
संवाद 24 हरियाणा। फरीदाबाद में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक पुलिस थाने के मालखाने से 32 लाइसेंसी हथियार गायब पाए जाने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में हथियार रिकॉर्ड और मालखाने में मौजूद हथियारों की संख्या में बड़ा अंतर सामने आने के बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
मिलान के दौरान सामने आई बड़ी गड़बड़ी
जानकारी के अनुसार, नियमित रिकॉर्ड सत्यापन और मालखाने के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि दस्तावेजों में दर्ज कई लाइसेंसी हथियार मालखाने में मौजूद नहीं हैं। इसके बाद पूरे रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराई गई, जिसमें कुल 32 हथियारों के गायब होने की पुष्टि हुई। इस खुलासे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू कर दी गई।
जांच के दायरे में रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए। जांच दल मालखाने के पुराने रिकॉर्ड, जब्ती रजिस्टर, जमा और निकासी से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पुलिस थाने के मालखाने से बड़ी संख्या में हथियार गायब होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब्त या जमा हथियारों की नियमित जांच और डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था मजबूत होना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच पूरी होने तक संबंधित रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं हथियारों को रिकॉर्ड में दर्ज करने या सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में कोई चूक तो नहीं हुई।
जांच पूरी होने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता गायब हथियारों का पता लगाने और पूरी घटना की सच्चाई सामने लाने की है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है, रिकॉर्ड में गड़बड़ी का या किसी अन्य कारण से हथियार गायब हुए। यदि किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग की जवाबदेही और मालखानों में रखे हथियारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई है, जिससे यह साफ हो सके कि आखिर 32 लाइसेंसी हथियार कहां और कैसे गायब हुए।






