24 अक्टूबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 24 अक्टूबर 2026, शनिवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – हेमंत

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – त्रयोदशी दोपहर 01:38 PM तक, तत्पश्चात् चतुर्दशी
वार – शनिवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद रात्रि 08:32 PM तक, तत्पश्चात् रेवती
योग – व्याघात रात्रि 08:01 PM तक, तत्पश्चात् हर्षण
करण – तैतिल दोपहर 01:38 PM तक, तत्पश्चात् गर अगले दिन (25 अक्टूबर) प्रातः 00:52 AM तक, तत्पश्चात् वणिज

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:16 AM
सूर्यास्त – 05:35 PM
चन्द्रोदय – 04:12 PM
चन्द्रास्त – अगले दिन (25 अक्टूबर) प्रातः 05:10 AM
चन्द्र राशि – मीन
अभिजित मुहूर्त – 11:33 AM से 12:18 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:48 PM से 02:34 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 09:06 AM से 10:31 AM तक
यमगण्ड – 01:20 PM से 02:45 PM तक
गुलिक काल – 06:16 AM से 07:41 AM तक
दुर्मुहूर्त – 06:16 AM से 07:01 AM तक एवं 07:01 AM से 07:47 AM तक
कंटक – 11:33 AM से 12:18 PM तक

शुभ चौघड़िया
शुभ – 07:41 AM से 09:06 AM तक
चर – 11:55 AM से 01:20 PM तक
लाभ – 01:20 PM से 02:45 PM तक
अमृत – 02:45 PM से 04:10 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पूर्व
यात्रा उपाय – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो अदरक या उड़द खाकर अथवा श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
शनि त्रयोदशी एवं शरद पूर्णिमा पूर्व संध्या विचार
दोपहर 01:38 तक त्रयोदशी तिथि रहने से शनिवार के दिन त्रयोदशी का उत्तम संयोग ‘शनि त्रयोदशी’ का फल देता है। दोपहर के बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। शनिवार को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त उपासना समस्त कष्टों, बाधाओं और साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाती है।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र एवं पंचक विचार
रात्रि 08:32 तक उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रहेगा, जिसके स्वामी शनिदेव और अधिपति ‘अहिर्बुध्न्य’ (जल एवं पाताल के नाग देवता) हैं। चन्द्रमा के मीन राशि में होने से पंचक प्रभावी रहेगा। यह नक्षत्र स्थिरता, गम्भीर चिंतन, ध्यान और स्थायी महत्व के कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। रात्रि 08:32 के बाद बुध का नक्षत्र रेवती प्रारंभ होगा।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन-रात देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में संचरण करेंगे। शनिवार और मीन राशि के चन्द्रमा का योग अंतःकरण को शांत रखने और आध्यात्मिक साधना में सफलता के लिए श्रेष्ठ है। रात्रि 08:01 तक व्याघात योग रहेगा, अतः नए सांसारिक कार्यों का आरंभ रात्रि 08:01 के उपरांत हर्षण योग में करना श्रेयस्कर रहेगा।

आज का राशिफल – 24 अक्टूबर 2026 शनिवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक और सामाजिक कार्यों में धन व्यय होगा। दूरस्थ संपर्कों से लाभ मिलेगा। सेहत और खानपान पर विशेष ध्यान दें।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। वरिष्ठ सहयोगियों और मित्रों से पूरा समर्थन मिलेगा। अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।
उपाय – शनि चालीसा का पाठ करें और काले तिल का दान करें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। अधिकारियों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए अवसर मिलेंगे।
उपाय – भगवान हनुमान जी को सिन्दूर अर्पित करें।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धर्म-कर्म और सामाजिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से दूरी बनाए रखें। वित्तीय जोखिम न लें।
उपाय – सूर्यदेव को अर्घ्य दें और हनुमान बाहुक का पाठ करें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और आपसी तालमेल बढ़ाएगा। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने कर्जों से राहत मिलेगी।
उपाय – किसी निर्धन व्यक्ति को भोजन या काले वस्त्र दान करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी।
उपाय – सुंदरकांड का पाठ करें या हनुमान चालीसा पढ़ें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक मामलों में व्यस्त रखेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा। माताजी का आशीर्वाद फलेगा और गृह शांति बनी रहेगी।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन लाभकारी यात्राओं के योग हैं।
उपाय – शमी के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की संभावना बनेगी। परिवार में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहेगा।
उपाय – काले कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाएं।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जप करें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
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