
भूमि बैनामों की ई-पंजीयन व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में तिर्वा तहसील में पिछले दस दिनों से चल रही अधिवक्ताओं की हड़ताल मंगलवार को समाप्त हो गई। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ई-पंजीयन व्यवस्था के निजीकरण संबंधी प्रस्ताव वापस लेने के बाद अधिवक्ताओं ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया, जिसके साथ ही तहसील परिसर में न्यायिक और पंजीयन संबंधी कार्य पुनः सामान्य रूप से शुरू हो गए। प्रदेश के कई जिलों में भी इसी मुद्दे को लेकर अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखक संघों और स्टांप विक्रेताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था।
तहसील सभागार में बैठक, सर्वसम्मति से लिया गया फैसला
मंगलवार दोपहर तहसील सभागार में अधिवक्ताओं की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरकार द्वारा निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने के निर्णय का स्वागत किया गया। इसके बाद सर्वसम्मति से हड़ताल समाप्त कर नियमित न्यायिक कार्य, दस्तावेज पंजीकरण और अन्य विधिक गतिविधियां तत्काल प्रभाव से शुरू करने का निर्णय लिया गया। इससे बीते कई दिनों से लंबित रजिस्ट्री और न्यायालय संबंधी कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
पूर्व अध्यक्ष बोले— निजीकरण से रोजगार पर पड़ता प्रतिकूल असर
बार के पूर्व अध्यक्ष संजीव तिवारी ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यदि ई-पंजीयन व्यवस्था का निजीकरण लागू होता तो इससे अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों तथा इस व्यवस्था से जुड़े अनेक लोगों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्ताव वापस लिया जाना सकारात्मक कदम है, जिससे संबंधित वर्गों की चिंताओं का समाधान हुआ है।
कई वरिष्ठ अधिवक्ता रहे मौजूद
बैठक में संजीव तिवारी, रजत अरुण, कल्पेंद्र सिंह, कमलेश पाल, राजेश श्रीवास्तव, हरवेंद्र सिंह, अनिल कश्यप सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए भविष्य में न्यायिक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने का संकल्प व्यक्त किया।
लंबित मामलों के निस्तारण में आएगी तेजी
हड़ताल समाप्त होने के बाद तहसील परिसर में रजिस्ट्री, दस्तावेज पंजीकरण और न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई दोबारा शुरू हो गई है। इससे आम नागरिकों, भूमि क्रेताओं-विक्रेताओं तथा वादकारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पिछले दस दिनों से कार्य बाधित होने के कारण परेशान थे।






