कार लॉक होने के बाद भी सुरक्षित नहीं आपका निजी डेटा, आधुनिक गाड़ियों में बढ़ रहे साइबर हमले के खतरे

संवाद 24 डेस्क। आज की आधुनिक कारें केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का साधन नहीं रह गई हैं। इंटरनेट, मोबाइल अनुप्रयोगों, उपग्रह आधारित स्थान निर्धारण, ऑनलाइन मनोरंजन और दूरस्थ निगरानी जैसी सुविधाओं ने इन्हें तकनीक से लैस स्मार्ट वाहन बना दिया है। चालक घर बैठे अपनी कार की स्थिति जान सकता है, मोबाइल से दरवाजे खोल सकता है और वाहन के रखरखाव से जुड़ी जानकारी भी प्राप्त कर सकता है। लेकिन इन सुविधाओं के पीछे एक ऐसा डिजिटल तंत्र काम करता है, जो सुरक्षा की दृष्टि से नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। आमतौर पर कार का दरवाजा बंद करने और चाबी अपने पास रखने के बाद लोग वाहन को सुरक्षित मान लेते हैं। हालांकि, इंटरनेट से जुड़ी कारों के मामले में निजी जानकारी का जोखिम केवल वाहन तक सीमित नहीं रहता। कार से जुड़े मोबाइल अनुप्रयोगों, ऑनलाइन सेवाओं और दूरस्थ सर्वरों में मौजूद कमजोरियां भी व्यक्तिगत जानकारी को खतरे में डाल सकती हैं।
स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय और चाल्मर्स प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से जुड़े शोधकर्ताओं के एक अध्ययन ने इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है। सॉफ्टवेयर गुणवत्ता शोध पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में इंटरनेट से जुड़ी कारों की सुरक्षा संबंधी कमजोरियों का विश्लेषण किया गया। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि वाहन की सुरक्षा का आकलन करते समय केवल उसके भीतर लगे कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को देखना पर्याप्त नहीं है। कार के साथ संचार करने वाले बाहरी डिजिटल मंचों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

डिजिटल होती कारों के साथ क्यों बढ़ रहा है खतरा?
पिछले कुछ वर्षों में वाहन उद्योग में तेजी से तकनीकी बदलाव हुए हैं। आधुनिक कारों में मनोरंजन प्रणाली, इंटरनेट संपर्क, मोबाइल से नियंत्रण, वाहन की स्थिति की निगरानी और दूरस्थ सॉफ्टवेयर अद्यतन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने लगी हैं। इन सुविधाओं के कारण चालक को सुविधा मिलती है, लेकिन वाहन और बाहरी डिजिटल प्रणालियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान भी बढ़ता है।
जब कोई कार मोबाइल अनुप्रयोग या इंटरनेट आधारित सेवा से जुड़ती है, तो उसके साथ कई प्रकार की जानकारियां साझा हो सकती हैं। इनमें वाहन की पहचान संख्या, यात्रा का विवरण, स्थान संबंधी सूचना, संपर्क विवरण और कुछ परिस्थितियों में चालक की आदतों से जुड़ा डेटा शामिल हो सकता है। इन जानकारियों को सेवाओं के संचालन, वाहन की निगरानी और ग्राहक सहायता के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या तब पैदा होती है, जब इन सूचनाओं को सुरक्षित रखने वाली प्रणालियों में कोई कमजोरी रह जाती है।
साइबर अपराधी हमेशा सीधे वाहन को निशाना नहीं बनाते। कई बार उनके लिए वाहन निर्माता की वेबसाइट, मोबाइल अनुप्रयोग, बाहरी सेवा प्रदाता या इंटरनेट पर मौजूद सर्वर अधिक आसान प्रवेश द्वार बन सकते हैं। यदि इन प्रणालियों में उचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं है, तो निजी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम बढ़ जाता है। इसका अर्थ यह है कि कार के दरवाजे बंद होने के बावजूद उससे जुड़ी डिजिटल जानकारी असुरक्षित रह सकती है।

