युद्ध का स्वरूप हर दिन बदल रहा, सेना के पास दूसरा विकल्प नहीं: CDS जनरल अनिल चौहान
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संवाद 24। नई दिल्ली।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है और जो कॉन्सेप्ट भविष्य के लगते हैं, वे लागू होने से पहले ही पुराने पड़ सकते हैं। इसलिए भारतीय सेना को फ्यूचर वॉरफेयर के अनुसार तैयार करना अनिवार्य है, इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। वे गुरुवार को नई दिल्ली स्थित सैम मॉनेकशॉ सेंटर में आयोजित चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में फ्यूचर वॉर्स: मिलिट्री पावर के जरिए स्ट्रेटेजिक पोस्चरिंग विषय पर बोल रहे थे। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं, जबकि आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कीनोट एड्रेस दिया।

CDS चौहान ने कहा कि साइबरस्पेस, स्पेस और कॉग्निटिव वॉर जैसे नए युद्ध क्षेत्र पारंपरिक सीमाओं और संप्रभुता की अवधारणाओं को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक हथियार अब केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि दुश्मन के नेटवर्क, अर्थव्यवस्था और सूचना प्रणाली को भी निशाना बना सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ देश अब न्यूक्लियर हथियारों की स्वीकार्यता का संकेत दे रहे हैं, जिससे वैश्विक रणनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी भूगोल के प्रभाव को कम कर रही है और AI, हाइपरसोनिक्स, रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम तथा सेंसर-आधारित बैटलफील्ड पारदर्शिता मिलिट्री मामलों में क्रांति ला रही है। बड़ी ताकतें अपने हथियारों के जखीरे को आधुनिक बना रही हैं और सुरक्षा गठबंधन भी बदल रहे हैं, इसलिए भविष्य की दुनिया अधिक हिंसक और अस्थिर हो सकती है। उन्होंने कहा कि युद्ध अब नॉन-लीनियर होगा, जिसमें फ्रंट और डेप्थ जैसे पुराने युद्ध सिद्धांत अप्रासंगिक हो जाएंगे।
डायलॉग के पहले दिन “Reform to Transform: सशक्त और सुरक्षित भारत” थीम पर तीन महत्वपूर्ण सेशन आयोजित किए गए, जिनमें ऑपरेशन सिंदूर: एक रणनीतिक जीत, चेंजिंग स्टेटस को: डिफेंस रिफॉर्म्स की जरूरत और सिविल–मिलिट्री फ्यूजन: बदलाव के कारक शामिल रहे। आज कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उच्च स्तरीय सत्र में रक्षा सुधारों और विकसित भारत की रणनीतिक दिशा पर बड़ा संबोधन देंगे।
चाणक्य डिफेंस डायलॉग का उद्देश्य भारत की भविष्य की सुरक्षा संरचना को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय रणनीतिक संवाद स्थापित करना है, ताकि सेना तकनीक, रणनीति और मानसिक तैयारी के साथ आने वाले संघर्षों के लिए सक्षम हो सके।






