
संवाद 24 नई दिल्ली। देश की सबसे चर्चित और लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से चल रही जांच के बाद सीबीआई की इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग (EOW) ने दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में 13 मुख्य आरोपियों के खिलाफ पहली विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में आज इस चार्जशीट पर अहम फैसला और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
NTA के विशेषज्ञों और कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा
सीबीआई द्वारा दाखिल की गई इस चार्जशीट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पैनल में शामिल कई विषय विशेषज्ञों और प्रमुख कोचिंग संस्थानों के संचालकों के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, जिन 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है, वे सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
चार्जशीट में नामजद प्रमुख आरोपियों में:
- एनटीए (NTA) एक्सपर्ट्स: मनीषा मंधारे (बायोलॉजी एक्सपर्ट), प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी (केमिस्ट्री एक्सपर्ट/अनुवादक), और मनीषा संजय हवलदार (फिजिक्स एक्सपर्ट)।
- कोचिंग संचालक व फैकल्टी: लातूर स्थित आरसीसी (RCC) कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक शिवराज रघुनाथ मोतेगांवकर और पुणे के एपीएमए (APMA) कोचिंग के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर व फिजिक्स फैकल्टी तेजस हर्षदकुमार शाह।
- अन्य बिचौलिए और मददगार: डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे, मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय निवृत्ति लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार, यश यादव, मांगीलाल बीवाल, विकास बीवाल और दिनेश बीवाल शामिल हैं।
92 जगहों पर छापेमारी, 72 अधिकारियों की टीम ने बेपर्दा किया गिरोह
सीबीआई ने इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की थी। इस जांच के लिए 72 जांच अधिकारियों और 8 साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की गई थी। जांच टीम ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत देशभर में लगभग 92 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए गए। डिजिटल फोरेंसिक, हैंडराइटिंग एनालिसिस और एक्सपर्ट रिव्यू के आधार पर सीबीआई ने प्रश्नपत्र लीक होने के पूरे नेटवर्क और क्रोनोलॉजी को साबित किया है। इसके साथ ही सीबीआई ने आरोपियों के बैंक खातों, बैंक लॉकरों और डीमैट अकाउंट को भी फ्रीज कर दिया है।
नए और कड़े कानून के तहत दर्ज हुआ केस
पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए सरकार द्वारा लागू किए गए नए सख्त कानून ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ (Public Examinations Act, 2024) के तहत इस मामले में कड़ी कार्रवाई की गई है। सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और लोक परीक्षा अधिनियम की धारा 3, 4, 5, 10 और 11 के तहत केस दर्ज किया है। इस चार्जशीट को मजबूत बनाने के लिए सीबीआई ने 360 गवाहों के बयान, 422 महत्वपूर्ण दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्य कोर्ट के समक्ष पेश किए हैं।
अस्पताल परिसर से लीक हुआ था केमिस्ट्री का पर्चा
सीबीआई जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एनटीए पैनल के सदस्य और अनुवादक पी.वी. कुलकर्णी के जरिए प्रश्न पत्र लीक की शुरुआत हुई थी। इसके बाद लातूर में कोचिंग चलाने वाले शिवराज मोतेगांवकर ने आरोपी डॉ. मनोज शिरुरे के सिद्धि विनायक अस्पताल परिसर में इस लीक प्रश्नपत्र को प्राप्त किया था। परीक्षा से कई हफ्ते पहले ही अप्रैल में ही अस्पताल परिसर का इस्तेमाल रसायन विज्ञान (Chemistry) के पेपर तक पहुंच बनाने के लिए किया गया था।
आज फास्ट ट्रैक कोर्ट में क्या होगा?
सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट आज इस चार्जशीट पर संज्ञान लेगी। अदालत आज मामले की अगली रूपरेखा, आरोपियों की न्यायिक हिरासत और उन पर आरोप तय (Charge Framing) करने की दिशा में अगली सुनवाई की तारीख तय करेगी। लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजरें आज अदालत में होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला न केवल नीट अभ्यर्थियों के न्याय से जुड़ा है, बल्कि देश की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता की साख का सवाल भी है।






