माल ढुलाई की बदल जाएगी तस्वीर! तीन नए लॉजिस्टिक हब पर 2,870 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना

संवाद 24 डेस्क। भारत में सड़क, रेल और अन्य परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। देश के तीन प्रमुख शहरों पटना, नासिक और हैदराबाद—में नए बहुविध परिवहन लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने की तैयारी है। इन तीनों परियोजनाओं पर लगभग 2,870 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना बताई गई है। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार तीनों परियोजनाओं की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर स्वीकृति के लिए सरकार के पास भेजी जा चुकी है। मंजूरी मिलने के बाद निविदा और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

तीन शहर, तीन परियोजनाएं और 2,870 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
प्रस्तावित तीन लॉजिस्टिक पार्कों में पटना, हैदराबाद और नासिक को शामिल किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार पटना में करीब 870 करोड़ रुपये, हैदराबाद में लगभग 1,300 करोड़ रुपये और नासिक में करीब 700 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। तीनों परियोजनाओं की प्रस्तावित लागत जोड़ने पर कुल राशि लगभग 2,870 करोड़ रुपये बैठती है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल माल रखने के लिए बड़े भंडारण केंद्र तैयार करना नहीं है। बहुविध परिवहन लॉजिस्टिक पार्क की अवधारणा में सड़क और रेल सहित परिवहन के विभिन्न साधनों को एकीकृत करने, माल के भंडारण, छंटाई, लदान और उतारने जैसी गतिविधियों को एक स्थान पर व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाता है। इससे लंबी दूरी की माल ढुलाई को अधिक संगठित बनाने में मदद मिल सकती है।

पटना में 103 एकड़ में बनेगा प्रस्तावित पार्क
तीनों परियोजनाओं में पटना का प्रस्तावित लॉजिस्टिक पार्क करीब 103 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाने की योजना है। इसके निर्माण पर लगभग 870 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पटना पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण परिवहन और व्यापारिक केंद्र है। ऐसे में यहां आधुनिक लॉजिस्टिक सुविधा विकसित होने से आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले माल की आवाजाही को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। बिहार की भौगोलिक स्थिति को देखें तो राज्य पूर्वी और उत्तरी भारत के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पटना से सड़क मार्ग के माध्यम से राज्य के विभिन्न हिस्सों के अलावा पड़ोसी राज्यों तक माल पहुंचाया जाता है। ऐसे में संगठित भंडारण और माल स्थानांतरण की सुविधा परिवहन व्यवस्था के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि किसी भी परियोजना का वास्तविक प्रभाव उसके निर्माण की गुणवत्ता, संपर्क मार्गों, माल की मांग और संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा। इसलिए प्रस्तावित पार्क से मिलने वाले लाभों का आकलन केवल निवेश राशि देखकर नहीं किया जा सकता।

हैदराबाद में सबसे बड़ा प्रस्तावित पार्क
तीनों प्रस्तावित परियोजनाओं में सबसे अधिक निवेश हैदराबाद की परियोजना में होने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां करीब 1,300 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 156 एकड़ क्षेत्र में लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने की योजना है। क्षेत्रफल और अनुमानित निवेश दोनों के लिहाज से यह तीनों में सबसे बड़ा प्रस्तावित पार्क है। हैदराबाद तेलंगाना का प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और प्रौद्योगिकी केंद्र है। शहर का संपर्क दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से सड़क और रेल मार्गों के माध्यम से है। इसके आसपास औद्योगिक उत्पादन और उपभोक्ता बाजार का बड़ा आधार है। ऐसे में आधुनिक माल प्रबंधन सुविधा विकसित होने पर उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को माल के आवागमन के लिए अतिरिक्त आधारभूत ढांचा मिल सकता है। लेकिन यहां भी परियोजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे प्रमुख राजमार्गों, रेल संपर्क और औद्योगिक क्षेत्रों से किस प्रकार जोड़ा जाता है। लॉजिस्टिक पार्क का प्रभाव केवल उसकी चारदीवारी के भीतर उपलब्ध सुविधाओं से नहीं, बल्कि उसके बाहरी परिवहन नेटवर्क से भी तय होता है।

नासिक में 123 एकड़ में बनेगा पार्क
महाराष्ट्र के नासिक में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 123 एकड़ क्षेत्र में लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने की योजना है। तीनों परियोजनाओं में अनुमानित निवेश के मामले में नासिक की परियोजना तीसरे स्थान पर है, लेकिन पश्चिमी भारत के औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क में इसकी स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। नासिक का संपर्क महाराष्ट्र के कई औद्योगिक क्षेत्रों से है और यह मुंबई-पुणे सहित पश्चिमी भारत के बड़े बाजारों से जुड़ा हुआ है। ऐसे क्षेत्र में व्यवस्थित भंडारण और माल वितरण की सुविधाएं विकसित होने से कंपनियों के लिए माल को विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। यहां भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी परियोजना निर्माण के स्तर पर नहीं पहुंची है। अंतिम स्वीकृति, निविदा, निर्माण और उसके बाद संचालन—इन सभी चरणों को पूरा करना होगा।

