
संवाद 24 जम्मू-कश्मीर। सीमावर्ती इलाकों में एक बार फिर शांति भंग करने की बड़ी साजिश रची गई है। पिछले साल सेना द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली बार नियंत्रण रेखा (LoC) पर इस तरह की भारी और चौंकाने वाली गोलीबारी देखने को मिली है। पाकिस्तानी सेना ने अपनी पुरानी आदतों को दोहराते हुए शुक्रवार रात जिला राजौरी के तरकुंडी सेक्टर में भारी गोलाबारी और छोटे हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस नापाक हरकत का भारतीय सेना के जांबाजों ने भी अत्यंत आक्रामक और मुंहतोड़ जवाब दिया है।
रात के अंधेरे में अचानक शुरू हुई भारी गोलीबारी
सैन्य सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार रात करीब 11 बजे जब पूरा इलाका शांत था, तभी अचानक नियंत्रण रेखा के पार से पाकिस्तानी चौकियों ने तरकुंडी सेक्टर को निशाना बनाना शुरू कर दिया। शुरुआत में भारतीय सेना ने इसे केवल सीमा पार से होने वाली एक सामान्य उकसावे की कार्रवाई माना और अत्यधिक संयम का परिचय दिया। भारतीय जवानों ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत जवाबी फायर नहीं किया, लेकिन जैसे ही पाकिस्तान की तरफ से स्वचालित हथियारों और मोर्टार शेलिंग की तीव्रता बढ़ने लगी, भारतीय सेना ने भी मोर्चा संभाल लिया। इसके बाद भारतीय फॉरवर्ड चौकियों से ऐसी जवाबी कार्रवाई की गई कि पाकिस्तानी सेना के हौसले पस्त हो गए। देर रात तक नियंत्रण रेखा के दोनों ओर से रुक-रुक कर भारी गोलीबारी का सिलसिला जारी रहा। धमाकों और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा तरकुंडी सेक्टर गूंज उठा। इस अचानक भड़की गोलाबारी के बाद सीमा पर तनाव अत्यधिक बढ़ गया है और सेना के उच्च अधिकारी पल-पल की स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।
अपनी नाकामी छिपाने के लिए चली यह चाल?
रक्षा विशेषज्ञों और जमीनी इनपुट के अनुसार, पाकिस्तान की इस अचानक की गई हिमाकत के पीछे एक बहुत बड़ी वजह मानी जा रही है। दरअसल, इस समय गुलाम जम्मू-कश्मीर (PoJK) के अंदरूनी हालात बेहद खराब हैं। वहां की आम जनता स्थानीय प्रशासन और पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ सड़कों पर है। नागरिक अधिकारों के हनन और बदहाली को लेकर वहां लगातार हिंसक विरोध प्रदर्शन और अशांति का माहौल बना हुआ है। माना जा रहा है कि गुलाम जम्मू-कश्मीर की इस बदहाली और आंतरिक विद्रोह से देश तथा दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए ही पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार रात को राजौरी सीमा पर इस भारी गोलीबारी की साजिश रची। पाकिस्तान हमेशा से अपनी घरेलू विफलताओं को छिपाने के लिए भारत के खिलाफ सीमा पर तनाव पैदा करने का पुराना पैंतरा अपनाता रहा है, और यह घटना भी उसी रणनीति का हिस्सा नजर आती है।
’ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद का सबसे बड़ा सीजफायर उल्लंघन
यह घटना इसलिए बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक है क्योंकि पिछले वर्ष भारतीय सेना द्वारा सीमा पार आतंकियों और उनके बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया था। इस सफल ऑपरेशन के बाद से नियंत्रण रेखा पर काफी हद तक शांति बनी हुई थी और बड़ी गोलाबारी की घटनाएं थम सी गई थीं। हालांकि, इस बीच सीमा पार से आतंकियों द्वारा घुसपैठ के कई छोटे-मोटे प्रयास जरूर किए गए, जिन्हें मुस्तैद भारतीय जवानों ने हर बार नाकाम कर दिया। लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली बार पाकिस्तान ने इतनी बड़ी तादाद में हथियारों का इस्तेमाल कर सीधे सीजफायर का उल्लंघन किया है। सेना को यह भी अंदेशा है कि इस भारी गोलाबारी की आड़ में पाकिस्तान कुछ खूंखार आतंकियों को भारतीय सीमा के भीतर धकेलने की फिराक में था। भारी गोलीबारी करके अक्सर आतंकियों को कवर फायर दिया जाता है ताकि वे अंधेरे का फायदा उठाकर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर सकें।
हाई अलर्ट पर भारतीय सेना, बढ़ाई गई चौकसी
पाकिस्तानी सेना के इन नापाक मंसूबों को भांपते हुए भारतीय सेना ने पूरी नियंत्रण रेखा पर अपनी सतर्कता को दोगुना कर दिया है। राजौरी और इसके आस-पास के सभी संवेदनशील सेक्टरों में सेना की गश्त तेज कर दी गई है। इसके साथ ही आधुनिक निगरानी उपकरणों, नाइट विजन कैमरों और थर्मल इमेजर्स के जरिए हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।






