
संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया का युद्ध क्षेत्र एक बार फिर बड़े धमाकों की गूंज से दहल उठा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय शांति और कूटनीतिक प्रयासों को धता बताते हुए रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ठिकानों पर भीषण हमला किया है। हूतियों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और देश की सत्ता के केंद्र ‘माशिक प्रेसिडेंशियल पैलेस’ को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इस अप्रत्याशित और आक्रामक सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य हलचल तेज हो गई है। यमन सरकार की सेना के प्रवक्ता माजिद अब्दुल्ला अल-नुजैली ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि शुक्रवार देर रात हूती लड़ाकों ने सुनियोजित तरीके से अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट और माशिक राष्ट्रपति महल परिसर को निशाना बनाया। स्थानीय सूत्रों और सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि उसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। इन दोनों महत्वपूर्ण ठिकानों पर हुए हमलों से हवाई सेवाओं के बुनियादी ढांचे और सरकारी परिसर के आसपास अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
सत्ता के केंद्र और उड़ानों को ठप करने की साजिश
अदन शहर लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का अंतरिम प्रशासनिक केंद्र रहा है। माशिक पैलेस देश की सरकार और प्रशासनिक तंत्र की शीर्ष धुरी माना जाता है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि हूतियों का यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि यमन की निर्वाचित सत्ता को पूरी तरह पंगु बनाने और दुनिया को अपनी आक्रामकता का संदेश देने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। अदन एयरपोर्ट पर हुए हमलों ने नागरिक विमानन सेवाओं के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। एयरपोर्ट के रनवे और एप्रन क्षेत्रों की सुरक्षा को देखते हुए आपातकालीन सुरक्षा तंत्र सक्रिय कर दिया गया है। इस रणनीतिक हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद क्षेत्रीय एयरलाइनों ने तुरंत अपने रूट और शेड्यूल की समीक्षा शुरू कर दी है, जिससे सैकड़ों यात्रियों की आवाजाही पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
वैश्विक उड़ानों पर सीधा असर, एअर इंडिया का बड़ा फैसला
हूती विद्रोहियों की इस हिमाकत और क्षेत्र में बढ़ते ड्रोन व मिसाइल हमलों के जोखिम को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। भारतीय विमानन कंपनी एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने सुरक्षा चिंताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सऊदी अरब के लिए अपनी नियमित उड़ानों को 14 नवंबर तक स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया है। विमानन नियामक और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, लाल सागर और यमन की हवाई सीमा के समीप उड़ने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा काफी बढ़ गया है। एअर इंडिया की रियाद, जेद्दा और दम्मम जैसी प्रमुख उड़ानों के स्थगित होने से खाड़ी देशों में रहने वाले हजारों भारतीय प्रवासियों और हज-उमरा यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर सीधा प्रभाव पड़ा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जब तक पूरे एयरस्पेस की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक उड़ानों को सामान्य करना जोखिम भरा हो सकता है।
सऊदी अरब की चौकसी और एयर डिफेंस की सक्रियता
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इन हमलों के बाद अपनी सीमा और प्रमुख प्रतिष्ठानों के इर्द-गिर्द निगरानी कई गुना बढ़ा दी है। सऊदी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम लगातार चौबीसों घंटे सक्रिय हैं और सीमा पार से आने वाले संदिग्ध ड्रोनों और मिसाइलों को समय रहते निष्प्रभावी किया जा रहा है। हालांकि हूतियों ने सऊदी सीमा के भीतर हमलों के कुछ दावों को नकारा है, लेकिन यमन की धरती पर सरकारी ठिकानों को लगातार निशाना बनाकर वे यह साबित करने में जुटे हैं कि उनका सैन्य नेटवर्क अभी भी बेहद आक्रामक है।
खाड़ी में गहराता मानवीय और कूटनीतिक संकट
यमन बीते एक दशक से गृहयुद्ध, भुखमरी और राजनीतिक अस्थिरता की आग में झुलस रहा है। अदन में हुए इस ताजा मिसाइल हमले ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य मध्यस्थ देशों द्वारा शांति बहाली के लिए किए जा रहे प्रयासों को करारा झटका दिया है। सरकारी सेना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हूती विद्रोहियों की इस कायराना हरकत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने और कड़ी सैन्य पाबंदियां लगाने की गुहार लगाई है। यदि अदन और लाल सागर के गलियारों में इसी प्रकार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे, तो यह टकराव केवल यमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के व्यापारिक जलमार्गों, तेल आपूर्ति और वैश्विक नागरिक उड्डयन को भीषण संकट में धकेल देगा।






