
संवाद 24 नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर में आतंकी ढांचे को हुए नुकसान के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैएबा एक बार फिर उकसावे पर उतर आया है। संगठन के शीर्ष कमांडर अबू मूसा कश्मीरी ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास रावलकोट क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा के दौरान भारत और हिंदू समुदाय के खिलाफ खुलेआम नफरत भरा भाषण दिया।
सभा में मूसा ने कहा कि “आजादी भीख से नहीं, गर्दनें काटने से मिलेगी,” और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का आह्वान किया। यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही सीमा पार गतिविधियों को लेकर हाई अलर्ट पर हैं।
खुफिया एजेंसियां सतर्क
सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के उकसाऊ भाषणों को सुरक्षा एजेंसियां गंभीर चेतावनी संकेत मानती हैं। अतीत में भी ऐसे बयान आतंकी हमलों से ठीक पहले सामने आए हैं। एजेंसियों का कहना है कि रावलकोट में दिया गया यह भाषण संभावित साजिशों की ओर इशारा करता है।
बहावलपुर में शीर्ष कमांडरों की हलचल
इसी बीच, बहावलपुर में लश्कर के अन्य वरिष्ठ कमांडरों की बैठक और उनकी तस्वीरें सामने आई हैं। यह गतिविधियां हाल के घटनाक्रमों और पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के कड़े बयानों के साथ मेल खाती दिखाई दे रही हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकी ढांचे पर करारा प्रहार
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत कड़ा जवाब दिया था। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के भीतर मुरीदके, बहावलपुर, कोटली और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद समेत नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत ने शुरुआती कार्रवाई में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया, लेकिन सीमा पार से हमलों के बाद जवाबी कदम उठाए गए।
बढ़ता खतरा, कड़ा संदेश
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर से आतंकी नेटवर्क को गहरा झटका लगा है और इसी हताशा में भड़काऊ बयानबाजी तेज हुई है। भारत की एजेंसियां स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी विकल्प खुले रखे गए हैं।
रावलकोट में दिया गया यह बयान न केवल सीमा पार आतंकी मंसूबों की झलक देता है, बल्कि यह भी साफ करता है कि आतंक के खिलाफ भारत की कार्रवाई से आतंकी संगठनों में बेचैनी बढ़ी है।






