
संवाद 24 जम्मू-कश्मीर। घाटी में एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। आतंकवादियों द्वारा अपनाए जा रहे नए डिजिटल हथकंडों और हालिया हिंसक घटनाओं के बीच शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए घाटी में पदस्थ विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को अस्थाई रूप से अपने-अपने घरों से कार्य (Work From Home) करने के निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय सुरक्षा समीक्षा के बाद एहतियातन लिया गया है ताकि किसी भी संभावित अनहोनी को टाला जा सके।
डिजिटल हिटलिस्ट और ऑनलाइन धमकियों का बढ़ता जाल
घाटी में तैनात सुरक्षा एजेंसियों को हाल के दिनों में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे संदेश मिले हैं, जिनमें सरकारी विभागों में कार्यरत कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। सूत्रों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से जुड़े कुछ आतंकी समूहों ने इन कर्मियों के नामों का उल्लेख करते हुए धमकियां जारी की थीं। इस तरह की सीधी चेतावनियां सामने आने के बाद सुरक्षा तंत्र तुरंत हरकत में आया और कर्मचारियों की जिंदगी को जोखिम में न डालते हुए उन्हें दफ्तर न आने की सलाह दी गई।
हालिया हिंसा और दो बड़े हमलों के बाद बढ़ा तनाव
दक्षिण कश्मीर के इलाकों में पिछले कुछ समय में घटीं दो प्रमुख हिंसक वारदातों के कारण क्षेत्र में पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है:
1- अनंतनाग में पुलिसकर्मी पर हमला: जून महीने के दौरान अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी में लगे एक पुलिस जवान पर आतंकियों ने अचानक हमला कर दिया था।
2- कुलगाम में निर्दोष मजदूरों पर गोलीबारी: जुलाई के अंत में कुलगाम जिले के केलम स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे दो प्रवासी श्रमिकों पर अज्ञात हमलावरों ने गोलियां चला दी थीं। इस घटना में दोनों ही बाहरी मजदूरों की जान चली गई थी।
इन घटनाओं के बाद गैर-स्थानीय कर्मियों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के मन में भय का माहौल बनना स्वाभाविक था, जिसे देखते हुए प्रशासन ने बिना देर किए सुरक्षा रणनीति को नया रूप दिया।
आवास क्षेत्रों और कॉलोनियों की सुरक्षा पर कड़ा पहरा
केवल कार्यालय न आने की छूट देना ही काफी नहीं माना गया, बल्कि कर्मचारियों के घरों और रिहायशी कॉलोनियों के आसपास की सुरक्षा को भी कई गुना बढ़ा दिया गया है। पारगमन शिविरों (Transit Camps) और जिन इलाकों में कश्मीरी हिंदू परिवार रहते हैं, वहां अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। आने-जाने वाले रास्तों पर नाकेबंदी बढ़ाकर हर संदिग्ध व्यक्ति की जांच की जा रही है और सीसीटीवी कैमरों की मदद से 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासन की भावी रणनीति और स्थिति की समीक्षा
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सुरक्षा स्थिति की पूरी तरह से समीक्षा नहीं कर ली जाती और धमकियां देने वाले असामाजिक तत्वों व नेटवर्क को पूरी तरह से निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता, तब तक यह अस्थायी व्यवस्था जारी रहेगी। खुफिया एजेंसियां धमकियों के स्रोत की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि दोषियों को पकड़कर घाटी में शांति और सुरक्षा का माहौल फिर से बहाल किया जा सके।






