
संवाद 24 नई दिल्ली। देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए संसद में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। लेकिन संसद की कार्यवाही के दौरान सदन में चल रहे राजनीतिक घमासान और विपक्षी हंगामे को लेकर सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष से स्पष्ट अपील की कि वे संसद को नारों और हंगामे का मैदान बनाने के बजाय ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ पर खुल कर गंभीर चर्चा करें।
“मुद्दे से भटकाने की राजनीति बंद हो”
संसद भवन परिसर में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बेहद तल्ख लेकिन संयमित लहजे में कहा कि देश के करोड़ों छात्र रात-दिन मेहनत करके अपने स्वर्णिम भविष्य के सपने बुनते हैं। जब परीक्षा प्रणाली में कोई धांधली या पेपर लीक की घटना होती है, तो इसका सबसे बड़ा झटका उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के होनहार बच्चों को लगता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस संवेदनशील विषय को लेकर पूरी तरह गंभीर और संवेदनशील है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स (High-Level Task Force) का गठन किया गया है और इसके साथ ही संसद में कड़े प्रावधानों वाला संशोधन कानून पेश किया गया है। लेकिन बेहद दुखद है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस गंभीर और छात्र-हित से जुड़े मुद्दे पर संसद के पटल पर तर्कसंगत बहस करने से भाग रहे हैं और लगातार नारेबाजी करके सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं।
कड़े प्रावधान और समयबद्ध सजा का ब्लूप्रिंट
किरेन रिजिजू ने विधेयक की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नया विधेयक पेपर लीक, धोखाधड़ी और अनुचित साधनों के संगठित सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मुख्य कानूनी प्रावधान:
सख्त और गैर-जमानती दंडात्मक कार्रवाई: पेपर लीक में शामिल संगठित गिरोहों, कोचिंग संस्थानों और दोषियों के खिलाफ कठोर आर्थिक दंड और लंबे कारावास की व्यवस्था।
समयबद्ध जांच व सुनवाई: मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष ढांचा ताकि सालों-साल मुकदमों के लटके रहने से युवाओं का समय बर्बाद न हो।
प्रौद्योगिकी और टास्क फोर्स: परीक्षा प्रक्रिया को हैक-प्रूफ और लीक-प्रूफ बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ टास्क फोर्स का सीधा समावेश।
रिजिजू ने कहा, “यदि संसद इतने ऐतिहासिक और जरूरी सुधार विधेयक पर चर्चा किए बिना केवल राजनीतिक उठापटक में उलझी रहेगी, तो इससे पूरे देश और खासकर छात्र समुदाय के बीच बहुत गलत और निराशाजनक संदेश जाएगा।”
“संसद ही संवाद का एकमात्र और सर्वश्रेष्ठ मंच”
संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्षी दलों के नेताओं को याद दिलाया कि लोकतंत्र में जनता की समस्याओं और युवाओं के सरोकारों को उठाने तथा उनका समाधान तलाशने का सबसे प्रामाणिक मंच देश की संसद ही है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से सीधा सवाल करते हुए कहा, *”संसद के अलावा और कौन सी ऐसी जगह है जहां हम देश के छात्रों की भावनाओं, उनकी चिंताओं और उनके सुझावों पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श कर सकते हैं? यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों का हितैषी होने का दावा करता है, तो उसे अपनी शर्तें थोपने और संसद में बहाने बनाने की राजनीति छोड़कर तुरंत पटल पर आकर अपनी राय रखनी चाहिए।” उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में यह भी जोड़ा कि मुद्दे को मुख्य बिंदु से भटकाने या परीक्षा सुधारों की प्रक्रिया को धीमा करने की कोई भी राजनीतिक कोशिश देश के युवाओं के साथ अन्याय होगी। सरकार का एकमात्र लक्ष्य इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराकर देश की पूरी प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करना है।
परीक्षा प्रणाली के नए युग की शुरुआत
नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संबंध में पैदा हुए विवादों के बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की चिंताओं का निवारण करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मानसून सत्र के दौरान पेश इस कड़े विधेयक के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि भविष्य में किसी भी माफिया या संगठित गिरोह को देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या विपक्ष किरेन रिजिजू और सरकार की इस अपील को स्वीकार करते हुए सदन में सार्थक चर्चा में भाग लेता है या फिर पेपर लीक जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर राजनीतिक बयानबाजी और गतिरोध का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।






