
संवाद 24 झारखंड। प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई कथित धांधली और अनियमितताओं के विरोध में झारखंड के युवाओं का आक्रोश अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। लंबे समय से इंसाफ और पारदर्शिता की आस लगाए बैठे हजारों अभ्यर्थियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए राजधानी में डेरा डाल दिया है। इस पूरे आंदोलन का सबसे अहम मोड़ आज उस वक्त देखने को मिल सकता है, जब आक्रोशित छात्र झारखंड विधानसभा के महा-घेराव के लिए कूच करेंगे। छात्रों के इस अप्रत्याशित रुख और संभावित विशाल हुजूम को देखते हुए रांची जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए हैं। पूरे प्रशासनिक अमले को हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है और चप्पे-चप्पे पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।
सीआईडी जांच नामंजूर, सिर्फ सीबीआई पर टिका भरोसा
आंदोलनरत युवाओं और छात्र नेताओं का साफ कहना है कि राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं में निष्पक्षता नाम की चीज खत्म हो चुकी है। एक प्रेस वार्ता के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने सरकार के उस दावे की हवा निकाल दी जिसमें 98 प्रतिशत मांगें मान लिए जाने की बात कही जा रही थी। छात्रों ने आंकड़े सामने रखते हुए उजागर किया कि 13 संदिग्ध भर्ती विवादों में से सरकार ने अब तक केवल 3 परीक्षाओं को ही रद किया है। इसके साथ ही, अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित सीआईडी (CID) जांच के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका आरोप है कि स्थानीय जांच एजेंसियां अक्सर मामलों को दबाने और लीपापोती करने के लिए जानी जाती हैं। आंदोलनकारी अपनी इस एक सूत्रीय मांग पर पूरी तरह से अड़े हुए हैं कि पूरे परीक्षा घोटाले की जांच केवल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से ही कराई जाए।
छावनी में तब्दील हुई राजधानी, बीएनएस की धारा 163 लागू
छात्रों के उग्र तेवरों और संभावित भीड़ को देखते हुए नए विधानसभा परिसर और उसके आसपास के लगभग 750 मीटर के दायरे में कड़े प्रतिबंध आयद कर दिए गए हैं। रांची जिला प्रशासन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) प्रभाव में ला दी गई है। इसके लागू होते ही संबंधित इलाकों में पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ जुटने, जुलूस निकालने, किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन या नारेबाजी करने पर सख्त पाबंदी रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और सुरक्षा घेरे को अभेद्य रखने के लिए पुख्ता रणनीति बनाई गई है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासन किसी भी शांतिपूर्ण नागरिक या छात्र को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता, बशर्ते नियमों का उल्लंघन न किया जाए।
राजनीतिक गलियारों में भी गरमाई सियासत
छात्रों के इस अभूतपूर्व आंदोलन ने राज्य की राजनीति में भी भारी उथल-पुथल मचा दी है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष और स्वास्थ्य महकमा आंदोलनरत अभ्यर्थियों को अनशन खत्म करने का आग्रह कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। राजभवन से लेकर राजनीतिक दलों तक, हर स्तर पर इस आंदोलन की अनुगूंज सुनाई दे रही है। इधर, छात्र नेताओं ने अपने सभी साथियों से अनुशासित रहते हुए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन में भाग लेने का आह्वान किया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि धारा 163 की बंदिशों के बीच क्या यह छात्र आंदोलन सरकार को अपनी मांगें मानने पर मजबूर कर पाता है या फिर प्रशासन बल प्रयोग के दम पर इसे दबाने में सफल रहता है।






