
संवाद 24 नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ने से मौसम वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। इस वर्ष मानसून की प्रगति सामान्य गति से पीछे चल रही है और पिछले 25 वर्षों में यह 14वीं बार है जब मानसून के विस्तार में इतना लंबा ठहराव देखने को मिला है। मौसम विभाग का मानना है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति इसका प्रमुख कारण बन सकती है, जिसका असर आने वाले दिनों में वर्षा के वितरण पर भी दिखाई दे सकता है।
खेती और किसानों पर बढ़ा संकट
मानसून की धीमी चाल का सबसे अधिक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। कई राज्यों में किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। यदि आने वाले दिनों में बारिश सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या है अल नीनो का प्रभाव?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इससे वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं। हालांकि हर अल नीनो वर्ष में सूखे जैसी स्थिति नहीं बनती, लेकिन सामान्य से कम वर्षा की संभावना बढ़ जाती है।
मौसम विभाग ने जताई राहत की उम्मीद
भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि मानसून पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। वातावरण में बदलाव के साथ आगामी दिनों में वर्षा गतिविधियों में तेजी आने की संभावना बनी हुई है। कई हिस्सों में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान भी जारी किया गया है, जिससे खेती को राहत मिलने की उम्मीद है।
जल संकट और महंगाई की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्षा में कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो जलाशयों के जलस्तर, पेयजल उपलब्धता और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है। साथ ही खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होने पर बाजार में महंगाई बढ़ने की आशंका भी रहेगी।
किसानों के लिए विशेषज्ञों की सलाह
कृषि वैज्ञानिक किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार फसलों का चयन करने, कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता देने तथा वर्षा जल संरक्षण और वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं ताकि मौसम की अनिश्चितता का प्रभाव कम किया जा सके।
अगले कुछ दिन होंगे निर्णायक
फिलहाल पूरे देश की निगाहें मानसून की अगली प्रगति पर टिकी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में मानसून फिर सक्रिय होता है तो खेती, जल संसाधनों और आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं मौसम विभाग ने लोगों से केवल आधिकारिक मौसम संबंधी जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।