सरकार की मंजूरी के बाद शुरू होगी अगली प्रक्रिया
इन तीनों परियोजनाओं को लेकर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण चरण सरकारी स्वीकृति का है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार परियोजनाओं की अंतिम रिपोर्ट तैयार करके सरकार को भेजी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद निविदा प्रक्रिया शुरू होगी और इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा। इसका अर्थ यह है कि 2,870 करोड़ रुपये का आंकड़ा फिलहाल प्रस्तावित निवेश से संबंधित है। इसे तत्काल खर्च की गई राशि या पूरी तरह सुनिश्चित निवेश के रूप में देखना उचित नहीं होगा। परियोजना के प्रत्येक चरण में प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होना आवश्यक है।
यही कारण है कि ऐसी आधारभूत परियोजनाओं की खबरों में प्रस्तावित निवेश और वास्तविक निवेश के बीच अंतर समझना जरूरी है। जमीन, निर्माण, संपर्क मार्ग, सुविधाओं और संचालन व्यवस्था पर होने वाला खर्च परियोजना की प्रगति के साथ स्पष्ट होता है।

आखिर क्या होता है बहुविध परिवहन लॉजिस्टिक पार्क?
बहुविध परिवहन लॉजिस्टिक पार्क ऐसी व्यवस्था है जहां माल की आवाजाही के लिए अलग-अलग परिवहन साधनों को एक दूसरे से जोड़ा जाता है। सामान्य तौर पर इसमें सड़क और रेल परिवहन का समन्वय प्रमुख होता है। इसके साथ भंडारण, माल की छंटाई, पैकेजिंग, वितरण और अन्य सहायक सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं। इसका मूल उद्देश्य यह है कि माल को एक परिवहन साधन से दूसरे साधन में स्थानांतरित करने में कम समय और कम संसाधन लगे। उदाहरण के लिए किसी कारखाने से निकलने वाला माल पहले सड़क मार्ग से लॉजिस्टिक पार्क तक पहुंच सकता है और वहां से लंबी दूरी की यात्रा के लिए रेल मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी व्यवस्था सफल होने पर सड़क पर लंबी दूरी तक भारी माल ढोने वाले वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही माल के परिवहन की योजना अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

देश में पहले से चल रही है बड़ी लॉजिस्टिक योजना
केंद्र सरकार देशभर में बहुविध परिवहन लॉजिस्टिक पार्कों के विकास को व्यापक आधारभूत ढांचे की रणनीति का हिस्सा मानती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अप्रैल 2025 की जानकारी के अनुसार देश में 35 स्थानों पर ऐसे पार्कों के विकास को मंजूरी दी गई थी। इनमें जोगीघोपा, चेन्नई, बेंगलुरु, नागपुर और इंदौर में पांच परियोजनाएं विकास के चरण में थीं। सरकार के अनुसार इन पार्कों का उद्देश्य लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाना और माल ढुलाई की लागत कम करने में मदद करना है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और प्रधानमंत्री गतिशक्ति जैसी व्यापक पहलों के साथ भी जुड़ी हुई है। इससे स्पष्ट होता है कि पटना, हैदराबाद और नासिक की प्रस्तावित परियोजनाएं किसी अलग-थलग योजना का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि देश में माल परिवहन के ढांचे को अधिक एकीकृत बनाने की व्यापक दिशा से जुड़ी हैं।

माल ढुलाई की लागत कम करना क्यों है जरूरी?
भारत में माल ढुलाई की लागत लंबे समय से उद्योग और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण विषय रही है। किसी उत्पाद की अंतिम कीमत तय होने में उत्पादन लागत के साथ परिवहन, भंडारण और वितरण का खर्च भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि माल को कई बार अलग-अलग स्थानों पर उतारना-चढ़ाना पड़े या भंडारण की उचित सुविधा न हो तो समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं। बहुविध परिवहन पार्कों का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित करना है। एक ही स्थान पर परिवहन, भंडारण और माल प्रबंधन की सुविधाएं उपलब्ध होने से कंपनियों को अपने माल की आवाजाही की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि लॉजिस्टिक लागत में वास्तविक कमी कितनी होगी, यह प्रत्येक परियोजना के संचालन, माल की मात्रा और परिवहन नेटवर्क के उपयोग पर निर्भर करेगी। इसलिए इसे निश्चित परिणाम के रूप में नहीं बल्कि अपेक्षित लाभ के रूप में देखना चाहिए।

रेल और सड़क के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
भारत में भारी और लंबी दूरी के माल परिवहन में सड़क तथा रेल दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन दोनों साधनों का उपयोग यदि अलग-अलग और असंगठित तरीके से हो तो माल के स्थानांतरण में अतिरिक्त समय और लागत लग सकती है। लॉजिस्टिक पार्कों की अवधारणा में यही अंतर कम करने का प्रयास किया जाता है। माल को एक जगह एकत्र कर उसके लिए उपयुक्त परिवहन साधन का उपयोग किया जा सकता है। लंबी दूरी के लिए रेल और कम दूरी या अंतिम चरण के लिए सड़क परिवहन का संयोजन एक संभावित मॉडल है। इससे माल परिवहन की क्षमता का बेहतर उपयोग करने की संभावना बनती है। हालांकि इसके लिए पार्क के भीतर ही नहीं, बल्कि आसपास के राजमार्ग और रेल संपर्क को भी पर्याप्त क्षमता वाला बनाना जरूरी होगा।

दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर भी बड़ा विस्तार
इसी रिपोर्ट में दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर वडोदरा-रतलाम खंड के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन विकसित करने की योजना का भी उल्लेख है। करीब 259 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में लिया गया है और इसे 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इससे इस मार्ग पर सालाना लगभग 1.65 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होने की उम्मीद है। यह पहल लॉजिस्टिक पार्कों की अवधारणा से व्यापक अर्थों में जुड़ती है। यदि माल के लिए रेल क्षमता बढ़ती है और दूसरी ओर आधुनिक लॉजिस्टिक केंद्र विकसित होते हैं, तो माल के संग्रहण, स्थानांतरण और लंबी दूरी के परिवहन के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

उद्योग और रोजगार पर क्या हो सकता है असर?
बड़े लॉजिस्टिक पार्क केवल माल रखने की जगह नहीं होते। इनके आसपास भंडारण केंद्र, परिवहन सेवाएं, मरम्मत सुविधाएं, पैकेजिंग इकाइयां, वितरण केंद्र और अन्य सहायक कारोबार विकसित हो सकते हैं। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की संभावना रहती है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर परिवहन, भोजन, रखरखाव, सुरक्षा और अन्य सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है। हालांकि रोजगार की वास्तविक संख्या परियोजना के आकार और संचालन मॉडल पर निर्भर करेगी। इसलिए अभी किसी निश्चित रोजगार आंकड़े का दावा करना जल्दबाजी होगी।

उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों के लिए भी बढ़ रहे अवसर
लॉजिस्टिक ढांचे के विस्तार का प्रभाव केवल उन्हीं शहरों तक सीमित नहीं रहता जहां पार्क बनाए जाते हैं। माल की आवाजाही से जुड़े क्षेत्रीय नेटवर्क में आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों और बाजारों को भी लाभ मिल सकता है।
उत्तर प्रदेश में भी सरकार लॉजिस्टिक और भंडारण क्षेत्र को निवेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल कर रही है। राज्य की आधिकारिक निवेश वेबसाइट के अनुसार राज्य में माल परिवहन की लागत कम करने के लिए बहुविध लॉजिस्टिक पार्क, द्रुत रेल परिवहन, एक्सप्रेसवे और अन्य परिवहन परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। राज्य ने विभिन्न शहरों में लॉजिस्टिक केंद्र विकसित करने की संभावनाएं भी चिन्हित की हैं।
इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में माल परिवहन के लिए एकीकृत ढांचा विकसित करने की प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

केवल पार्क बनाना पर्याप्त नहीं
लॉजिस्टिक पार्क की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि उनका उपयोग कितनी प्रभावी ढंग से होता है। पार्क बन जाने के बाद यदि पर्याप्त माल वहां नहीं आता, रेल या राजमार्ग संपर्क कमजोर रहता है या भंडारण सुविधाओं का उपयोग कम होता है तो अपेक्षित आर्थिक लाभ हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
इसीलिए विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परियोजनाओं में भूमि और निर्माण के साथ-साथ अंतिम छोर तक संपर्क, माल की उपलब्धता, उद्योगों की भागीदारी और संचालन व्यवस्था को भी प्राथमिकता देनी होती है। उत्तर प्रदेश की बहुविध लॉजिस्टिक पार्क नीति पर हालिया विश्लेषण में भी परियोजना के प्रभाव को भूमि आवंटन, वित्तीय समापन, निर्माण, माल संभालने की क्षमता और वास्तविक माल आवागमन जैसे संकेतकों से जोड़कर देखने की आवश्यकता बताई गई है।

आगे की राह पर टिकी है असली तस्वीर
पटना, हैदराबाद और नासिक के प्रस्तावित लॉजिस्टिक पार्क भारत की माल परिवहन व्यवस्था को अधिक संगठित बनाने की दिशा में एक संभावित महत्वपूर्ण कदम हैं। करीब 2,870 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश और कुल 382 एकड़ के आसपास के प्रस्तावित क्षेत्रफल वाली ये तीन परियोजनाएं अपने-अपने क्षेत्र में परिवहन और भंडारण ढांचे को मजबूत करने का अवसर दे सकती हैं। तीनों परियोजनाओं के क्षेत्रफल का योग पटना के 103, हैदराबाद के 156 और नासिक के 123 एकड़ को मिलाकर 382 एकड़ होता है।
लेकिन इस पूरी कहानी का अगला और सबसे महत्वपूर्ण अध्याय सरकारी मंजूरी, निविदा, निर्माण और फिर वास्तविक संचालन से जुड़ा है। इसलिए फिलहाल इन परियोजनाओं को प्रस्तावित और स्वीकृति प्रक्रिया में चल रही योजनाओं के रूप में देखना अधिक तथ्यात्मक होगा।

Geeta Singh
Geeta Singh

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