UN में पाकिस्तान की खुली पोल! भारत ने आतंकवाद और दुष्प्रचार पर सुनाई खरी-खरी, दुनिया के सामने रखे सबूत

संवाद 24 नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद और दुष्प्रचार के मुद्दे पर कड़ा जवाब देते हुए उसकी दोहरी नीति को दुनिया के सामने उजागर किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल झूठे आरोप लगाने और भ्रम फैलाने के लिए करता रहा है, जबकि उसका अपना रिकॉर्ड आतंकवाद को संरक्षण देने के आरोपों से घिरा रहा है। भारत की इस प्रतिक्रिया को वैश्विक मंच पर एक मजबूत कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तान के आरोपों का भारत ने दिया करारा जवाब
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए भारत ने कहा कि ऐसे देश को दूसरों पर उंगली उठाने का कोई अधिकार नहीं है, जिसकी धरती पर लंबे समय तक आतंकवादी संगठन सक्रिय रहे हों। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से बार-बार तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश की जाती है, लेकिन अब दुनिया उसके इस तरीके को भली-भांति समझ चुकी है। भारत ने दो टूक कहा कि झूठे आरोपों के सहारे सच्चाई को नहीं बदला जा सकता।

आतंकवाद पर दोहरे रवैये को लेकर उठाए सवाल
भारत ने अपने बयान में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। भारतीय पक्ष ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इसके खिलाफ किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले तत्वों और उन्हें संरक्षण देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा है।

दुष्प्रचार फैलाने की कोशिशों पर भी भारत का प्रहार
भारत ने पाकिस्तान पर दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह लगातार झूठी सूचनाओं और भ्रामक अभियानों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का प्रयास करता रहा है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न वैश्विक मंचों तक पाकिस्तान की ओर से कई बार ऐसे प्रयास किए गए हैं, लेकिन तथ्य और सच्चाई हर बार सामने आ जाती है। भारत ने कहा कि विश्व समुदाय को ऐसे दुष्प्रचार अभियानों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।

मानवाधिकार और शांति की बात करने वालों को आईना
अपने संबोधन में भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अक्सर मानवाधिकार और क्षेत्रीय शांति की बातें करता है, लेकिन उसके अपने हालात और रिकॉर्ड इन दावों के विपरीत दिखाई देते हैं। भारत ने कहा कि किसी दूसरे देश पर सवाल उठाने से पहले पाकिस्तान को अपने यहां मौजूद कट्टरपंथ और आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। भारतीय पक्ष ने कहा कि केवल बयानबाजी से शांति स्थापित नहीं होती, बल्कि उसके लिए ठोस कदम उठाने पड़ते हैं।

सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा फिर उठा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भी मजबूती से रखा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वर्षों से भारत आतंकवादी गतिविधियों का सामना करता रहा है और इस खतरे से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है और इस दिशा में सभी देशों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद के प्रति नरम रवैया भविष्य में और बड़े खतरों को जन्म दे सकता है।

वैश्विक मंच पर भारत का मजबूत संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह प्रतिक्रिया केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी देशों और संगठनों के लिए संदेश है जो आतंकवाद या दुष्प्रचार को किसी भी रूप में समर्थन देते हैं। हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज को और मजबूत किया है तथा इस मुद्दे पर उसे कई देशों का समर्थन भी मिला है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह शांति, विकास और सहयोग में विश्वास रखता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
अपने संबोधन के अंत में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों की जवाबदेही तय करने की मांग की। भारत ने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता तभी सुनिश्चित की जा सकती है, जब आतंकवाद और दुष्प्रचार के खिलाफ एक समान और सख्त नीति अपनाई जाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत की इस कड़ी प्रतिक्रिया के बाद एक बार फिर आतंकवाद और उससे जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की भूमिका वैश्विक चर्चा का विषय बन गई है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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