
उमर्दा (तिर्वा), कन्नौज। वर्षों से बंद पड़े कन्नौज के बहुचर्चित काऊ मिल्क प्लांट में एक बार फिर उत्पादन शुरू होने से जिले के डेयरी कारोबार को नई उम्मीद मिली है। उमर्दा स्थित इस प्लांट में अब मदर डेयरी की ओर से दूध की पैकेजिंग और देशी घी का उत्पादन किया जा रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, प्लांट में प्रतिदिन लगभग 20 हजार से 60 हजार लीटर तक दूध पहुंच रहा है। इससे कन्नौज सहित आसपास के क्षेत्रों के पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के लिए एक बार फिर बड़ा बाजार तैयार होने की संभावना बढ़ी है।
141 करोड़ की परियोजना, लेकिन संचालन में आईं कई चुनौतियां
उमर्दा के बढ़नपुर वीरहार क्षेत्र में स्थापित काऊ मिल्क प्लांट को पशुपालकों को संगठित दुग्ध बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। इस परियोजना के निर्माण और लागत को लेकर अलग-अलग समय की मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े प्रकाशित हुए हैं। पुरानी खबरों में इसकी लागत करीब 140 से 141 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, सितंबर 2026 में हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में प्लांट की लागत 84.69 करोड़ रुपये बताई गई है। इसकी स्थापित प्रसंस्करण क्षमता एक लाख लीटर दूध प्रतिदिन है।
अक्टूबर 2022 में क्यों ठप हो गया था उत्पादन?
प्लांट के संचालन में सबसे बड़ी बाधा पर्याप्त मात्रा में दूध का संकलन नहीं होना और वित्तीय चुनौतियां रहीं। स्थापित क्षमता के अनुरूप दूध उपलब्ध नहीं होने तथा संचालन खर्चों का संतुलन न बन पाने के कारण अक्टूबर 2022 से इसका नियमित संचालन प्रभावित हो गया था। इसके बंद होने से क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों को अपने दूध की बिक्री के लिए दूसरे विकल्पों पर निर्भर होना पड़ा।
एनडीडीबी को दस साल की लीज पर सौंपा गया प्लांट
प्लांट को दोबारा संचालित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार, प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (PCDF) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच 25 जून 2025 को समझौता हुआ। इसके तहत कन्नौज समेत प्रदेश के तीन डेयरी प्लांट दस वर्षों के लिए एनडीडीबी को सौंपे गए। इस व्यवस्था का उद्देश्य डेयरी इकाइयों का बेहतर प्रबंधन, दूध का व्यवस्थित संकलन और पशुपालकों को उचित मूल्य एवं समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। NDDB +1
मदर डेयरी के संचालन से फिर बढ़ी रफ्तार
अप्रैल 2026 में प्लांट की मशीनों का परीक्षण पूरा होने के बाद उत्पादन दोबारा शुरू होने की खबर सामने आई थी। अमर उजाला की 30 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट में इटावा से 24 हजार लीटर दूध का टैंकर पहुंचा था। हिन्दुस्तान की 14 अप्रैल की रिपोर्ट में भी मदर डेयरी के संचालन संभालने और उत्पादन शुरू करने की तैयारियों का उल्लेख किया गया था। अब दूध की पैकेजिंग और देशी घी निर्माण के साथ इसकी गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं।
आधुनिक मशीनों से दूध की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग
प्लांट में दूध को ठंडा करने, फिल्टर करने और पैकेजिंग करने के लिए आधुनिक तकनीकी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां टेट्रा और पॉली पैकेजिंग की सुविधा है। अलग-अलग पैकेजिंग तकनीकों के माध्यम से उत्पादों को बाजार की आवश्यकता के अनुसार तैयार किया जा रहा है। तीन दिन की शेल्फ लाइफ वाले पैक्ड दूध की स्थानीय स्तर पर आपूर्ति की जा रही है, जबकि लंबी अवधि तक सुरक्षित रहने वाले पैकेज्ड उत्पादों की भी व्यवस्था है।
कानपुर से दिल्ली तक पहुंचेंगे कन्नौज के डेयरी उत्पाद
प्लांट में तैयार दूध और देशी घी की आपूर्ति कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, दिल्ली और मथुरा सहित विभिन्न बाजारों में की जा रही है। बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन और आपूर्ति का प्रबंधन किया जा रहा है। इससे कन्नौज की पहचान केवल इत्र उद्योग तक सीमित न रहकर डेयरी उत्पादन के क्षेत्र में भी मजबूत होने की संभावनाएं हैं।
पशुपालकों की आय और स्थानीय रोजगार पर टिकी निगाहें
इस प्लांट के दोबारा सक्रिय होने का सबसे बड़ा लाभ क्षेत्र के पशुपालकों को मिलने की उम्मीद है। गांवों में दूध संग्रह व्यवस्था मजबूत होने, नियमित खरीद और समय पर भुगतान की व्यवस्था बनने से किसानों को स्थानीय स्तर पर स्थायी बाजार मिल सकता है। साथ ही परिवहन, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और अन्य सहायक गतिविधियों में रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।कुल मिलाकर, उमर्दा का काऊ मिल्क प्लांट फिर से सक्रिय होना कन्नौज के ग्रामीण अर्थतंत्र के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले समय में दूध का संकलन कितना बढ़ता है, पशुपालकों को भुगतान कितना नियमित मिलता है और प्लांट अपनी एक लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता की दिशा में कितनी प्रगति करता है।






