“बिहार ने बता दिया सरकारों की प्राथमिकता विकास ही होना चाहिए।” – पीएम मोदी
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को छठवें रामनाथ गोयनका व्याख्यान में कहा कि बिहार के नतीजों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारें जनता के जीवन में कितना सुधार लाती हैं, इसी से उनका राजनीतिक भविष्य तय होता है। उन्होंने कहा कि RJD सरकार को बिहार में 15 साल का मौका मिला था, लेकिन लालू प्रसाद यादव ने विकास की जगह जंगलराज को चुना। बिहार के लोगों ने इस विश्वासघात को कभी मंजूर नहीं किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हर राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता केवल विकास होना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव नहीं, बल्कि ‘इमोशनल मोड’ जरूरी है। मन में यह बेचैनी रहनी चाहिए कि एक पल भी बर्बाद न हो। इसी मानसिकता के कारण लोगों को चुनाव परिणामों में सकारात्मक बदलाव दिखाई देते हैं।
प्रधानमंत्री की स्पीच की प्रमुख बातें
1. पिछड़े जिलों और नक्सलवाद पर
मोदी ने कहा कि जिन जिलों को पिछली सरकारें पिछड़ा मानकर छोड़ चुकी थीं, उन्हें एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स में बदलकर नया जीवन दिया गया। युवा अधिकारियों को वहां भेजा गया और आज ये जिले अपने ही राज्यों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर जैसे क्षेत्रों में पत्रकारों को प्रशासन से ज्यादा अलग समूहों से अनुमति लेनी पड़ती थी, जबकि आज वहां बस्तर ओलंपिक आयोजित हो रहा है।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने वर्षों तक नक्सलवाद और अर्बन नक्सल नेटवर्क को बढ़ावा दिया, जिससे समस्या पहले जंगलों में और फिर शहरों में गहरी होती गई। अब देश में नक्सल प्रभावित क्षेत्र तेजी से कम हो रहे हैं।
2. मैकॉले की शिक्षा नीति ने हमें अपनी संस्कृति से किया दूर
पीएम मोदी ने कहा कि 1835 में मैकॉले ने भारतीयों की जड़ों को कमजोर करने की कोशिश की। उसने ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाई जिससे भारतीय अपनी सांस्कृतिक पहचान से दूर होने लगे। गांधी जी के स्वदेशी विचारों को महत्व नहीं मिला और हम नवाचार के लिए विदेशों पर निर्भर होते चले गए। चीन और जापान जैसे देशों ने अपनी भाषा नहीं छोड़ी, लेकिन भारत में स्थानीय भाषाओं और विरासत को नजरअंदाज किया गया। नई शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा, परंपरा और स्वदेशी मूल्यों को फिर प्राथमिकता दी जा रही है।
3. बिहार चुनाव परिणाम और जनता की भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के चुनावों में रिकॉर्ड मतदान हुआ और महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों से 9% अधिक था। इससे पता चलता है कि लोग उन दलों को समर्थन देते हैं जो उनकी आकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हैं। अगर राज्य विकास और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में प्रतिस्पर्धा करें, तो जनता उनसे और तेजी से जुड़ती है।
4. भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती
मोदी ने कहा कि बीते 25 सालों में महामारी, पड़ोसी देशों में संकट और वैश्विक आर्थिक मंदी जैसे कई चुनौतीपूर्ण दौर आए, फिर भी भारत की आर्थिक रफ्तार कम नहीं हुई। आज भी देश लगभग 7% की ग्रोथ दर्ज कर रहा है। जब दुनिया अनिश्चितता से जूझ रही है, भारत एक वाइब्रेंट और भरोसेमंद बाजार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की बढ़ती भागीदारी बताती है कि देश कितना आशावादी और आत्मविश्वासी है।
रामनाथ गोयनका के नाम पर स्थापित यह व्याख्यान मीडिया, लोकतंत्र और जवाबदेही पर गंभीर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। यहां ऐसे लोग शामिल होते हैं जो बदलाव और समकालीन चुनौतियों पर गहरी सोच रखते हैं।






