
संवाद 24 डेस्क। ऑनलाइन शिक्षा अब केवल दूर-दराज के विद्यार्थियों के लिए विकल्प भर नहीं रह गई है, बल्कि उच्च शिक्षा और रोजगारपरक कौशल हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है। हालांकि देशभर में ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की मांग एक जैसी नहीं है। अलग-अलग राज्यों के विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, रोजगार की संभावनाओं और स्थानीय जरूरतों के अनुसार अलग-अलग विषयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ताजा आंकड़ों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों में सॉफ्ट स्किल और गैर-तकनीकी पाठ्यक्रमों की मांग दिखाई देती है, जबकि दिल्ली में प्रबंधन, कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग तथा दक्षिण भारतीय राज्यों में STEM विषयों का रुझान मजबूत है।
एक देश, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई की पसंद अलग-अलग क्यों?
ऑनलाइन उच्च शिक्षा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लचीलापन और विषयों की व्यापक उपलब्धता है। विद्यार्थी अपने शहर या कॉलेज में उपलब्ध पाठ्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय देश के शीर्ष संस्थानों और विशेषज्ञों द्वारा तैयार ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में विद्यार्थियों की प्राथमिकताएं भी स्थानीय रोजगार बाजार और भविष्य की करियर जरूरतों के अनुरूप दिखाई दे रही हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की Technology Enabled Learning संबंधी रिपोर्ट में भी SWAYAM Plus के विद्यार्थियों के बीच क्षेत्रीय और शहरी-गैर-शहरी पसंद में अंतर दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक मेट्रो शहरों के विद्यार्थियों में डिजिटल और उभरती तकनीकों की तुलना में कुछ तकनीकी क्षेत्रों की मजबूत प्राथमिकता है, जबकि गैर-मेट्रो विद्यार्थियों में Media, Communication और Soft Skills प्रमुख पसंद के रूप में उभरे हैं।
यूपी और आसपास के राज्यों में सॉफ्ट स्किल पर जोर
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के युवाओं में गैर-तकनीकी पाठ्यक्रमों, विशेषकर सॉफ्ट स्किल से जुड़े पाठ्यक्रमों की मांग उल्लेखनीय है। इसका संबंध रोजगार के लिए जरूरी संचार क्षमता, व्यक्तित्व विकास, टीमवर्क और कार्यस्थल पर प्रभावी व्यवहार जैसी क्षमताओं से जोड़ा जा सकता है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार इन राज्यों में ऑनलाइन शिक्षा के जरिए ऐसे कौशल हासिल करने की रुचि दिखाई दे रही है।
उत्तर प्रदेश के आंकड़े भी इस बदलती तस्वीर को समझने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य से कुल 5.17 लाख नामांकन दर्ज हुए, जिनमें करीब 3.50 लाख पुरुष और 1.67 लाख महिला विद्यार्थी शामिल हैं। गैर-तकनीकी पाठ्यक्रमों में उत्तर प्रदेश लगभग 1.96 लाख नामांकन के साथ प्रमुख राज्यों में शामिल रहा।
यह रुझान इस बात का संकेत हो सकता है कि ऑनलाइन शिक्षा का इस्तेमाल केवल डिग्री हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि रोजगार के लिए अतिरिक्त कौशल विकसित करने के साधन के तौर पर भी किया जा रहा है।
दिल्ली में प्रबंधन और कंप्यूटर साइंस पहली पसंद
राजधानी दिल्ली में तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। यहां विद्यार्थियों का झुकाव प्रबंधन, कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों की ओर अधिक है। ऐसे विषय सीधे करियर और उद्योग की जरूरतों से जुड़े हैं और महानगरों में मौजूद रोजगार के अवसर भी इन पाठ्यक्रमों की मांग को प्रभावित कर सकते हैं।
इससे यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऑनलाइन शिक्षा की लोकप्रियता को केवल तकनीकी सुविधा के आधार पर नहीं देखा जा सकता। विद्यार्थी यह भी देखते हैं कि कोई पाठ्यक्रम उनके करियर लक्ष्य और रोजगार की संभावनाओं में कितना उपयोगी साबित हो सकता है।
दक्षिण भारत में STEM की मजबूत पकड़
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित यानी STEM से जुड़े पाठ्यक्रमों का रुझान अपेक्षाकृत मजबूत है। विशेष रूप से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग से संबंधित ऑनलाइन शिक्षा इन राज्यों में विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय दिखाई देती है।
तकनीकी पाठ्यक्रमों में तमिलनाडु करीब 11.88 लाख नामांकन के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद आंध्र प्रदेश लगभग 7.70 लाख, महाराष्ट्र 5.82 लाख, कर्नाटक 3.97 लाख और तेलंगाना 3.75 लाख नामांकन के साथ प्रमुख राज्यों में रहे।
कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की हिस्सेदारी के आंकड़े भी दक्षिण भारत के तकनीकी झुकाव को सामने रखते हैं। रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश में STEM के अंतर्गत कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग का हिस्सा 74.1 प्रतिशत, तेलंगाना में 69 प्रतिशत, कर्नाटक में 58 प्रतिशत और तमिलनाडु में 55.1 प्रतिशत बताया गया है।
क्लाउड कंप्यूटिंग और Python क्यों बन रहे हैं पसंदीदा?