शोध में क्या सामने आया? 413 सुरक्षा कमजोरियों का विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने वर्ष 2022 से सितंबर 2024 के बीच दर्ज की गई 413 सॉफ्टवेयर सुरक्षा कमजोरियों का अध्ययन किया। इसके बाद इन निष्कर्षों की तुलना वर्ष 2010 से 2019 के दौरान दर्ज कमजोरियों के पुराने आंकड़ों से की गई। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि इंटरनेट से जुड़ी कारों के डिजिटल ढांचे में सुरक्षा संबंधी समस्याएं किस दिशा में बदल रही हैं।
विश्लेषण में सामने आया कि कारों के बाहर मौजूद डिजिटल सेवाओं, इंटरनेट अनुप्रयोगों और संबंधित प्रणालियों में पाई जाने वाली कमजोरियों का अनुपात पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। पुराने अध्ययन में बाहरी अनुप्रयोगों और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी कमजोरियां कुल मामलों का लगभग सातवां हिस्सा थीं। नए अध्ययन में यह अनुपात बढ़कर करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गया। यानी सुरक्षा समस्याओं में बाहरी डिजिटल प्रणालियों की हिस्सेदारी लगभग तीन गुनी हो गई।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि आधुनिक वाहनों की सुरक्षा का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है। अब केवल कार के भीतर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण इकाइयों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। वाहन से जुड़ी वेबसाइट, मोबाइल अनुप्रयोग, दूरस्थ निगरानी प्रणाली और बाहरी सेवा प्रदाताओं को भी सुरक्षित बनाना आवश्यक है।
यह आंकड़ा सभी आधुनिक कारों के असुरक्षित होने का प्रमाण नहीं है। इसका संबंध अध्ययन में विश्लेषित सुरक्षा कमजोरियों के वितरण से है। फिर भी यह स्पष्ट संकेत देता है कि वाहन उद्योग को अपनी सुरक्षा रणनीति में बाहरी डिजिटल सेवाओं को अधिक प्राथमिकता देनी होगी।

निजता पर सीधा असर, कैसे उजागर हो सकती है आपकी दिनचर्या?
कार से जुड़ी डिजिटल जानकारी का दुरुपयोग केवल तकनीकी समस्या नहीं है। यह किसी व्यक्ति की निजता, सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से भी जुड़ा मामला है। यदि किसी डिजिटल सेवा में सुरक्षित रखे गए स्थान संबंधी आंकड़ों तक अनधिकृत पहुंच हो जाए, तो यह पता लगाना संभव हो सकता है कि कोई व्यक्ति सामान्यतः कहां रहता है, किन स्थानों पर जाता है और किस समय यात्रा करता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कार की निगरानी करने वाला अनुप्रयोग नियमित रूप से वाहन का स्थान दर्ज करता है, तो इन जानकारियों से घर और कार्यस्थल के बीच आने-जाने की आदतों का अनुमान लगाया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में इससे व्यक्ति की दिनचर्या और उसके नियमित ठिकानों का पता चल सकता है। यदि ऐसी जानकारी गलत हाथों में पहुंच जाए, तो उसका इस्तेमाल पीछा करने, धोखाधड़ी या अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए किए जाने का जोखिम पैदा हो सकता है।
यह भी समझना जरूरी है कि प्रत्येक कार में एक जैसी जानकारी एकत्र नहीं होती। यह वाहन के मॉडल, उपलब्ध सुविधाओं, निर्माता की नीतियों और उपयोगकर्ता द्वारा दी गई अनुमतियों पर निर्भर करता है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर कार अपने चालक की सभी गतिविधियों का पूरा विवरण दर्ज करती है। लेकिन जहां व्यापक आंकड़े एकत्र किए जाते हैं, वहां उनकी सुरक्षा और इस्तेमाल के नियमों की पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

मोबाइल अनुप्रयोग और बाहरी सर्वर क्यों बन रहे हैं कमजोर कड़ी?
आधुनिक कारों का डिजिटल ढांचा कई अलग-अलग प्रणालियों से मिलकर बनता है। इसमें वाहन के भीतर लगे कंप्यूटर, मोबाइल अनुप्रयोग, इंटरनेट आधारित सेवाएं, वाहन निर्माता के सर्वर और बाहरी तकनीकी कंपनियों के मंच शामिल हो सकते हैं। इन सभी प्रणालियों को आपस में जोड़ने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर और संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है।
यदि इनमें से किसी एक हिस्से में सुरक्षा की कमी रह जाए, तो पूरी व्यवस्था पर उसका प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, किसी बाहरी सेवा प्रदाता के सर्वर पर कमजोर प्रवेश नियंत्रण होने या उपयोगकर्ता की पहचान की जांच ठीक से नहीं होने पर संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है। इसी तरह सॉफ्टवेयर में त्रुटियां, असुरक्षित संचार और पुराने सुरक्षा उपाय भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
शोध में यह भी रेखांकित किया गया कि इंटरनेट से जुड़े बाहरी अनुप्रयोगों में ऐसी कमजोरियां पाई जाती हैं, जिनका इस्तेमाल अनधिकृत प्रवेश या जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सकता है। विशेष रूप से इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध सेवाओं को लगातार सुरक्षा जांच की जरूरत होती है, क्योंकि वे दूर बैठे हमलावरों के लिए संभावित प्रवेश बिंदु बन सकती हैं। वाहन की सुरक्षा इसलिए तभी मजबूत मानी जा सकती है, जब उसके भीतर और बाहर मौजूद सभी संबंधित प्रणालियों को एक साथ सुरक्षित बनाया जाए।

