पांच साल पुराने खोखे को लेकर बढ़ा विवाद, शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
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कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला छावनी में दो पड़ोसियों के बीच लकड़ी का खोखा रखने को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद शांत हो गया। सार्वजनिक स्थान पर रखा गया खोखा हटवाने के लिए नगर पालिका और पुलिस टीम को मौके पर पहुंचना पड़ा, जिसके बाद क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर सख्ती का संदेश भी दिया गया।
आईजीआरएस शिकायत के बाद पहुंची नगर पालिका और पुलिस
मोहल्ला छावनी निवासी कुंती देवी पत्नी नरेश बाथम के अनुसार उनके घर के बाहर पिछले करीब पांच वर्षों से एक लकड़ी का खोखा रखा हुआ था। इसी को लेकर पड़ोसी सोनपाल पुत्र शंकर लाल कोहली ने आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद नगर पालिका कर्मी और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंचे और खोखा हटाने की कार्रवाई शुरू की।
उत्तर प्रदेश में आईजीआरएस यानी इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम नागरिकों को सरकारी विभागों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने, उसकी स्थिति ट्रैक करने और समाधान पाने की सुविधा देता है। इस पोर्टल के जरिए अतिक्रमण, सार्वजनिक भूमि विवाद और स्थानीय निकायों से जुड़ी शिकायतें भी दर्ज कराई जा सकती हैं।
कार्रवाई के दौरान हुई कहासुनी, फिर खुद हटाया गया खोखा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान कुंती देवी और पुलिसकर्मियों के बीच कुछ देर तक कहासुनी भी हुई। नगर पालिका कर्मचारियों ने खोखा जब्त करने और जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। इसके बाद कुंती देवी ने स्वयं ही नगर पालिका के सहयोग से अपना लकड़ी का खोखा हटा लिया।
नगर पालिका अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रास्तों, नालियों और सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नियमों के विरुद्ध है। ऐसे मामलों में संबंधित निकाय को अतिक्रमण हटाने और आवश्यकता पड़ने पर दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है। इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहले सार्वजनिक सड़क, नाली और फुटपाथ पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के पक्ष में टिप्पणी कर चुका है।
क्षेत्रवासियों को दी गई सख्त चेतावनी
मौके पर मौजूद नगर पालिका और पुलिस टीम ने क्षेत्र के लोगों को चेतावनी दी कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार का कब्जा या अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में यदि किसी व्यक्ति द्वारा सड़क, नाली या सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से सामान रखा गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। सरकार और स्थानीय निकायों की ओर से सार्वजनिक भूमि को कब्जामुक्त कराने, यातायात बाधाओं को दूर करने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।






