
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 19 अक्टूबर 2026, सोमवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – अष्टमी प्रातः 10:53 AM तक, तत्पश्चात् नवमी
वार – सोमवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा अपराह्न 03:39 PM तक, तत्पश्चात् श्रवण
योग – धृति अगले दिन (20 अक्टूबर) प्रातः 00:35 AM तक, तत्पश्चात् शूल
करण – बव प्रातः 10:53 AM तक, तत्पश्चात् बालव रात्रि 11:56 PM तक, तत्पश्चात् कौलव
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:13 AM
सूर्यास्त – 05:39 PM
चन्द्रोदय – 01:31 PM
चन्द्रास्त – अगले दिन (20 अक्टूबर) 00:21 AM
चन्द्र राशि – मकर
अभिजित मुहूर्त – 11:33 AM से 12:19 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:50 PM से 02:36 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 07:39 AM से 09:05 AM तक
यमगण्ड – 10:30 AM से 11:56 AM तक
गुलिक काल – 01:22 PM से 02:48 PM तक
दुर्मुहूर्त – 12:19 PM से 01:05 PM तक एवं 02:36 PM से 03:22 PM तक
कंटक – 08:30 AM से 09:16 AM तक
शुभ चौघड़िया
अमृत – 06:13 AM से 07:39 AM तक
शुभ – 09:05 AM से 10:30 AM तक
चर – 01:22 PM से 02:48 PM तक
लाभ – 02:48 PM से 04:14 PM तक
अमृत – 04:14 PM से 05:39 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पूर्व
यात्रा उपाय – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दर्पण (शीशा) देखकर अथवा दूध या मिश्री का सेवन करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
शारदीय नवरात्रि (महानवमी – माँ सिद्धिदात्री पूजन, कन्या पूजन एवं नवरात्रि व्रत पारण विचार)
आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ‘महानवमी’ का महापर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। प्रातः 10:53 के बाद नवमी तिथि व्यापिनी होने से आज माँ दुर्गा के नवम स्वरूप ‘माँ सिद्धिदात्री’ की विधिवत पूजा और कन्या पूजन (हवन सहित) का विधान रहेगा। माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली और भक्तों के मनोरथ सिद्ध करने वाली हैं।
श्रवण नक्षत्र एवं शिव-शक्ति पूजन
अपराह्न 03:39 तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, तत्पश्चात् श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्रमा और अधिपति भगवान विष्णु हैं। सोमवार के दिन श्रवण नक्षत्र और मकर राशि के चन्द्रमा का संयोग भगवान शिव और माता भगवती की आराधना के लिए परम कल्याणकारी और मानसिक शांति प्रदाता माना जाता है।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन-रात शनिदेव की राशि मकर में संचरण करेंगे। धृति योग रात्रि पर्यंत रहने से किए गए कार्यों में स्थिरता, धैर्य और संकल्प शक्ति का लाभ मिलेगा। नवमी तिथि पर नवरात्रि का पूर्णाहुति हवन और कन्या पूजन समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति कराएगा।

आज का राशिफल – 19 अक्टूबर 2026 सोमवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपके मान-सम्मान और प्रभाव में वृद्धि करेगा। उच्चाधिकारियों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए अवसरों की प्राप्ति होगी।
उपाय – माँ सिद्धिदात्री को तिल और हलवे का भोग लगाएं।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – कन्या पूजन करें और छोटी कन्याओं को खीर या फल भेंट करें।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से दूरी बनाए रखें। जोखिम भरे वित्तीय फैसले न लें।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और आपसी तालमेल बढ़ाएगा। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और अक्षत अर्पित करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने कर्जों और रोगों से राहत मिलेगी।
उपाय – सूर्यदेव को अर्घ्य दें और माँ दुर्गा को लाल पुष्प अर्पित करें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक मामलों में व्यस्त रखेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा। माताजी का आशीर्वाद फलेगा और गृह शांति बनी रहेगी।
उपाय – माँ सिद्धिदात्री के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन लाभकारी यात्राओं के योग बन रहे हैं।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें और सिन्दूर अर्पित करें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की संभावना बनेगी। परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहेगा और वाणी से लाभ होगा।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – कन्याओं को उपहार दें और उनका आशीर्वाद लें।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक व सामाजिक कार्यों में धन व्यय होगा। दूरस्थ संपर्कों और विदेश से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। सेहत का ध्यान रखें।
उपाय – शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। वरिष्ठ सहयोगियों और मित्रों से पूरा समर्थन मिलेगा। व्यावसायिक योजनाओं में सफलता मिलेगी।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें और हवन का प्रसाद ग्रहण करें।
॥ शुभम भवतु ॥

