क्या आपका रिकॉर्ड भी रोक सकता है सरकारी कुर्सी का रास्ता? यूपी में भर्ती और चरित्र सत्यापन के बदले कड़े नियम

संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए अब केवल लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करना और मेरिट लिस्ट में जगह बनाना ही अंतिम पड़ाव नहीं होगा। राज्य सरकार ने सेवा चयन और नियुक्ति प्रक्रिया में शुचिता, पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन (Character Verification) से जुड़ी नियमावली में युगांतकारी बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब यदि किसी अभ्यर्थी का नाम हिंसा, दंगों, पेपर लीक या संगीन आपराधिक मामलों में दर्ज पाया गया, तो उसका सरकारी मुलाजिम बनने का सपना हमेशा के लिए टूट सकता है। शासन द्वारा जारी इस एकीकृत नीति ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि लोक सेवा में केवल वही प्रवेश पा सकेंगे जिनका अतीत बेदाग और आचरण अनुकरणीय होगा।

​सभी विभागों व स्वायत्त संस्थाओं पर एक समान नीति
​प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा जारी नए शासनादेश के अनुसार, यह व्यवस्था केवल मुख्य सरकारी विभागों तक ही सीमित नहीं रहेगी। उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन आने वाले सभी निगमों, परिषदों, शैक्षणिक व स्वायत्त संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों, त्रिस्तरीय पंचायतों और स्थानीय निकायों में होने वाली प्रत्येक सीधी भर्ती पर यह एकीकृत प्रणाली अनिवार्य रूप से लागू होगी। यही नहीं, पूर्व से विचाराधीन अथवा लंबित प्रकरणों का निस्तारण भी इसी नई व्यवस्था के मानकों पर परखा जाएगा।

​प्रोविजनल नियुक्ति पत्र की राहत, लेकिन जांच से समझौता नहीं
​प्रक्रियागत देरी से चयनित युवाओं को राहत देने के लिए सरकार ने एक व्यावहारिक कदम भी उठाया है। अब चयनित अभ्यर्थियों को चरित्र और अतीत के ब्योरे का अंतिम सत्यापन पूरा होने से पूर्व भी प्रोविजनल (अस्थायी) नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा, ताकि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो। हालांकि, सुरक्षा, अभिसूचना एवं अतिसंवेदनशील संवर्गों से जुड़े पदों पर बिना पूर्ण व गहन जांच के कोई भी तैनाती नहीं दी जाएगी।

​सत्यापन की त्रिस्तरीय और पारदर्शी प्रणाली
​चरित्र सत्यापन को किसी भी प्रकार के अनावश्यक उत्पीड़न या प्रशासनिक हीलाहवाली से मुक्त रखने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया तय की गई है:
1- ​दस्तावेजों का आदान-प्रदान: नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी के विवरण को पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना), अभ्यर्थी के गृह जनपद के जिलाधिकारी और उन सभी जिलों के डीएम को भेजेंगे, जहां अभ्यर्थी विगत पांच वर्षों के भीतर एक वर्ष से अधिक समय तक रहा हो।
2- ​अभिलेखीय सत्यापन: सामान्य मामलों में स्थानीय पुलिस और एलआईयू (स्थानीय अभिसूचना इकाई) अपने आधिकारिक रजिस्टरों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर ही जांच पूरी करेंगी। अभ्यर्थी को थाने में व्यक्तिगत रूप से बुलाने, पूछताछ करने या अतिरिक्त कागजात मांगने की बाध्यता समाप्त की गई है।
3- ​दूसरे राज्यों से समन्वय: यदि अभ्यर्थी किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में रहा है, तो वहां के पुलिस प्रमुख से परामर्श लेकर ही रिपोर्ट तैयार होगी।u

​किन अपराधों में आरोप तय होते ही छिन जाएगा मौका?
​नई नीति में उन गंभीर अपराधों की विस्तृत सूची तय की गई है, जिनमें आरोप तय (चार्ज फ्रेम) होने अथवा अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने पर अभ्यर्थी को स्वतः ही अयोग्य मान लिया जाएगा:
1- ​संगीन व सामाजिक अपराध: हत्या, बलवा (दंगा), देशद्रोह, फिरौती हेतु अपहरण, दुष्कर्म, पॉक्सो (POCSO) एक्ट और दहेज हत्या जैसे जघन्य कृत्य।
2- ​परीक्षा माफिया व नकल गिरोह: प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक करने, नकल कराने वाले साल्वर गैंग से जुड़ने, फर्जी डिग्री/प्रमाणपत्र बनवाने या किसी दूसरे की जगह छद्म परीक्षार्थी बनने वाले तत्व।
3- ​साइबर व वित्तीय ठगी: डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई फ्रॉड, संगठित ऑनलाइन धोखाधड़ी और धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के दायरे में आने वाले मामले।
4- ​संगठित अपराध व भ्रष्टाचार: गैंगस्टर एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज अभियोग।

​जानकारी छिपाना पड़ेगा भारी: स्वघोषणा पत्र में बरतें सावधानी
​अभ्यर्थियों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान ही एक विस्तृत स्वघोषणा पत्र देना होगा। इसमें उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि क्या वे कभी किसी मामले में गिरफ्तार हुए, उनके विरुद्ध कोई अभियोजन लंबित रहा अथवा किसी न्यायालय द्वारा उन्हें दंडित किया गया। इसके अतिरिक्त, किसी पूर्व सरकारी सेवा से बर्खास्तगी या किसी भर्ती बोर्ड द्वारा डिबार (प्रतिबंधित) किए जाने का विवरण भी साझा करना अनिवार्य होगा। ​यदि कोई अभ्यर्थी जानबूझकर आपराधिक अतीत को छिपाता है, तो उसकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए जिलाधिकारी अथवा नियुक्ति प्राधिकारी प्रतिकूल रिपोर्ट की स्थिति में अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का यथोचित अवसर अवश्य प्रदान करेंगे। साथ ही, यदि आवेदन पत्र में किसी कारणवश विवरण छूट गया हो, परंतु चिकित्सा परीक्षण या स्वघोषणा प्रपत्र भरते समय अभ्यर्थी ने स्वतः लिखित सूचना दर्ज करा दी हो, तो मात्र इस तकनीकी आधार पर उम्मीदवारी निरस्त नहीं की जाएगी।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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