कानपुर रजिस्ट्री कार्यालय में आयकर विभाग का बड़ा एक्शन: 1000 करोड़ के बैनामों में गड़बड़ी, टैक्स चोरी की आशंका

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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आयकर विभाग ने एक बार फिर रजिस्ट्री कार्यालय पर कड़ी कार्रवाई की है। आयकर विभाग की आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण शाखा (INCI) की टीम ने उपनिबंधक द्वितीय कार्यालय में सर्वे किया, जिसमें करीब 1000 करोड़ रुपये की संपत्ति रजिस्ट्री (बैनामा) में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इन गड़बड़ियों से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई है, जिससे बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को दोपहर में आयकर टीम ने अचानक कार्यालय पहुंचकर तीन घंटे से अधिक समय तक जांच की। इस दौरान सैकड़ों बैनामों की फाइलें खंगाली गईं और बड़े स्तर पर दस्तावेज जब्त किए गए। मुख्य गड़बड़ी रजिस्ट्री कार्यालय द्वारा आयकर विभाग को भेजे जाने वाले वित्तीय लेनदेन विवरण (SFT – Statement of Financial Transactions) में पाई गई। कई मामलों में खरीदार-विक्रेता के पैन कार्ड नंबर गलत दर्ज किए गए या पूरी जानकारी ही नहीं दी गई, जिससे ये लेनदेन आयकर विभाग के रडार से बाहर रह गए।

आयकर अधिकारियों ने उपनिबंधक को 10 दिनों का नोटिस जारी कर सभी मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने और स्पष्टीकरण देने को कहा है। कार्रवाई आयकर निदेशक (INCI) कानपुर के निर्देशन में सहायक निदेशक विमलेश राय और आयकर अधिकारी अविनाश सोनवानी की टीम ने की, जिसमें निरीक्षक कुलदीप गुप्ता, बिनोद केशरी, राजेंद्र कुमार और अंकित श्रीवास्तव शामिल थे। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा।

यह कार्रवाई कोई इकलौती नहीं है। कुछ दिन पहले ही उपनिबंधक प्रथम कार्यालय में सर्वे के दौरान 2500 करोड़ रुपये के बैनामों में इसी तरह की अनियमितताएं मिली थीं। वहां भी 400 से अधिक पैन कार्ड में गड़बड़ियां पकड़ी गईं और दस्तावेज मांगे गए थे। कानूनी प्रावधानों के तहत, 30 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देना अनिवार्य है, लेकिन इन मामलों में जानबूझकर या लापरवाही से यह नियम तोड़ा गया लगता है।

आयकर विभाग अब इन गलत या अधूरी पैन वाली रजिस्ट्रियों से जुड़े व्यक्तियों की पहचान कर उनकी आयकर जांच करेगा। यदि टैक्स चोरी साबित हुई, तो जुर्माना, ब्याज और यहां तक कि आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति लेनदेन में पैन की अनिवार्यता काले धन पर अंकुश लगाने के लिए है, लेकिन ऐसी गड़बड़ियां बेनामी संपत्ति या टैक्स बचाने की कोशिश को दर्शाती हैं।

Pavan Singh
Pavan Singh

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