संसद मार्ग पर हिंसक हमले के बीच जांबाज अफसरों की बहादुरी: DCP विनीत कुमार की त्वरित सूझबूझ से बची ACP विवेक भगत की जान

संवाद 24 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के लुटियंस जोन में विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। हालांकि, जब प्रदर्शन हिंसक रूप ले ले और अराजक तत्व सीधे कानून के रखवालों पर ही जानलेवा हमला कर दें, तो स्थिति बेहद नाजुक हो जाती है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला वाकया बीते बुधवार की रात संसद मार्ग और टॉलस्टॉय मार्ग चौराहे के पास सामने आया, जहां सुरक्षा में मुस्तैद एसीपी (ACP) विवेक भगत उपद्रवियों की हिंसक भीड़ के हत्थे चढ़ गए। लेकिन मौके पर मौजूद डीसीपी विनीत कुमार और उनकी जांबाज टीम की त्वरित रणनीति और बहादुरी ने एक बड़ा हादसा होने से टाल दिया और गंभीर रूप से घायल एसीपी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

जब उपद्रवियों ने बोला जानलेवा हमला
मिली जानकारी के अनुसार, एसीपी विवेक भगत जंतर-मंतर क्षेत्र (सेक्टर-एक, जोन-एक) में शाम की गश्त पर तैनात थे। उनके साथ प्रोबेशनर एसीपी रोहित, ऑपरेटर नवनीत और छह अन्य पुलिसकर्मियों की टुकड़ी भी गश्त कर रही थी। जैसे ही पुलिस टीम रीगल बिल्डिंग और संसद मार्ग रेड लाइट के समीप पहुंची, अचानक उग्र भीड़ का रुख हिंसक हो गया। उपद्रवियों ने अचानक एसीपी विवेक भगत और उनके साथ मौजूद जवानों को चारों तरफ से घेर लिया और उन पर हमला बोल दिया। अराजक तत्वों ने एसीपी भगत को जमीन पर गिरा दिया और उनके साथ जमकर मारपीट की। हमले में उनके सिर, चेहरे और पूरे शरीर पर गंभीर चोटें आईं। बाद में अपनी आपबीती बताते हुए एसीपी भगत ने कहा कि यह कोई साधारण विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उपद्रवियों का इरादा पुलिस अधिकारियों को अलग-थलग करके सीधे निशाना बनाना और गंभीर नुकसान पहुंचाना था।

DCP विनीत कुमार की रणनीति और जांबाजी
जब संसद मार्ग चौराहे पर उपद्रवी एसीपी भगत पर लाठी-डंडों और पत्थरों से प्रहार कर रहे थे, ठीक उसी वक्त थोड़ी दूरी पर तैनात डीसीपी (IFSO) विनीत कुमार ने खतरे को भांप लिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने बिना एक पल गंवाए एक्शन लिया। डीसीपी विनीत कुमार ने अपनी टीम – जिसमें एसीपी राजौरी गार्डन शरद चंद्र निर्मल, हवलदार राहुल और सिपाही दीपक शामिल थे—के साथ उपद्रवियों की ओर रुख किया। उपद्रवियों के चंगुल से घायल अधिकारी को छुड़ाने के लिए पुलिस टीम ने तुरंत सीमित लाठीचार्ज का सहारा लिया। अचानक हुए इस बल प्रयोग से उपद्रवी पीछे हटने पर मजबूर हो गए। जैसे ही उपद्रवी पीछे हटे, डीसीपी और उनकी टीम ने जमीन पर पड़े खून से लथपथ एसीपी विवेक भगत को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया।

सुरक्षा घेरा बनाकर अस्पताल पहुंचाया
डीसीपी विनीत कुमार ने न केवल त्वरित एक्शन लिया, बल्कि बेहद चतुराई से आगे की रणनीति भी बनाई। उन्होंने तुरंत रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टुकड़ी को आगे पथराव कर रहे उपद्रवियों का मोर्चा संभालने का निर्देश दिया। इसके बाद डीसीपी और उनकी टीम ने खुद मानव ढाल (Human Shield) बनकर घायल एसीपी को चारों तरफ से ढका और सुरक्षित स्थान तक खींचकर ले आए। तत्पश्चात, उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

संयम और मुस्तैदी का उदाहरण
इस पूरी घटना में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने अत्यधिक संयम और असाधारण साहस का परिचय दिया। उग्र और उकसावे वाली भीड़ के बीच भी अधिकारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर अपने साथी की जान बचाई और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह टूटने नहीं दिया। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने डीसीपी विनीत कुमार और उनकी पूरी टीम के इस त्वरित निर्णय और जांबाजी की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। पुलिस प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि हिंसा फैलाने और कानून को हाथ में लेने वाले उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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