आठ लाख ग्राहकों की जानकारी उजागर होने की घटना ने बढ़ाई चिंता
वाहनों से जुड़ी डिजिटल जानकारी की सुरक्षा का प्रश्न केवल काल्पनिक खतरे तक सीमित नहीं है। वर्ष 2024 में सामने आए एक बड़े आंकड़ा रिसाव के मामले में लगभग आठ लाख ग्राहकों से संबंधित स्थान और संपर्क की जानकारी उजागर होने की बात सामने आई थी। इस घटना में बाहरी सेवा प्रदाता से जुड़े असुरक्षित प्रवेश विवरण के कारण आंकड़ों तक पहुंच संभव हुई।
इस मामले से एक अहम सबक मिलता है। किसी वाहन निर्माता की अपनी प्रणालियां सुरक्षित होने के बावजूद उससे जुड़ी तीसरी कंपनी की लापरवाही ग्राहकों की निजता को खतरे में डाल सकती है। डिजिटल सेवाओं की आपूर्ति करने वाली कंपनियों, आंकड़े रखने वाले सर्वरों और वाहन निर्माता के बीच सुरक्षा की जिम्मेदारी स्पष्ट होना जरूरी है।
आज अनेक तकनीकी सेवाएं बाहरी कंपनियों की मदद से संचालित होती हैं। ऐसे में सुरक्षा का मूल्यांकन केवल वाहन बनाने वाली कंपनी तक सीमित नहीं रह सकता। यह देखना भी आवश्यक है कि ग्राहक की जानकारी कहां रखी जा रही है, किन कंपनियों को उस तक पहुंच प्राप्त है और किसी सुरक्षा घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी।

मनोरंजन प्रणाली भी बन सकती है साइबर हमले का रास्ता
कार के भीतर लगी मनोरंजन और सूचना प्रणाली को कई लोग केवल संगीत सुनने, मोबाइल जोड़ने या दिशा जानने का माध्यम मानते हैं। लेकिन आधुनिक वाहनों में यह प्रणाली दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संचार माध्यमों से भी जुड़ी हो सकती है। इसी कारण इसमें मौजूद सॉफ्टवेयर की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वर्ष 2015 में साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने एक जीप के मनोरंजन तंत्र से जुड़ी कमजोरी का प्रदर्शन किया था। इस घटना ने दिखाया कि यदि वाहन के विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों के बीच पर्याप्त सुरक्षा अवरोध न हों, तो मनोरंजन प्रणाली में मौजूद कमजोरी अधिक गंभीर खतरे का कारण बन सकती है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर मनोरंजन प्रणाली से वाहन के संचालन पर नियंत्रण पाया जा सकता है, बल्कि यह कि अलग-अलग प्रणालियों के बीच सुरक्षित विभाजन बेहद जरूरी है।
नए शोध में वाहन के मनोरंजन तंत्र से जुड़ी कमजोरियों पर भी ध्यान दिया गया। अध्ययन के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में एक वाहन की मनोरंजन प्रणाली को वाई-फाई के माध्यम से ठप करने की संभावना से जुड़ी कमजोरी दर्ज की गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि सुविधा देने वाली प्रणालियों का परीक्षण भी सुरक्षा के नजरिये से किया जाना चाहिए। वाहन निर्माता के लिए जरूरी है कि वह सॉफ्टवेयर की खामियों को समय रहते पहचाने और उनके समाधान के लिए सुरक्षित अद्यतन उपलब्ध कराए।

कार मालिक अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा कैसे करें?
डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाते समय वाहन मालिकों को भी कुछ सावधानियां अपनानी चाहिए। सबसे पहले कार से संबंधित मोबाइल अनुप्रयोग केवल आधिकारिक स्रोतों से डाउनलोड करें। अनुप्रयोग को स्थापित करते समय यह जांचें कि वह किन जानकारियों और सुविधाओं तक पहुंच मांग रहा है। यदि किसी सुविधा के लिए स्थान, संपर्क सूची या अन्य निजी जानकारी की अनुमति मांगी जाती है, तो यह समझना जरूरी है कि वह अनुमति वास्तव में आवश्यक है या नहीं।
दूसरा महत्वपूर्ण कदम है मोबाइल अनुप्रयोग और वाहन के सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अद्यतन रखना। कंपनियां कई बार नए संस्करणों के माध्यम से सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करती हैं। लंबे समय तक पुराने संस्करण का इस्तेमाल करने से ऐसी कमजोरियां बनी रह सकती हैं, जिनका समाधान पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका हो।
इसके अलावा वाहन से जुड़े खातों के लिए मजबूत और अलग कूटशब्द का इस्तेमाल करना चाहिए। जहां संभव हो, वहां दोहरी पहचान जांच की सुविधा सक्रिय रखें। सार्वजनिक वाई-फाई पर वाहन से संबंधित खातों में प्रवेश करने से बचें और किसी अनजान संदेश में आए संदिग्ध संपर्क पर अपनी जानकारी साझा न करें।
यदि आपने अपनी कार किसी दूसरे व्यक्ति को बेची है, तो वाहन से जुड़े खाते, मोबाइल संपर्क और व्यक्तिगत जानकारियां हटाना न भूलें। मोबाइल को कार से जोड़ते समय भी यह जांचें कि कौन-सी जानकारियां साझा हो रही हैं। इसी तरह यदि कार में पुराने उपयोगकर्ताओं के खाते मौजूद हैं, तो उन्हें हटवाना आवश्यक है।
वाहन खरीदते समय केवल इंजन, सुरक्षा सुविधाओं, माइलेज और कीमत की तुलना करना पर्याप्त नहीं है। यह भी जानने का प्रयास करें कि कंपनी निजी जानकारी का संग्रह कैसे करती है, उसे कितने समय तक रखती है और किन परिस्थितियों में दूसरी कंपनियों के साथ साझा करती है।

