जम्मू रेलवे स्टेशन के पास धू-धू कर जला शिव मार्केट, 40 दुकानें और होटल खाक; करोड़ों का कारोबार बना राख

​संवाद 24 जम्मू।​ मंदिर नगरी जम्मू की शांत फिजा उस वक्त दहल उठी, जब जम्मू रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्रों में शुमार ‘शिव मार्केट’ अचानक धधकते हुए आग के विशाल शोले में तब्दील हो गया। जब पूरा शहर नींद के आगोश में था, तभी उठी एक चिंगारी ने पलक झपकते ही ऐसा भयानक रूप अख्तियार किया कि 35 से 40 दुकानें और पास ही स्थित एक होटल जलकर खाक हो गए। आसमान को छूती नारंगी लपटें और कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहे घने काले धुएं के गुबार ने पूरे रेलवे परिसर और आसपास के इलाके में हड़कंप मचा दिया। कुछ ही घंटों के भीतर करोड़ों रुपये की संपत्ति और दर्जनों परिवारों की जिंदगी भर की कमाई जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गई।

​​अचानक चीख-पुकार और धुएं का बवंडर​
​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना की शुरुआत बेहद अप्रत्याशित रही। बाजार के एक हिस्से से पहले हल्का धुआं उठता दिखा, लेकिन देखते ही देखते हवा के झोंकों के साथ आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। दुकानों में रखा ज्वलनशील सामान, लकड़ी के ढांचे और पैकेजिंग सामग्री इस आग के लिए ईंधन साबित हुए। एक दुकान से दूसरी दुकान तक लपटें इस कदर तेजी से फैलीं कि वहां मौजूद रात्रि प्रहरियों और स्थानीय दुकानदारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। ​आसपास के लोग जब तक बाल्टियों में पानी लेकर दौड़े, तब तक लपटें बाजार के ऊपरी हिस्से में मौजूद होटल की मंजिलों तक पहुंच चुकी थीं। होटल और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद लोग जान बचाने के लिए बदहवास होकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागे। रेलवे स्टेशन के पास होने के कारण यहां यात्रियों और वाहनों की भी आवाजाही थी, जिससे चारों ओर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया।

​​दमकल विभाग की घंटों मशक्कत: घंटों बाद थमी तबाही की लहर​
​घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा (Fire & Emergency Services) की गाड़ियां तत्काल मौके पर रवाना हुईं। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि जिला प्रशासन को एक के बाद एक कई दमकल वाहन और अतिरिक्त वाटर टेंडर्स मौके पर तैनात करने पड़े। ​सड़क संकरी होने और बाजार में घनी बसावट होने के चलते दमकल कर्मियों को भीतर तक पानी की बौछारें पहुंचाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जवानों ने चारों तरफ से मोर्चा संभालते हुए घंटों की कड़ी जद्दोजहद के बाद लपटों को आगे फैलने से रोका। यदि दमकल की टीमें समय रहते मुस्तैदी न दिखातीं, तो यह आग रेलवे स्टेशन परिसर और पास की अन्य विशाल व्यावसायिक इमारतों को भी अपनी चपेट में ले सकती थी।

​​करोड़ों का नुकसान, उजड़ गईं दर्जनों जिंदगियां​
​राहत की बात यह रही कि समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जिससे कोई जनहानि या हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि, आर्थिक दृष्टि से व्यापारियों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ​पीड़ित व्यापारियों का कहना है कि आगामी त्योहारों और पर्यटकों के सीजन को देखते हुए दुकानों में भारी मात्रा में नया माल, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, खान-पान की सामग्री और कीमती सामान स्टॉक किया गया था। चंद घंटों की आग ने सब कुछ जलाकर स्वाहा कर दिया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस अग्निकांड में व्यापारियों और होटल प्रबंधन को कई करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। अपनी आंखों के सामने दुकानों को जलता देख कई व्यापारी बेसुध हो गए; कई परिवारों की रोजी-रोटी का इकलौता जरिया एक झटके में खत्म हो गया।

​​शॉर्ट सर्किट या कोई गहरी चूक? जांच में जुटा प्रशासन​
​अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इस भीषण आग की शुरुआत कहां से और कैसे हुई? क्या यह किसी बिजली के पुराने तार में शॉर्ट सर्किट का नतीजा था, या फिर गैस सिलेंडर रिसाव अथवा कोई अन्य मानवीय लापरवाही इसके पीछे जिम्मेदार है? ​स्थानीय प्रशासन और फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल का मुआयना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आग के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए गहन तकनीकी जांच की जा रही है। वहीं, स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित दुकानदारों को तुरंत उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *