आरोप से पहले सदन में शपथ पत्र अनिवार्य, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का सख्त रुख
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बिना प्रमाण आरोप लगाने पर रोक, सदन की गरिमा और जवाबदेही पर दिया जोर
संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में अब किसी भी सदस्य द्वारा आरोप लगाने से पहले लिखित शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट किया है कि सदन की कार्यवाही के दौरान बिना ठोस प्रमाण के लगाए जाने वाले आरोपों पर रोक लगाने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था पर आरोप लगाना चाहता है, तो उसे पहले शपथ पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट करना होगा कि उसके पास आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य और साक्ष्य मौजूद हैं।
महाना ने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत सदस्य द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र को सदन की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे न केवल निराधार आरोपों पर अंकुश लगेगा, बल्कि सदन की कार्यवाही अधिक जिम्मेदार और तथ्यपरक बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नकाल और अन्य चर्चाओं के दौरान नियमों के पालन को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
इस निर्णय को विधानसभा की मर्यादा और अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को समान रूप से नियमों का पालन करना होगा। अध्यक्ष ने संकेत दिए कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष के इस रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस फैसले से सदन में होने वाली बहसों का स्तर ऊंचा होगा और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।