वाहन कंपनियों और सरकार की क्या होनी चाहिए जिम्मेदारी?
कारों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल ग्राहकों की जिम्मेदारी नहीं है। वाहन निर्माताओं को सॉफ्टवेयर तैयार करने के शुरुआती चरण से ही सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। किसी नए वाहन को बाजार में उतारने से पहले उसकी मनोरंजन प्रणाली, इंटरनेट सेवाओं, मोबाइल अनुप्रयोगों और बाहरी सर्वरों की नियमित सुरक्षा जांच होनी चाहिए।
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वाहन के मनोरंजन तंत्र में कोई कमजोरी आने पर उससे वाहन के महत्वपूर्ण नियंत्रण तंत्र तक अनधिकृत पहुंच न बन सके। इसके लिए अलग-अलग प्रणालियों के बीच मजबूत सुरक्षा अवरोध, सुरक्षित संचार और सीमित पहुंच की व्यवस्था आवश्यक है।
बाहरी सेवा प्रदाताओं की सुरक्षा जांच भी नियमित रूप से की जानी चाहिए। यदि किसी कंपनी को ग्राहकों की निजी जानकारी तक पहुंच दी जाती है, तो उसके लिए स्पष्ट सुरक्षा मानक और जवाबदेही तय होनी चाहिए। सुरक्षा संबंधी कमजोरी सामने आने पर ग्राहकों को समय पर सूचित करने और समस्या का समाधान करने की व्यवस्था भी जरूरी है।
भारत में भी इंटरनेट से जुड़ी कारों की बढ़ती लोकप्रियता के साथ वाहन डेटा की सुरक्षा पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 भारत में डिजिटल व्यक्तिगत जानकारी के प्रसंस्करण से संबंधित एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता है। हालांकि, किसी विशेष वाहन सेवा पर इसके प्रावधान किस तरह लागू होंगे, यह संबंधित परिस्थितियों और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। वाहन कंपनियों को पारदर्शिता, उचित सहमति और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को अपनी नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहिए।

स्मार्ट कार के साथ स्मार्ट सुरक्षा भी जरूरी
आधुनिक कारें यात्रा को अधिक सुविधाजनक, आरामदायक और तकनीकी रूप से उन्नत बना रही हैं। मोबाइल से वाहन नियंत्रित करने, उसकी स्थिति जानने और डिजिटल मनोरंजन का लाभ उठाने जैसी सुविधाएं अब लोगों की अपेक्षाओं का हिस्सा बनती जा रही हैं। लेकिन इन सुविधाओं के साथ निजी जानकारी की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं।
413 सॉफ्टवेयर कमजोरियों के विश्लेषण से सामने आया रुझान बताता है कि वाहनों की साइबर सुरक्षा अब केवल उनके भीतर लगे कंप्यूटरों तक सीमित नहीं रह सकती। मोबाइल अनुप्रयोग, इंटरनेट आधारित सेवाएं, बाहरी सर्वर और सेवा प्रदाता भी सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
कार को लॉक करना भौतिक सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन इससे उससे जुड़ी हर डिजिटल जानकारी अपने आप सुरक्षित नहीं हो जाती। इसलिए वाहन निर्माताओं को मजबूत सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी और ग्राहकों को भी अपनी डिजिटल गोपनीयता के प्रति जागरूक रहना होगा। आने वाले समय में किसी कार की गुणवत्ता का आकलन केवल उसकी गति, आराम और तकनीकी सुविधाओं से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगा कि वह अपने उपयोगकर्ता की निजी जानकारी को कितनी जिम्मेदारी से सुरक्षित रखती है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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