
कन्नौज। स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर कन्नौज प्रशासन और परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिले में चलाए जा रहे जांच अभियान के दौरान 50 स्कूली वाहन ऐसे पाए गए हैं, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले। इनमें 35 वाहन पूरी तरह अनुपयुक्त बताए गए हैं, जबकि 15 अन्य वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया पूरी नहीं मिली। अधिकारियों ने मानक पूरे होने तक इन वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी है।
35 वाहन सड़क पर चलने योग्य नहीं मिले
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एडीएम न्यायिक विजय कुमार मिश्रा ने गंभीर कमियां पाए जाने वाले वाहनों के पंजीकरण निरस्त कराने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एआरटीओ इज्या तिवारी के मुताबिक जांच में 35 वाहन ऐसे मिले, जिन्हें सड़क पर बच्चों को ले जाने के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया।इन वाहनों के खिलाफ पंजीकरण निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है। वहीं, अन्य 15 वाहनों में फिटनेस संबंधी प्रक्रिया अधूरी पाई गई है। इन वाहनों को भी फिटनेस प्रमाणपत्र और आवश्यक मानक पूरे होने तक संचालन की अनुमति नहीं दी गई है।
कन्नौज में पहले भी सामने आती रही है फिटनेस की समस्या
स्कूली वाहनों की फिटनेस को लेकर कन्नौज में पहले भी परिवहन विभाग की कार्रवाई सामने आती रही है। नवंबर 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार जिले में 593 स्कूली वाहन पंजीकृत थे और फिटनेस नहीं कराने वाले 122 वाहनों का पंजीकरण निलंबित किया गया था। उस समय भी विभाग ने बिना फिटनेस वाहन मिलने पर जुर्माने और सीज करने की कार्रवाई की चेतावनी दी थी।मार्च 2026 में भी कन्नौज में 20 से अधिक स्कूली वाहनों की फिटनेस समय से नहीं होने पर परिवहन विभाग ने नोटिस और चेकिंग अभियान के जरिए कार्रवाई शुरू की थी। एआरटीओ इज्या तिवारी ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही नहीं बरतने की बात कही थी।
672 वाहनों की जांच का अभियान
इस साल अप्रैल में सामने आई जानकारी के मुताबिक कन्नौज जिले में 672 स्कूली वाहन दर्ज थे। इनमें से 510 वाहनों की जांच पूरी कर उनकी स्थिति पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी थी, जबकि 162 वाहनों की जांच बाकी थी। यह अभियान स्कूली वाहनों की वास्तविक स्थिति और मानकों के अनुपालन की जांच के लिए चलाया गया था।यह कार्रवाई राज्य स्तर पर चल रहे स्कूल वाहन सुरक्षा अभियान की पृष्ठभूमि में भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश सरकार के एकीकृत विद्यालयी वाहन अनुश्रवण पोर्टल के अनुसार स्कूल वाहनों के पंजीकरण, निरीक्षण और सुरक्षा मानकों की निगरानी के लिए राज्यभर में डिजिटल व्यवस्था लागू है।
फिटनेस में किन मानकों पर होती है जांच?
उत्तर प्रदेश के स्कूल वाहन संबंधी नियमों में फिटनेस के साथ वाहन के दस्तावेज, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना शामिल है। नियमों के तहत स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों को वाहनों के दस्तावेजों और निर्धारित मानकों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है।स्कूल बसों में आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, सीट बेल्ट सहित कई सुरक्षा व्यवस्थाएं निर्धारित हैं। चालक के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस और निर्धारित अनुभव जैसी शर्तें भी नियमों में शामिल हैं।
जुलाई में प्रदेशभर में चला विशेष अभियान
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने जुलाई 2026 में स्कूली बसों की विशेष जांच का अभियान भी चलाया। अभियान में बसों की बॉडी, सीटों, चेसिस माउंटिंग, आपातकालीन गेट, फायर एक्सटिंग्विशर, ब्रेक, टायर, सस्पेंशन और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच पर जोर दिया गया।इससे स्पष्ट है कि स्कूली वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा को लेकर इस समय प्रदेश स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।
रॉन्ग साइड और ओवरस्पीडिंग पर भी शिकंजा
परिवहन विभाग ने केवल फिटनेस तक कार्रवाई सीमित नहीं रखने के संकेत दिए हैं। रॉन्ग साइड वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट, नशे में वाहन चलाने और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी बढ़ी
स्कूली वाहनों में बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराना स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में 50 वाहनों का मानकों पर खरा न उतरना प्रशासन के लिए भी गंभीर संकेत है। खास तौर पर जिन 35 वाहनों को अनुपयुक्त पाया गया है, उनके पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई आगे किस स्तर तक पहुंचती है, यह देखने वाली बात होगी।