तकनीकी पाठ्यक्रमों में केवल पारंपरिक इंजीनियरिंग विषय ही लोकप्रिय नहीं हैं। बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ क्लाउड कंप्यूटिंग और Python जैसे कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी विद्यार्थियों को आकर्षित कर रहे हैं। रिपोर्ट में तकनीकी पाठ्यक्रमों के बीच इन दोनों को विशेष रूप से लोकप्रिय बताया गया है।
इस बदलाव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि उद्योग में डेटा, सॉफ्टवेयर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमेशन और AI से जुड़े कौशल की मांग बढ़ रही है। ऐसे में विद्यार्थी पारंपरिक डिग्री के साथ अतिरिक्त ऑनलाइन प्रमाणपत्र या कौशल पाठ्यक्रम के जरिए अपने रोजगार अवसर मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
92.98 लाख नामांकन ने दिखाया ऑनलाइन शिक्षा का विस्तार
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025 में ऑनलाइन शिक्षा के संबंधित पाठ्यक्रमों में कुल 92.98 लाख नामांकन दर्ज किए गए। इनमें लगभग 49.9 लाख नामांकन तकनीकी पाठ्यक्रमों में, 28.3 लाख गैर-तकनीकी विषयों में और 5.6 लाख बहुविषयक पाठ्यक्रमों में बताए गए हैं।
यह संख्या ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते दायरे का संकेत देती है। हालांकि नामांकन की संख्या को विद्यार्थियों की वास्तविक पूर्णता या प्रमाणन के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। किसी पाठ्यक्रम में पंजीकरण करना और उसे सफलतापूर्वक पूरा करके प्रमाणपत्र प्राप्त करना अलग-अलग बातें हैं।
SWAYAM ने बदला ऑनलाइन सीखने का तरीका
भारत में ऑनलाइन उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने में सरकार का SWAYAM प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह शिक्षा मंत्रालय की पहल है, जिसमें देश के विभिन्न राष्ट्रीय समन्वयक संस्थानों के माध्यम से पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें AICTE, NPTEL, UGC, CEC, IGNOU, IIM Bangalore, NCERT, NIOS और NITTTR जैसे संस्थान शामिल हैं।
SWAYAM पर विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों में पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं और कुछ पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षा तथा प्रमाणन की व्यवस्था भी है। प्लेटफॉर्म की आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्तमान में 16,000 से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और लगभग 5.99 करोड़ विद्यार्थी नामांकन दर्ज कर चुके हैं।
इस प्लेटफॉर्म की एक अहम विशेषता यह है कि SWAYAM के पाठ्यक्रमों से प्राप्त क्रेडिट को विश्वविद्यालयों में डिग्री के साथ जोड़े जाने की व्यवस्था भी है, जहां संबंधित संस्थान और नियम इसकी अनुमति देते हैं।
SWAYAM Plus में रोजगारपरक शिक्षा पर फोकस
ऑनलाइन शिक्षा का अगला महत्वपूर्ण चरण केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं है। SWAYAM Plus को उद्योग से जुड़े कौशल और रोजगारपरक शिक्षा पर केंद्रित किया गया है। शिक्षा मंत्रालय की पहल और IIT मद्रास के कार्यान्वयन वाले इस प्लेटफॉर्म पर उद्योग-अनुकूल पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार SWAYAM Plus पर 500 से अधिक पाठ्यक्रम, 78 उद्योग साझेदार और 12 भारतीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध है तथा 6.14 लाख से अधिक विद्यार्थियों का आधार बताया गया है।
