऑल कॉलेज स्टूडेंट्स (ACS) और सत्तारूढ़ दल की अपनी छात्र इकाई ‘झारखंड छात्र मोर्चा’ (JCM) के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बातचीत की। लगभग दो घंटे से अधिक समय तक चली इस उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों पक्षों के बीच गहरा गतिरोध देखने को मिला, जिसके अंत में कोई बीच का रास्ता या सर्वसम्मत समाधान नहीं निकल सका।

छात्रों का स्पष्ट संदेश: मांगें मानने तक जारी रहेगा सत्याग्रह
वार्ता समाप्त होने के बाद ‘JPSC/JSSC रिफॉर्म मंच’ के प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी। छात्र प्रतिनिधियों ने बताया कि यद्यपि मंत्रियों की समिति ने मौखिक रूप से आश्वासन देने की कोशिश की, लेकिन जब तक लिखित और आधिकारिक रूप से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे। छात्र संगठनों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करना है। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराने और भविष्य की परीक्षाओं के लिए सख्त कानून लागू करने की बात कही गई है। छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, रांची के ऐतिहासिक मैदानों में जारी उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन पूरी ताकत के साथ चलता रहेगा।

जयराम महतो का बड़ा एलान: छात्रों के समर्थन में निर्जला अनशन
आंदोलन के इस नाजुक मोड़ पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के विधायक जयराम महतो ने प्रवेश करते हुए लड़ाई को राजनीतिक और सामाजिक रूप से नया मोड़ दे दिया है। विधायक जयराम महतो ने अभ्यर्थियों के जायज मांगों का खुलकर समर्थन करते हुए 9 अगस्त को एक दिवसीय अनशन पर बैठने का बड़ा एलान कर दिया है। जयराम महतो के इस कदम से राज्य प्रशासन पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं के बीच जयराम महतो की लोकप्रियता को देखते हुए उनका अनशन पर बैठना सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है।

सरकार का रुख और आंतरिक दबाव
दूसरी ओर, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार में भी खलबली मची हुई है। वार्ता समिति के प्रमुख सदस्य और राज्य सरकार में मंत्री संजय प्रसाद यादव ने वार्ता के बाद कहा कि परीक्षार्थियों द्वारा उठाए गए मुद्दे और मांगें पूरी तरह जायज हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि समिति छात्रों की हर एक चिंता से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को व्यक्तिगत रूप से अवगत कराएगी ताकि जल्द से जल्द कोई राज्यव्यापी समाधान निकाला जा सके। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल की अपनी छात्र इकाई ‘झारखंड छात्र मोर्चा’ (JCM) भी अभ्यर्थियों के समर्थन में खड़ी नजर आ रही है। JCM ने भी सरकार को 5 सूत्री मांग पत्र सौंपा है, जिसमें 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग शामिल है। अपनी ही छात्र इकाई के विरोध में उतरने से सरकार पर नैतिक दबाव भी भारी पड़ता दिख रहा है।

अनिश्चितता के भंवर में लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य
झारखंड में पिछले कुछ समय से JPSC और JSSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं में बार-बार उठते धांधली के सवालों ने लाखों मेधावी युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। वर्षों की कठिन तपस्या और तैयारियों के बाद जब युवाओं को पेपर लीक जैसी खबरें मिलती हैं, तो उनका सब्र का बांध टूट जाता है। वर्तमान में रांची की सड़कों पर जारी यह आंदोलन केवल कुछ अभ्यर्थियों की लड़ाई नहीं, बल्कि पारदर्शी शासन व्यवस्था की मांग कर रहे पूरे प्रदेश के युवाओं की आवाज बन चुका है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए क्या बड़ा कदम उठाते हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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