
संवाद 24 डेस्क उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राजकीय आयुष चिकित्सा संस्थानों से संबंधित पाठ्यक्रमों की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के अनिवार्य प्रशिक्षण भत्ते को बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रतिमाह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे पहले इन विद्यार्थियों को हर महीने 7,500 रुपये मिलते थे। नई दर के अनुसार भत्ते में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस फैसले से प्रदेश के 1,714 प्रशिक्षु चिकित्सकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण भत्ते में वृद्धि लंबे समय से महत्वपूर्ण मांग रही है। विद्यार्थियों का कहना था कि अनिवार्य प्रशिक्षण के दौरान अस्पतालों में नियमित जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें मिलने वाली राशि मौजूदा खर्चों के लिहाज से कम थी। प्रशिक्षण के दौरान आवागमन, भोजन, रहने और अन्य आवश्यकताओं पर भी खर्च करना पड़ता है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मुद्दे पर आयुष के प्रशिक्षु चिकित्सकों ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किए और अपनी मांग सरकार तक पहुंचाई थी। ऐसे में भत्ते को दोगुना करने का निर्णय विद्यार्थियों के लिए आर्थिक राहत के साथ उनकी मांग पर सकारात्मक कार्रवाई के रूप में भी देखा जा रहा है।
सरकार के इस निर्णय का महत्व इसलिए भी है क्योंकि चिकित्सा शिक्षा में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण की भूमिका बेहद अहम होती है। विद्यार्थियों को अस्पतालों में मरीजों के बीच काम करते हुए अपने ज्ञान और कौशल को विकसित करना पड़ता है। इस दौरान उचित आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।
एमबीबीएस और आयुष भत्ते के बीच का अंतर कम करने का प्रयास
लंबे समय से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में यह बहस का विषय रहा है कि एलोपैथिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न भत्तों में काफी बड़ा अंतर था। जहां एमबीबीएस इंटर्न को तुलनात्मक रूप से अधिक भत्ता मिलता रहा है, वहीं आयुष इंटर्न को सीमित राशि से ही संतोष करना पड़ता था। हालांकि कार्य के घंटे, रोगियों की देखभाल और आपातकालीन सेवाओं में उनकी सहभागिता लगभग समान रहती है।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय इस असमानता को पूरी तरह समाप्त न सही, लेकिन काफी हद तक कम करने की दिशा में एक बहुत बड़ा सार्थक कदम है। आयुष चिकित्सकों के संघों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम आयुष चिकित्सा पद्धतियों के विद्यार्थियों को आत्मसम्मान प्रदान करता है। इससे न केवल उनकी वित्तीय निर्भरता कम होगी, बल्कि उन्हें अपनी एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान बेहतर शोध और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का प्रोत्साहन भी मिलेगा।
क्या है बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस इंटर्नशिप का ढांचा?
भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में स्नातक की डिग्री पूरी करने के लिए साढ़े चार साल की शैक्षणिक पढ़ाई के बाद एक साल की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप करनी होती है।
बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी): इसमें विद्यार्थियों को आयुर्वेद की विभिन्न शाखाओं जैसे शल्य तंत्र, शालाक्य तंत्र, पंचकर्म और कायचिकित्सा के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा के बुनियादी सिद्धांतों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
बीएचएमएस (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी): इसमें होम्योपैथिक औषधियों के प्रभाव, केस टेकिंग और पुरानी तथा जटिल बीमारियों के समाधान का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है।
बीयूएमएस (बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी): इसमें यूनानी चिकित्सा पद्धति के मूल सिद्धांतों, इलाज-बिल-तदबीर और यूनानी औषधियों द्वारा मरीजों के इलाज की विधि सिखाई जाती है।
इस एक वर्ष की अवधि में इंटर्न चिकित्सक पूरी तरह से अस्पताल प्रबंधन, आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी), इन पेशेंट विभाग (आईपीडी) और ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों से जुड़े रहते हैं। ऐसे में 15,000 रुपये का संशोधित भत्ता उन्हें बिना किसी आर्थिक तनाव के अपने कौशल को निखारने में मदद करेगा।
प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे पर इस फैसले का दूरगामी प्रभाव
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना एक बड़ी चुनौती रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आयुष चिकित्सक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
मानदेय में इस बढ़ोतरी से आयुष क्षेत्र के मेधावी छात्र अधिक निष्ठा के साथ सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवा देने के लिए प्रेरित होंगे। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में डॉक्टरों की कमी की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। साथ ही, प्राथमिक स्तर पर मरीजों को आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के माध्यम से किफायती और प्रभावी इलाज मिल सकेगा। यह कदम राज्य में ‘एकीकृत स्वास्थ्य सेवा मॉडल’ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
युवाओं का आयुष चिकित्सा के प्रति बढ़ता रुझान
बीते कुछ वर्षों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आयुष पद्धतियों के प्रति का रुझान तेजी से बढ़ा है। कोरोना काल के बाद से प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की प्रासंगिकता पूरी दुनिया में स्वीकार की गई है।
जब राज्य सरकारें आयुष शिक्षा और उसके इंटर्नशिप ढांचे को वित्तीय सहायता देकर मजबूत करती हैं, तो राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच आयुष पाठ्यक्रमों का आकर्षण बढ़ता है। पहले कई मेधावी छात्र कम भत्ते और अनिश्चित भविष्य के कारण आयुष पाठ्यक्रमों को चुनने में संकोच करते थे। लेकिन अब मानदेय में सुधार और बुनियादी ढांचे के विकास से आयुष पाठ्यक्रमों की साख में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा रही है।
भावी डॉक्टरों में उत्साह की लहर और भावी अपेक्षाएं
सरकार के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के विभिन्न राजकीय आयुर्वेद, होम्योपैथिक और यूनानी मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत हजारों छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों के परिसरों में इस फैसले का स्वागत किया गया है।
विद्यार्थियों का कहना है कि यह निर्णय उनकी कड़ी मेहनत और रात-दिन की ड्यूटी की मान्यता है। इसके साथ ही, कई छात्र संगठनों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में आयुष डॉक्टरों के स्थायी पदों पर भर्ती प्रक्रियाओं को भी इसी तरह गति दी जाएगी और उनके करियर ग्राफ को और बेहतर बनाने के लिए नियमित नीतियां बनाई जाएंगी।
एक समृद्ध और स्वस्थ उत्तर प्रदेश की ओर कदम
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयुष इंटर्न भत्ते को 7,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह करना केवल एक बजटीय आवंटन नहीं है, बल्कि यह राज्य की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों के पुनरुत्थान की दिशा में लिया गया एक ठोस और दूरदर्शी फैसला है।
यह कदम आयुष इंटर्न चिकित्सकों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा, उन्हें समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देगा और राज्य की समग्र स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था को नई गहराई प्रदान करेगा। पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक प्रशासनिक प्राथमिकताओं के इस संतुलन से निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश एक स्वस्थ, समर्थ और समृद्ध राज्य के रूप में उभरने में सफल होगा।






