
संवाद 24 नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक हलचलों के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित परमाणु वार्ता को लेकर अपना रुख और स्पष्ट कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि जब तक प्रस्तावित अंतरिम समझौते को पूरी तरह लागू नहीं किया जाता, तब तक तेहरान नई परमाणु वार्ता की मेज पर नहीं बैठेगा। उनके इस बयान ने ऐसे समय में वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है, जब दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत भी सामने आ रहे हैं।
समझौते से पहले भरोसे की मांग
अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान केवल आश्वासनों के आधार पर आगे बढ़ने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि पहले से प्रस्तावित अंतरिम व्यवस्था के प्रावधानों को व्यवहारिक रूप से लागू किया जाना चाहिए, तभी आगे की बातचीत सार्थक होगी। उन्होंने संकेत दिया कि मसौदे पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है और कुछ बिंदुओं पर चर्चा जारी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा
ईरान ने एक बार फिर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा उठाया है। अराघची का कहना है कि इस क्षेत्र की व्यवस्था पुराने स्वरूप में वापस नहीं जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समुद्री मार्ग पर ईरान और ओमान की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान प्रतिबद्ध है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ी उम्मीदें
हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। विभिन्न कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, युद्धविराम को आगे बढ़ाने, क्षेत्रीय तनाव कम करने और परमाणु मुद्दों पर भविष्य की बातचीत शुरू करने को लेकर दोनों पक्ष पहले की तुलना में अधिक करीब दिखाई दे रहे हैं। हालांकि कई संवेदनशील मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है।
परमाणु कार्यक्रम पर बना हुआ है गतिरोध
ईरान लगातार यह दोहराता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अपने परमाणु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता पर टिकी दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरिम समझौते को लागू करने में सफलता मिलती है तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार हो सकता है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता की नई संभावनाएं भी पैदा होंगी। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां तनाव कम होना विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भी राहतभरा साबित हो सकता है।
अंतिम निर्णय का इंतजार
फिलहाल दोनों देशों की ओर से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद अंतिम समझौते को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ईरान का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी चर्चा जारी है और किसी भी संभावित समझौते को अंतिम रूप देने से पहले राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में दुनिया की नजर अब आने वाले दिनों में होने वाले कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।






