क्या खत्म होने जा रहा है अमेरिका-ईरान टकराव? शांति समझौते पर बढ़ी सहमति, लेकिन तेहरान ने रखी बड़ी शर्त

संवाद 24 नई दिल्ली। करीब तीन महीनों से मध्य पूर्व में जारी तनाव, सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक खींचतान के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते के मसौदे पर व्यापक सहमति बनने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में अब भी कुछ अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे अंतिम घोषणा को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

ट्रंप का दावा- समझौता जल्द होगा अंतिम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही इस पर औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि समझौते के बाद क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

पाकिस्तान की मध्यस्थता बनी अहम कड़ी
इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में कहा कि समझौते का अंतिम मसौदा तैयार हो चुका है और दोनों पक्ष जल्द ही इसे औपचारिक रूप दे सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, बातचीत को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान, कतर, मिस्र और तुर्किये जैसे देशों ने भी महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।

होरमुज जलडमरूमध्य बना समझौते का बड़ा केंद्र
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। समझौते के तहत इस क्षेत्र में नौवहन गतिविधियों को सामान्य बनाने और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई है। यदि इस दिशा में सहमति बनती है तो वैश्विक तेल बाजारों को भी राहत मिल सकती है।

परमाणु कार्यक्रम पर अभी बाकी है स्पष्टता
हालांकि कई मुद्दों पर प्रगति हुई है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी भी पूरी स्पष्टता नहीं आई है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि भविष्य की वार्ताओं में इस विषय पर ठोस प्रतिबद्धताएं तय की जाएं, जबकि ईरान का कहना है कि उसके राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दोनों देशों के बीच यही मुद्दा आगे की बातचीत में सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

तेहरान ने कहा- अंतिम निर्णय अभी नहीं
जहां अमेरिकी नेतृत्व समझौते को लगभग तय मान रहा है, वहीं ईरान ने अधिक सतर्क रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और समझौते की समयसीमा तथा हस्ताक्षर की प्रक्रिया पर बातचीत जारी है। तेहरान का स्पष्ट कहना है कि वह अपने रणनीतिक हितों और तथाकथित “रेड लाइन्स” से कोई समझौता नहीं करेगा।

दुनिया की नजरें अंतिम घोषणा पर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संभावित समझौते को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी थीं। ऐसे में यदि अमेरिका और ईरान किसी स्थायी समझौते तक पहुंचते हैं तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विश्व राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।

आगे क्या?
अब सबकी निगाहें उस आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिसका संकेत दोनों देशों के नेताओं की ओर से मिल रहा है। यदि आने वाले दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह हाल के वर्षों में अमेरिका और ईरान के संबंधों में सबसे बड़ा कूटनीतिक बदलाव माना जाएगा। वहीं यदि किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती, तो क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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