
संवाद 24 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली से एक बड़ी सुरक्षा कामयाबी सामने आई है, जहां पुलिस ने ISIS से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी लकी अहमद को रोहिणी इलाके से गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, जिसने संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को गुप्त सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति आतंकी संगठन ISIS से जुड़ा हुआ है और राजधानी में सक्रिय है। इसी इनपुट के आधार पर टीम ने रोहिणी इलाके में जाल बिछाया और आरोपी को दबोच लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी की गतिविधियां काफी समय से संदिग्ध थीं और उस पर नजर रखी जा रही थी। जैसे ही उसकी लोकेशन कन्फर्म हुई, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
क्या था आतंकी कनेक्शन?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी का संबंध आतंकी संगठन Islamic State (ISIS) से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह किसी बड़े हमले की साजिश में शामिल था या सिर्फ नेटवर्क का हिस्सा था। भारत में पहले भी ISIS से जुड़े कई मॉड्यूल पकड़े जा चुके हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऐसे आरोपी अक्सर ऑनलाइन माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर नेटवर्क से जुड़ते हैं।
जांच एजेंसियां सतर्क
गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं और आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उसके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे और क्या कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
आमतौर पर ऐसे मामलों में National Investigation Agency (NIA) और अन्य एजेंसियां भी शामिल होती हैं, ताकि पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में पहले भी ISIS से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कई मामलों में हथियार, गोला-बारूद और संदिग्ध डिजिटल सामग्री भी बरामद हुई है, जिससे यह साफ होता है कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं और ऐसे नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं।
क्या बड़ा खतरा टल गया?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि आरोपी किसी बड़े हमले की तैयारी में था या नहीं, लेकिन उसकी गिरफ्तारी से एक संभावित खतरा जरूर टल गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समय पर कार्रवाई से न सिर्फ बड़े हमलों को रोका जा सकता है, बल्कि आतंकी संगठनों के नेटवर्क को भी कमजोर किया जा सकता है।
आगे क्या?
अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह एक अकेला मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा आतंकी नेटवर्क काम कर रहा था। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।






