
कृत्रिम अंग व उपकरण वितरण में फर्जीवाड़े के मामले में ट्रस्ट और पदाधिकारियों पर आगे बढ़ेगी सुनवाई
संवाद 24 लखनऊ: लखनऊ से जुड़े बहुचर्चित कृत्रिम अंग एवं उपकरण वितरण घोटाले में अदालत ने अहम कदम उठाते हुए लुईस खुर्शीद ट्रस्ट के खिलाफ दाखिल चार्जशीट का संज्ञान ले लिया है। यह मामला केंद्र सरकार की योजना के तहत दिव्यांगजनों को सहायता पहुंचाने के नाम पर कथित अनियमितताओं और आर्थिक गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2009-10 में दिव्यांगों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण वितरित करने के लिए सरकारी अनुदान स्वीकृत किया गया था। आरोप है कि इस योजना के तहत वास्तविक लाभार्थियों की बजाय कागजी औपचारिकताओं के सहारे उपकरणों का वितरण दिखाया गया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में ट्रस्ट और उससे जुड़े पदाधिकारियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए, लाभार्थियों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई और सरकारी अनुदान का एक बड़ा हिस्सा गलत तरीके से खर्च किया। मामले में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद विस्तृत जांच शुरू की गई थी।
अदालत द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लिए जाने के बाद अब ट्रस्ट और आरोपियों की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। आने वाली सुनवाइयों में आरोपों पर बहस होगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे तौर पर दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनके नाम पर चल रही कल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा है। प्रशासनिक स्तर पर भी इस प्रकरण को गंभीरता से लिया जा रहा है और यह संदेश देने की कोशिश है कि जनकल्याण योजनाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।