यह मॉडल उच्च शिक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करता है। अब विद्यार्थी केवल परीक्षा पास करने के लिए विषय नहीं पढ़ना चाहते, बल्कि ऐसे कौशल भी हासिल करना चाहते हैं जिन्हें नौकरी और कार्यस्थल पर सीधे इस्तेमाल किया जा सके।
महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण संकेत
ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच का एक महत्वपूर्ण पहलू लैंगिक भागीदारी भी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025 से अब तक 92.98 लाख विद्यार्थियों के नामांकन में 44.2 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं।
ऑनलाइन माध्यम महिलाओं और उन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है जिन्हें किसी कारण से नियमित कक्षा में लगातार उपस्थित होना कठिन लगता है। घर से सीखने की सुविधा, समय की लचीलापन और विविध पाठ्यक्रमों की उपलब्धता इस माध्यम को अधिक समावेशी बना सकती है। हालांकि डिजिटल डिवाइस, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण की उपलब्धता अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।
क्षेत्रीय पसंद शिक्षा नीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
राज्यवार अलग-अलग पसंद केवल विद्यार्थियों की रुचि का आंकड़ा नहीं है। यह शिक्षा नीति और कौशल विकास के लिए भी उपयोगी संकेत दे सकता है। यदि किसी क्षेत्र में तकनीकी कौशल की मांग अधिक है, तो वहां उद्योग से जुड़े उन्नत पाठ्यक्रम और प्रयोगात्मक प्रशिक्षण बढ़ाए जा सकते हैं। वहीं जहां सॉफ्ट स्किल की मांग अधिक है, वहां भाषा, संचार, व्यक्तित्व विकास और रोजगार तैयारी के पाठ्यक्रमों को मजबूत किया जा सकता है।
भारत में उच्च शिक्षा के स्तर पर राज्यों के बीच व्यापक अंतर पहले से मौजूद हैं। हालिया उच्च शिक्षा आंकड़ों पर आधारित विश्लेषणों में भी सकल नामांकन अनुपात और उच्च शिक्षा तक पहुंच में राज्यों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा इस अंतर को कम करने का एक माध्यम बन सकती है, बशर्ते डिजिटल पहुंच और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित हों।
भविष्य की ऑनलाइन शिक्षा होगी अधिक व्यक्तिगत
ऑनलाइन उच्च शिक्षा में राज्यों के बीच दिखाई दे रहा यह अंतर बताता है कि भारतीय विद्यार्थी एक समान शैक्षणिक जरूरत नहीं रखते। उत्तर भारत के कुछ राज्यों में सॉफ्ट स्किल, दिल्ली में प्रबंधन और कंप्यूटर साइंस तथा दक्षिण भारत में STEM और तकनीकी पाठ्यक्रमों की मजबूत मांग इसका उदाहरण है।
आने वाले समय में ऑनलाइन शिक्षा का सबसे बड़ा अवसर यही हो सकता है कि विद्यार्थी अपनी जरूरत के अनुसार विषय चुनें और पारंपरिक डिग्री के साथ रोजगारपरक कौशल भी हासिल करें। SWAYAM और SWAYAM Plus जैसे प्लेटफॉर्म इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहे हैं।
लेकिन असली सफलता केवल लाखों नामांकन दर्ज होने में नहीं होगी। चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि विद्यार्थी पाठ्यक्रम पूरा करें, वास्तविक कौशल हासिल करें और उन कौशलों को आगे की शिक्षा या रोजगार में उपयोग कर सकें। ऑनलाइन शिक्षा का अगला दौर संख्या बढ़ाने से ज्यादा विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरत और करियर लक्ष्य के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का होगा।






